गंगा के ऊपर गरजा भारत का शौर्य, काशी के आसमान में गूंजा वायु शक्ति का उद्घोष

WhatsApp Channel Join Now

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने देखा ‘विंग्स ओवर गंगा’ एयर शो

 

राफेल, सुखोई, तेजस विमानों और सूर्यकिरण टीम के रोमांचक प्रदर्शन ने दर्शकों को किया मंत्रमुग्ध

 

वायुसेना की सटीक प्रहार क्षमता, परिचालन तत्परता और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में कार्रवाई करने के संकल्प का प्रदर्शन

वाराणसी, 25 अक्टूबर। मां गंगा की अविरल धारा, काशी के ऐतिहासिक घाट और आसमान में गूंजते भारतीय लड़ाकू विमानों की गगनभेदी गर्जना। कहीं राफेल की तेज रफ्तार, कहीं सुखोई की आक्रामक उड़ान, कहीं स्वदेशी तेजस के हैरतअंगेज हवाई करतब तो कहीं सूर्यकिरण एरोबैटिक टीम की आसमान पर उकेरी गई कलात्मक आकृतियां। आध्यात्मिक नगरी काशी रविवार को भारतीय वायुसेना के शौर्य, साहस, तकनीकी सामर्थ्य और पेशेवर दक्षता की साक्षी बनी। मां गंगा के ऊपर आयोजित भव्य एयर शो ‘विंग्स ओवर गंगा’ में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भारतीय वायुसेना की 94वीं वर्षगांठ के अवसर पर वायु शक्ति का अद्भुत प्रदर्शन देखा।

123

इस ऐतिहासिक आयोजन में सैन्य विमानन की विरासत, आधुनिक युद्धक क्षमता, स्वदेशी तकनीक और राष्ट्र की सुरक्षा के प्रति वायु योद्धाओं के समर्पण का प्रभावशाली संगम देखने को मिला। काशी के आसमान में जब विमानों की गर्जना गूंजी तो गंगा के दोनों तटों पर मौजूद दर्शकों की निगाहें आसमान पर टिक गईं। हर फॉर्मेशन के साथ रोमांच बढ़ता गया और हर करतब के बाद तालियों की गड़गड़ाहट वायु योद्धाओं के साहस और कौशल का अभिनंदन करती रही। यह केवल विमानों की उड़ान का प्रदर्शन नहीं था, बल्कि बदलते समय के साथ भारतीय वायुसेना की परिचालन क्षमता, युद्धक तैयारी, सटीक प्रहार क्षमता और तकनीकी विकास की यात्रा का जीवंत प्रस्तुतिकरण था।

123

सारंग के कौशल से लेकर गंगा पर पुष्पवर्षा तक, परंपरा और पराक्रम का संगम
कार्यक्रम की शुरुआत भारतीय वायुसेना की प्रसिद्ध सारंग हेलीकॉप्टर डिस्प्ले टीम के प्रदर्शन के साथ हुई। हेलीकॉप्टरों के बीच सटीक तालमेल, नियंत्रित गति और समन्वित हवाई करतबों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया। इसके बाद वायुसेना प्रमुख एवं भारतीय वायुसेना के समस्त वायु योद्धाओं की ओर से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का स्वागत और अभिनंदन किया गया। वायुसेना प्रमुख ने इस ऐतिहासिक अवसर पर प्रधानमंत्री को स्मृति चिह्न भेंट किया। समारोह में भारतीय वायुसेना के 94 गौरवशाली वर्षों की यात्रा को काशी की आध्यात्मिक विरासत से जोड़ते हुए कर्तव्य, त्याग और राष्ट्रसेवा के भाव को रेखांकित किया गया।

123

ओंकार फॉर्मेशन ने किया राष्ट्रध्वज को सलाम, गंगा फॉर्मेशन ने बरसाए फूल
फ्लाईपास्ट के अगले चरण में तीन एमआई-17 वी5 हेलीकॉप्टरों की ‘ओंकार’ फॉर्मेशन ने प्रवेश किया। ग्रुप कैप्टन अनुज गुप्ता के नेतृत्व में उड़ रहे हेलीकॉप्टरों पर राष्ट्रीय ध्वज और भारतीय वायुसेना के ध्वज लहरा रहे थे। भगवान शिव से जुड़े पवित्र ‘ओंकार’ के नाम वाली इस संरचना ने राष्ट्रभक्ति और आध्यात्मिक आस्था को एक साथ प्रस्तुत किया। इसके बाद ग्रुप कैप्टन दीपांकर दास के नेतृत्व में तीन चेतक हेलीकॉप्टरों की ‘गंगा’ फॉर्मेशन ने काशी के आकाश में प्रवेश किया। मां गंगा के प्रति श्रद्धा और सम्मान व्यक्त करने के लिए हेलीकॉप्टरों से पुष्पवर्षा की गई। आकाश से बरसते फूलों और नीचे बहती गंगा के बीच बना यह दृश्य समारोह के सबसे भावपूर्ण क्षणों में शामिल रहा।

123

रुद्र की गर्जना, भागीरथी का सटीक समन्वय और त्रिदेव की संयुक्त शक्ति
इसके बाद आसमान में भारतीय वायुसेना के शक्तिशाली सुखोई-30 एमकेआई लड़ाकू विमान की गर्जना सुनाई दी। ‘रुद्र’ कॉल साइन के साथ विंग कमांडर एस. भार्गव के नेतृत्व में विमान ने अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज कराई। इसी क्रम में सुखोई-30 एमकेआई से जुड़े हवाई निगरानी और टोही कौशल का भी प्रदर्शन किया गया। स्क्वाड्रन लीडर निखिल बाबू ने ‘शंकर’ कॉल साइन के साथ इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल प्रणाली का उपयोग करते हुए वायुसेना की इंटेलिजेंस, सर्विलांस और रिकॉनिसेंस (आईएसआर) क्षमताओं का परिचय दिया। इसके बाद ‘भागीरथी’ फॉर्मेशन में लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर (एलसीएच) और अमेरिकी मूल के अपाचे अटैक हेलीकॉप्टरों का सटीक समन्वय दिखाई दिया। ग्रुप कैप्टन अनुभव महेंद्र के नेतृत्व वाली इस संरचना ने आधुनिक युद्धक्षेत्र में हेलीकॉप्टरों की भूमिका और उनकी परिचालन उपयोगिता को प्रदर्शित किया।

123

‘त्रिदेव’ फॉर्मेशन ने तीनों सेनाओं के संयुक्त संकल्प को प्रदर्शित किया। भारतीय नौसेना के कामोव-31 हेलीकॉप्टर और भारतीय वायुसेना तथा थलसेना के एएलएच मार्क-3 हेलीकॉप्टरों का साझा प्रदर्शन सैन्य सेवाओं के बीच समन्वय और संयुक्त अभियान क्षमता का प्रतीक बना। इसका नेतृत्व भारतीय नौसेना के कैप्टन दिव्येंदु शर्मा ने किया। तीनों सेनाओं का संदेश एक ही था- तीन सेवाएं, एक मिशन और एक राष्ट्र। ‘अलकनंदा’ फॉर्मेशन में सुखोई और एएलएच हेलीकॉप्टरों ने अपनी उड़ान के तालमेल से दर्शकों को प्रभावित किया। ग्रुप कैप्टन हर्ष पांडे के नेतृत्व में प्रस्तुत इस संरचना ने संयुक्त परिचालन क्षमता और अनुशासित उड़ान कौशल का प्रदर्शन किया।

123

आसमान में उभरा 94 का अंक, भैरव से कैलाश तक दिखी सैन्य विमानन की व्यापक क्षमता
भारतीय वायुसेना की 94वीं वर्षगांठ को विशिष्ट रूप देने के लिए एक हेलीकॉप्टर के पिछले रैंप से आकाश में ‘94’ का अंक प्रदर्शित किया गया। इसके साथ वर्षगांठ का विशेष बैनर भी दिखाया गया। यह दृश्य वायुसेना के 94 वर्षों के साहस, बलिदान, उपलब्धियों और निरंतर राष्ट्रसेवा का प्रतीक बना। इस प्रदर्शन ने यह भी दिखाया कि सैन्य विमानन में केवल शक्ति ही नहीं, बल्कि पायलटों की सटीकता, प्रशिक्षण और सूक्ष्म समन्वय भी उतना ही महत्वपूर्ण है। इसके बाद ‘भैरव’ फॉर्मेशन में सी-295 और डोर्नियर-228 विमानों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। विंग कमांडर अनिमेश लांबा के नेतृत्व में इस प्रदर्शन ने भारतीय वायुसेना की परिवहन क्षमता, बहुउद्देशीय उपयोगिता और सटीक फॉर्मेशन फ्लाइंग को प्रदर्शित किया। काशी के रक्षक बाबा कालभैरव के नाम वाली इस संरचना ने निगरानी, विश्वसनीयता और सुरक्षा के भाव को सैन्य विमानन से जोड़ा।

123

‘कैलाश’ फॉर्मेशन में सी-130 और एएन-32 विमानों ने अपनी एयरलिफ्ट क्षमता तथा समन्वित उड़ान का प्रदर्शन किया। इसके बाद ‘त्रिलोचन’ फॉर्मेशन में एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल (AEW&C) विमान और मिग-29 लड़ाकू विमान नजर आए। यह संयोजन आधुनिक हवाई अभियानों में दूर तक निगरानी रखने, संभावित खतरों का आकलन करने और लड़ाकू विमानों को आवश्यक सामरिक जानकारी उपलब्ध कराने की अहमियत को रेखांकित करता है। ‘नटराज’ फॉर्मेशन में भारतीय नौसेना के पी-8आई समुद्री निगरानी विमान और वायुसेना के मिराज-2000 लड़ाकू विमान का प्रदर्शन हुआ। इसके बाद ‘महादेव’ फॉर्मेशन में आईएल-78 एरियल रिफ्यूलिंग टैंकर और मिराज-2000 लड़ाकू विमानों ने हिस्सा लिया। हवा में ईंधन भरने की क्षमता आधुनिक वायु अभियानों का एक महत्वपूर्ण आधार है, क्योंकि इससे लड़ाकू विमानों की परिचालन पहुंच और मिशन पूरा करने की क्षमता बढ़ती है। 

123

विश्वनाथ, पशुपति और नीलकंठ ने दिखाया लड़ाकू विमानों का दम
काशी की आध्यात्मिक पहचान को ध्यान में रखते हुए कई फॉर्मेशन के नाम भी विशेष रखे गए थे। ‘विश्वनाथ’ फॉर्मेशन में तीन शक्तिशाली सुखोई-30 एमकेआई लड़ाकू विमान शामिल रहे। विंग कमांडर आयुष कुणाल के नेतृत्व में इन विमानों ने आकाश में अपनी गति, शक्ति और सटीक उड़ान कौशल का प्रदर्शन किया। इसके बाद चार जगुआर लड़ाकू विमानों की ‘पशुपति’ फॉर्मेशन ने डायमंड संरचना में उड़ान भरी। ग्रुप कैप्टन मयंक पवार के नेतृत्व में विमानों के बीच सटीक दूरी, अनुशासन और तालमेल ने दर्शकों को प्रभावित किया। जगुआर विमान की भूमिका मुख्यतः जमीनी लक्ष्यों पर प्रहार करने से जुड़ी रही है, इसलिए यह फॉर्मेशन वायुसेना की स्ट्राइक क्षमता का प्रतीक बना।

123

तीन राफेल लड़ाकू विमानों की ‘नीलकंठ’ फॉर्मेशन ने अत्याधुनिक युद्धक विमानन शक्ति का प्रदर्शन किया। विंग कमांडर कौस्तुभ नलावड़े के नेतृत्व में विंग फॉर्मेशन में उड़ते विमानों ने आधुनिक एवियोनिक्स, उच्च परिचालन क्षमता और समन्वित उड़ान का प्रभावशाली परिचय दिया। इसके बाद ‘प्रचंड’ फॉर्मेशन में सुखोई-30 एमकेआई, राफेल, जगुआर, मिराज-2000, एलसीए तेजस और मिग-29 जैसे विभिन्न लड़ाकू विमानों का संयुक्त प्रदर्शन देखने को मिला। अलग-अलग पीढ़ियों और भूमिकाओं वाले इन विमानों का एक साथ आना भारतीय वायुसेना की बहुआयामी युद्धक क्षमता और विविध परिस्थितियों में मिशन पूरा करने की तैयारी का परिचायक रहा।

123

स्वदेशी तेजस ने एकल प्रदर्शन से बांधा समां, दिखाए हैरतअंगेज करतब
एयर शो का सबसे आकर्षक और तकनीकी दृष्टि से महत्वपूर्ण पड़ाव स्वदेशी लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एलसीए) तेजस का एकल प्रदर्शन रहा। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) और भारतीय निजी उद्योग की भागीदारी से विकसित इस विमान ने आत्मनिर्भर भारत की रक्षा तकनीक का प्रभावशाली उदाहरण प्रस्तुत किया। ग्रुप कैप्टन रूप के नेतृत्व में तेजस ने काशी के आकाश में अपनी फुर्ती, नियंत्रण और उड़ान कौशल का प्रदर्शन किया। तेजस ने पहले चार-बिंदु रोल प्रस्तुत किया, जिसमें विमान ने अपनी धुरी पर नियंत्रित घुमाव लेते हुए सटीकता का परिचय दिया। इसके बाद वर्टिकल पिच-बैक, मैक्सिमम रेट टर्न और रेड आई टर्न जैसे करतबों ने दर्शकों को रोमांचित किया।

123

इन करतबों के जरिए विमान की दिशा बदलने, तीव्र मोड़ लेने और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में नियंत्रण बनाए रखने की क्षमता को प्रदर्शित किया गया। इसके बाद तेजस ने ‘वर्टिकल चार्ली’ और ‘फॉर्मूला वन टर्न’ जैसे करतब प्रस्तुत किए। धीमी गति पर नियंत्रित उड़ान के ‘स्लो मार्च’ प्रदर्शन ने यह दिखाया कि लड़ाकू विमान की दक्षता केवल अधिकतम रफ्तार तक सीमित नहीं होती, बल्कि विभिन्न गति और परिस्थितियों में सटीक नियंत्रण भी उतना ही महत्वपूर्ण है। तेजस के प्रदर्शन का समापन ‘स्पाइडरमैन फेयरवेल’ के साथ हुआ। विमान ने उल्टी उड़ान की मुद्रा में दर्शकों का अभिवादन किया। इस दौरान गंगा के दोनों तटों से तालियों की गूंज सुनाई दी। तेजस का प्रदर्शन केवल हवाई करतबों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने स्वदेशी एयरोस्पेस इंजीनियरिंग, तकनीकी आत्मनिर्भरता और देश में विकसित रक्षा प्रणालियों की बढ़ती क्षमता का संदेश भी दिया।

123

मिराज, सुखोई और राफेल के एरियल स्प्लिट ने बढ़ाया रोमांच
तेजस के प्रदर्शन के बाद मिराज-2000, सुखोई-30 एमकेआई और राफेल विमानों की फॉर्मेशन ने पुनः प्रवेश किया। ‘महादेव’, ‘विश्वनाथ’ और ‘नीलकंठ’ संरचनाओं में विमानों ने एरियल स्प्लिट जैसे करतब प्रस्तुत किए। फॉर्मेशन में उड़ते विमानों का निर्धारित समय और दूरी पर अलग-अलग दिशाओं में बंटना पायलटों के अनुशासन, आपसी समन्वय और उच्च स्तर के प्रशिक्षण का परिचायक रहा। इसके बाद दर्शकों को एक काल्पनिक हवाई युद्ध का दृश्य दिखाया गया। इसमें दो जगुआर विमानों को जमीनी लक्ष्य पर हमला करने की भूमिका में रखा गया, जबकि दो सुखोई विमानों ने उन्हें रोकने और काल्पनिक शत्रु विमानों को निष्क्रिय करने की भूमिका निभाई।

123

राडार आधारित पहचान, पीछा करने और लक्ष्य को रोकने की इस नाटकीय प्रस्तुति ने आधुनिक हवाई युद्ध की जटिलता और वायु रक्षा में त्वरित निर्णय लेने के महत्व को सामने रखा। इस प्रदर्शन ने दर्शकों को यह समझने का अवसर दिया कि हवाई युद्ध में केवल विमान की गति या हथियार ही निर्णायक नहीं होते। पायलट का प्रशिक्षण, लक्ष्य की पहचान, सामरिक स्थिति का आकलन, सेंसर से प्राप्त जानकारी और समय पर लिया गया निर्णय भी उतने ही महत्वपूर्ण होते हैं।

123

आधुनिक हथियार प्रणालियों से सुसज्जित विमानों ने दिखाई प्रहार क्षमता
प्रदर्शन के दौरान विभिन्न लड़ाकू विमानों से जुड़ी आधुनिक हथियार प्रणालियों का भी उल्लेख किया गया। सुखोई-30 एमकेआई के साथ ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल, राफेल के साथ स्कैल्प, जगुआर के साथ सेंसर फ्यूज्ड वेपन, मिराज-2000 के साथ क्रिस्टल मेज तथा तेजस व मिग-29 के साथ दृश्य सीमा से परे मार करने वाली मिसाइलों का संदर्भ दिया गया। इन प्रणालियों का उल्लेख भारतीय वायुसेना की विभिन्न प्रकार के लक्ष्यों के विरुद्ध कार्रवाई करने की क्षमता को प्रदर्शित करता है। लंबी दूरी पर सटीक प्रहार, जमीनी लक्ष्यों पर हमला, हवाई श्रेष्ठता और आधुनिक सेंसरों के जरिए लक्ष्य की पहचान- ये सभी आधुनिक वायु अभियानों के महत्वपूर्ण आयाम हैं। कार्यक्रम में ऑपरेशन बालाकोट और ऑपरेशन सिंदूर का भी उल्लेख किया गया। इन अभियानों के संदर्भ में वायुसेना की सटीक प्रहार क्षमता, परिचालन तत्परता और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में कार्रवाई करने के संकल्प को प्रदर्शित किया गया।

123

दशाश्वमेध फॉर्मेशन और सूर्य किरण टीम के साथ भव्य समापन
एयर शो के अंतिम चरण में सी-17 ग्लोबमास्टर और सूर्य किरण एरोबैटिक टीम की उपस्थिति ने समारोह को नई ऊंचाई दी। ‘दशाश्वमेध’ कॉल साइन वाली फॉर्मेशन में विशाल सी-17 ग्लोबमास्टर के साथ सूर्य किरण टीम का प्रदर्शन काशी की सांस्कृतिक विरासत और आधुनिक वायु शक्ति के संगम का प्रतीक बना। दशाश्वमेध घाट के नाम से जुड़ी इस संरचना ने समारोह के स्थानीय और राष्ट्रीय महत्व को एक साथ प्रदर्शित किया।

123

इसके बाद सूर्य किरण एरोबैटिक टीम ने आसमान में रोमांचक करतबों की श्रृंखला प्रस्तुत की। ग्रुप कैप्टन अजय दशरथ के नेतृत्व में नौ हॉक विमानों की टीम ने अनुशासित और समन्वित उड़ान से दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया। विमानों ने एक साथ उड़ते हुए अपनी संरचना बदली, अलग-अलग आकृतियां बनाईं और अत्यंत कम अंतर पर सटीक तालमेल के साथ हवाई करतब दिखाए। टीम ने तेजस को समर्पित फॉर्मेशन, विजय फॉर्मेशन, फ्लावर और बैरल रोल जैसे प्रदर्शन प्रस्तुत किए। एक विमान के फॉर्मेशन से अलग होने और बाद में पुनः प्रदर्शन में शामिल होने के दृश्यों ने रोमांच बढ़ाया। विमानों के एक साथ दिशा बदलने, रोल करने और आकाश में सममित आकृतियां बनाने के दौरान दर्शकों की तालियां लगातार गूंजती रहीं। सूर्य किरण टीम का प्रदर्शन इस बात का प्रमाण था कि एरोबैटिक्स केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि पायलटों के असाधारण आत्मविश्वास, एकाग्रता, उड़ान अनुशासन और आपसी विश्वास की परीक्षा भी है। टीम की सटीकता ने भारतीय वायुसेना के प्रशिक्षण और पेशेवर उत्कृष्टता की झलक प्रस्तुत की।

123

कार्यक्रम में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, भारतीय सेनाओं के अधिकारियों समेत कई विशिष्ट अतिथिगण भी उपस्थित रहे।

तस्वीरों में देखिये अद्भुत नजारा ......

123

123

123

123

123

123

123

123

123

123

123

123

123

123

123

123

123

123

123

123

123

123

123

123

123

123

123

123

123

123

123

123

123

123

123

123

123

123

123

123

123

123

123

123

123

123

BK Pathak
BK Pathak

21398 Articles

Beerkeshwar Pathak Journalist Beerkeshwar Pathak, who entered the field of journalism in 2015, has nearly a decade of experience in print and digital media. He holds a postgraduate diploma in journalism and has established his reputation through reporting at prestigious media outlets like Amar Ujala, Hindustan, and Dainik Jagran. He has a special interest and expertise in reporting on political and social issues, news analysis, and editing, along with eventful news. He currently serves as an editor at Live VNS, a leading digital news platform in Varanasi. In this role, he is contributing to reshaping digital journalism and delivering important information to readers through factual and reliable news. Factual investigation of news and effective editing are key aspects of his journalism.

Share this story