स्टीयरिंग थाम अपने जीवन के सफर की दिशा खुद तय कर रही हैं सीता देवी
कभी तानों और आलोचनाओं का सामना करने वाली सीता देवी आज अपने गांव की बनीं पहचान
महिलाओं को ई-ऑटो रिक्शा चलाने का प्रशिक्षण देकर बना रहीं आत्मनिर्भर, खुद भी कर रहीं अच्छी कमाई
ऑटो रिक्शा की रफ्तार ने जीवन को भी पटरी पर ला दिया, अब बच्चों का दाखिला बड़े स्कूल में कराने की तैयारी
योगी सरकार की कल्याणकारी नीतियों का बल पाकर उत्तर प्रदेश की महिलाएं अब अपने भविष्य की दिशा खुद तय कर रहीं हैं। हरिहरपुर गांव की सीता देवी ने यह साबित कर दिया कि अगर हौसला मजबूत हो तो राह खुद बन जाती है। कभी समाज के तानों और आलोचनाओं का सामना करने वाली सीता देवी आज अपने गांव की पहचान बन चुकी हैं। एनआरएलएम योजना की स्वयं सहायता समूह की सदस्य के रूप से आत्मनिर्भर होने की अलख जगी, तो योगी सरकार की सीएम युवा उद्यमी योजना ने उनके सपनों को पंख दिए और आज वह ई-ऑटो रिक्शा की मालिक हैं।
रोहनियां क्षेत्र के ग्राम हरिहरपुर की सीता देवी ने बताया कि शुरुआत आसान नहीं थी। जब उन्होंने ई-ऑटो रिक्शा चलाने का निर्णय लिया, तो लोगों ने तरह-तरह की बातें बनाईं। उनके ताने आम थे। लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। सरकार की सीएम उद्यमी योजना से मिले ऋण के रूप में आर्थिक सहयोग मिला और उन्होंने ई-ऑटो रिक्शा खरीदा। धीरे-धीरे मेहनत रंग लाई और आज वही लोग, जो कभी ताने मारते थे, सफर के लिए उनसे मदद मांगते हैं। सीता देवी सरकारी योजनाओं के अंतर्गत अन्य इच्छुक महिलाओं को ई-ऑटो रिक्शा चलाने का प्रशिक्षण देकर उनको आत्मनिर्भर बनाने के साथ प्रतिदिन लगभग ग्यारह सौ रुपये से अधिक कमा रही है
आमदनी के साथ आत्मविश्वास बढ़ा
सीता देवी कहती हैं कि इस काम ने उनकी आमदनी ही नहीं बढ़ाई, बल्कि आत्मविश्वास भी कई गुना बढ़ा दिया है। ऑटो रिक्शा की रफ्तार ने उनके जीवन को भी पटरी पर ला दिया है। अब वह अपने बच्चों का दाखिला बड़े स्कूल में कराने की तैयारी कर रहीं हैं, ताकि उन्हें बेहतर शिक्षा मिल सके।
ससुराल का मिला साथ
उनके ससुराल का सहयोग भी इस सफर में अहम रहा। आमतौर पर जहां ससुराल में महिलाओं की पहचान घर की चारदीवारी तक सीमित रह जाती है, वहीं आज उनके गांव में परिवार को सीता देवी के नाम से जाना जाता है। यह बदलाव उनके लिए गर्व की बात है।
महिलाओं को ई-ऑटो रिक्शा का प्रशिक्षण देकर बना रहीं आत्मनिर्भर
महिला चालक होने का उन्हें एक और सकारात्मक अनुभव मिला है। महिला यात्री खुद को सुरक्षित महसूस करतीं हैं और अक्सर उनके ही ऑटो में सफर करना पसंद करती हैं। इतना ही नहीं, सीता देवी अब अन्य महिलाओं को भी ऑटो चलाने का प्रशिक्षण दे रही हैं, ताकि वे भी आत्मनिर्भर बन सकें।
21 से 40 वर्ष तक के युवाओं को उद्यम लगाने का मौका दे रही योगी सरकार
जिला उद्योग प्रोत्साहन तथा उद्यमिता विकास केंद्र के उपायुक्त अभिषेक प्रियदर्शी ने बताया कि सीता देवी ई-ऑटो रिक्शा चलाने के साथ ही महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रशिक्षण भी दे रहीं हैं। उन्होंने बताया कि सरकार इस योजना के लिए 21 से 40 वर्ष आयु तक के युवाओं को उद्यम लगाने का मौका दे रही है। इसमें उद्योग और सेवा के क्षेत्र में काम शुरू करने के लिए नियमानुसार 5 लाख रुपये तक का ब्याज मुक्त बिना गारंटी का ऋण दिया जा रहा है। इस योजना में पहले 6 महीने तक ईएमआई भरने की भी जरूरत नहीं है। अगर आवेदक चार साल के अंदर 5 लाख रुपये तक के ऋण का सफलतापूर्वक भुगतान कर देता है, तो वह 10 लाख रुपये तक का ऋण लेने का पात्र हो सकता है। प्रथम चरण में ब्याज मुक्त ऋण के साथ 10% अनुदान तथा द्वितीय चरण में 7.5 लाख तक के ऋण पर 50% ब्याज अनुदान प्राप्त होगा।
योजना का उद्देश्य महिलाओं में उद्यमिता विकास को बढ़ावा देना
सेफ मोबिलिटी परियोजना की जिला समन्वयक आरती ग्रोवर ने बताया कि इस योजना का उद्देश्य महिलाओं में उद्यमिता विकास को बढ़ावा देना तथा उन्हें स्वयं का रोजगार स्थापित करने में सहयोग प्रदान करना है। ये योजना ई-रिक्शा संचालन के लिए इच्छुक महिलाओं को प्रशिक्षण देना नियमित यात्रियों की व्यवस्था एवं विभिन्न संस्थानों से लिंक स्थापित करना हैं, जिससे उनकी आय में वृद्धि हो सके।
वर्जन
योगी सरकार महिलाओं को हर क्षेत्र में अवसर उपलब्ध करा रही है। शिक्षा और आत्मविश्वास ही महिलाओं की सबसे बड़ी ताकत है। अगर अवसर मिले और परिवार साथ दे, तो महिलाएं हर क्षेत्र में आगे बढ़ सकती हैं।
-सीता देवी, ई-रिक्शा चालक

