आठ साल बाद अधिकमास में मनाया जाएगा गंगा दशहरा, 26 मई को बन रहा दुर्लभ संयोग, गंगा में 10 डुबकियां लगाने का विशेष पुण्य
- हस्त नक्षत्र और वृषभ लग्न में होगा मां गंगा का पूजन
- सिद्धि और बुधादित्य राजयोग से बढ़ेगा पर्व का महत्व
- इसी दिन स्वर्ग से पृथ्वी पर हुआ था मां गंगा का अवतरण
वाराणसी। धर्म और अध्यात्म की नगरी काशी में इस वर्ष गंगा दशहरा का पर्व विशेष आध्यात्मिक महत्व के साथ मनाया जाएगा। आठ वर्षों बाद अधिकमास यानी पुरुषोत्तम मास में गंगा दशहरा का दुर्लभ संयोग बन रहा है। ज्येष्ठ मास शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मां गंगा के पृथ्वी पर अवतरण का यह महापर्व 26 मई को श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाएगा। इस बार गंगा अवतरण का वही विशेष संयोग बन रहा है, जिसमें हस्त नक्षत्र और वृषभ लग्न में मां गंगा का पृथ्वी पर अवतरण हुआ था। ज्योतिषीय दृष्टि से यह संयोग अत्यंत पुण्यदायी और सौ गुना फल देने वाला माना जा रहा है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष दशमी को मां गंगा स्वर्ग से पृथ्वी पर अवतरित हुई थीं। जब ज्येष्ठ मास में अधिकमास पड़ता है, तब गंगा दशहरा अधिकमास वाले ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की दशमी को ही मनाया जाता है। इससे पहले वर्ष 2018 में यह दुर्लभ संयोग बना था, जब 24 मई को गंगा दशहरा मनाया गया था।
श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के अध्यक्ष एवं प्रख्यात ज्योतिषाचार्य प्रो. नागेंद्र पांडेय ने बताया कि इस बार दशमी तिथि 25 मई की सुबह 8:02 बजे से प्रारंभ होकर 26 मई की सुबह 7:40 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर गंगा दशहरा का पर्व 26 मई को मनाया जाएगा। उन्होंने बताया कि मां गंगा का अवतरण हस्त नक्षत्र और वृषभ लग्न में हुआ था और इस वर्ष भी वही संयोग बन रहा है, जो इस पर्व के महत्व को और बढ़ा रहा है।
छह विशिष्ट योग बना रहे पर्व को अत्यंत शुभ
इस वर्ष गंगा दशहरा पर कई दुर्लभ और शुभ योगों का निर्माण हो रहा है। सिद्धि योग, बुधादित्य राजयोग, हर्ष योग, रवि योग, व्यतिपात योग, ध्वज योग और धाता योग का विशेष संयोग बन रहा है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इन योगों में किए गए स्नान, दान और पूजन का फल कई गुना बढ़ जाता है।
विशेष रूप से वृषभ राशि में सूर्य और बुध की युति से बुधादित्य राजयोग बन रहा है। वहीं शुक्र की उपस्थिति से मालव्य योग का निर्माण होगा। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार यह योग सुख-समृद्धि, वैभव, धन और प्रतिष्ठा प्रदान करने वाला माना जाता है। श्रद्धालुओं के लिए यह पर्व आध्यात्मिक उन्नति और पुण्य प्राप्ति का श्रेष्ठ अवसर माना जा रहा है।
गंगा स्नान और 10 डुबकियों का विशेष महत्व
गंगा दशहरा पर मां गंगा में स्नान, पूजन और दान का विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन गंगा में 10 डुबकी लगाने से मनुष्य को 10 प्रकार के पापों से मुक्ति मिलती है। इसी कारण इस पर्व को “दशहरा” कहा जाता है।
इस दिन 10 दीपदान, 10 प्रकार के फल अर्पित करने और 10 ब्राह्मणों को दान देने की परंपरा है। मिट्टी का घड़ा दान करना भी अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। काशी के घाटों पर इस दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु स्नान और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं।
गंगा पूजन के विशेष शुभ मुहूर्त
गंगा दशहरा पर स्नान और पूजन के लिए कई उत्तम मुहूर्त बन रहे हैं। ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करना विशेष फलदायी माना गया है।
ब्रह्म मुहूर्त (स्नान हेतु) : सुबह 4:04 बजे से 4:45 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त (पूजन हेतु) : दिन में 11:51 बजे से 12:46 बजे तक
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार पूरे दिन गंगा पूजन और दान-पुण्य के लिए शुभ रहेगा।
घाटों पर उमड़ेगी आस्था की भीड़
गंगा दशहरा को लेकर काशी के प्रमुख घाटों पर तैयारियां शुरू हो गई हैं। दशाश्वमेध घाट, अस्सी घाट और राजेंद्र प्रसाद घाट सहित विभिन्न घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने की संभावना है। प्रशासन भी सुरक्षा, साफ-सफाई और भीड़ नियंत्रण को लेकर तैयारियों में जुट गया है। काशी में गंगा दशहरा केवल एक पर्व नहीं, बल्कि आस्था, अध्यात्म और सनातन परंपरा का जीवंत उत्सव माना जाता है। इस बार अधिकमास और दुर्लभ योगों के कारण इसका महत्व और अधिक बढ़ गया है।

