मार्च-अप्रैल की गर्मी में अलर्ट रहें किसान, सही समय पर करें गेहूं की कटाई : विशेषज्ञों ने दी अहम सलाह
वाराणसी। पूर्वी उत्तर प्रदेश में मार्च-अप्रैल की बढ़ती गर्मी गेहूं किसानों के लिए बड़ी चुनौती बन रही है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसान समय पर कटाई करें तो टर्मिनल हीट (अंतिम चरण की गर्मी) से होने वाले नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकता है और दाने की गुणवत्ता भी बेहतर बनी रहती है।
कब करें गेहूं की कटाई, क्या है सही समय?
विशेषज्ञों के अनुसार, पूर्वी उत्तर प्रदेश में गेहूं की बुवाई आमतौर पर मध्य नवंबर से मध्य दिसंबर के बीच होती है और फसल मार्च के अंत से अप्रैल के मध्य तक कटाई के लिए तैयार हो जाती है।
यदि बुवाई 1 से 20 नवंबर के बीच की गई है, तो फसल का दाना भराव चरण गर्मी से पहले पूरा हो जाता है। ऐसे में मार्च के अंतिम सप्ताह से अप्रैल के पहले सप्ताह तक कटाई करना सबसे उपयुक्त माना जाता है।
कटाई का सही समय तब होता है जब फसल पूरी तरह परिपक्व हो जाए—पत्तियां और बालियां सुनहरी पीली हो जाएं और दानों में नमी करीब 18–20% रह जाए।
टर्मिनल हीट से बचाव क्यों जरूरी?
मार्च के अंत और अप्रैल में तापमान तेजी से बढ़ता है। इस दौरान अगर कटाई में देरी होती है तो दाने सिकुड़ने लगते हैं और खेत में झड़ने (शैटरिंग) का खतरा बढ़ जाता है, जिससे पैदावार में कमी आ सकती है।
इसलिए किसानों को सलाह दी जाती है कि फसल पकने के तुरंत बाद कटाई कर लें, ताकि गर्मी के असर से नुकसान कम हो सके।
सुबह-शाम करें कटाई
विशेषज्ञों का कहना है कि कटाई सुबह 7 से 11 बजे या शाम 4 से 7 बजे के बीच करनी चाहिए। इससे दानों के झड़ने और नमी के अत्यधिक नुकसान से बचाव होता है।
बेहतर उत्पादन के लिए अपनाएं ये तरीके
भविष्य के लिए किसानों को शून्य जुताई (जीरो टिलेज) तकनीक अपनाने की सलाह दी गई है। साथ ही जल्दी और लंबी अवधि वाली किस्मों का संयोजन करने से कटाई चरणबद्ध तरीके से हो सकती है, जिससे श्रम का दबाव कम होता है और उत्पादन बेहतर रहता है।
दाने की गुणवत्ता बनाए रखने के उपाय
कटाई के समय दानों की नमी 18–20% होनी चाहिए, जबकि सुरक्षित भंडारण के लिए इसे 12–14% तक लाना जरूरी है। अधिक नमी होने पर अनाज की गुणवत्ता खराब हो सकती है और खरीद में भी परेशानी आ सकती है।
बीज के रूप में उपयोग के लिए नमी और भी कम रखना आवश्यक है, ताकि अंकुरण क्षमता बनी रहे और कीट-रोग का खतरा कम हो।
मशीन से कटाई में सावधानी जरूरी
कंबाइन हार्वेस्टर से कटाई करने पर समय की बचत होती है, लेकिन मशीन की गति अधिक होने पर नुकसान भी हो सकता है। फसल गिरने की स्थिति में मशीन की गति धीमी रखें और कटर को नीचे चलाएं।
कटाई से पहले मशीनों की मरम्मत करवा लेना भी जरूरी है, ताकि काम के दौरान कोई बाधा न आए।
फसल अवशेष न जलाएं
विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि गेहूं के अवशेष जलाने के बजाय जीरो टिलेज तकनीक से मूंग की बुवाई करें। इससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है और पर्यावरण प्रदूषण भी कम होता है।
भंडारण से पहले रखें ध्यान
अनाज को भंडारण से पहले अच्छी तरह सुखाना चाहिए और भंडारण स्थान को साफ व कीटाणुमुक्त रखना चाहिए। सुरक्षित भंडारण के लिए दानों में नमी 11–13% तक होनी चाहिए।
यह सलाह किसानों को बदलती जलवायु परिस्थितियों में अपनी फसल को सुरक्षित रखने और बेहतर उत्पादन हासिल करने में मददगार साबित हो सकती है।

