उद्योग के साथ पर्यावरण संरक्षण की पहल, बरेका में हरित ऊर्जा और जल संरक्षण पर विशेष जोर 

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वाराणसी। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर बरेका ने एक बार फिर यह साबित किया है कि औद्योगिक विकास और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ चल सकते हैं। देश की अग्रणी रेल इंजन निर्माण इकाइयों में शामिल बरेका न केवल आधुनिक और ऊर्जा दक्ष लोकोमोटिव तैयार कर रहा है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, जल संवर्धन और हरित ऊर्जा के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय कार्य कर रहा है।

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23 अप्रैल 1956 को स्थापित बरेका ने वर्ष 1961 में उत्पादन कार्य प्रारंभ किया था। 3 जनवरी 1964 को यहां निर्मित पहला डीजल-विद्युत रेल इंजन राष्ट्र को समर्पित किया गया। वर्तमान में 11 हजार से अधिक लोकोमोटिव का निर्माण कर चुका बरेका देश की सबसे बड़ी मल्टी गेज एवं मल्टी ट्रैक्शन लोकोमोटिव निर्माण इकाइयों में शुमार है। वर्ष 2020 में इसका नाम बदलकर बनारस रेल इंजन कारखाना रखा गया।

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रेलवे के पूर्ण विद्युतीकरण और कार्बन उत्सर्जन में कमी के राष्ट्रीय लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए बरेका ने वर्ष 2017 से उच्च क्षमता वाले विद्युत इंजनों का निर्माण शुरू किया। आज यहां मुख्य रूप से पर्यावरण अनुकूल इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव बनाए जा रहे हैं, जो भारत के अलावा बांग्लादेश, श्रीलंका, म्यांमार, तंजानिया, सूडान, सेनेगल और मलेशिया जैसे देशों में भी अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

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पर्यावरणीय दायित्वों के निर्वहन में बरेका लंबे समय से सक्रिय है। 1980 के दशक में ही यहां 12 एमएलडी क्षमता का सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) और 3 एमएलडी क्षमता का औद्योगिक अपशिष्ट उपचार संयंत्र स्थापित किया गया था। वर्ष 2025-26 में एसटीपी के माध्यम से लगभग 1479 मिलियन लीटर जल का उपचार किया गया। विशेष बात यह है कि बरेका से निकलने वाला कोई भी सीवेज गंगा नदी में प्रवाहित नहीं किया जाता। सभी मानकों की निगरानी केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के दिशा-निर्देशों के अनुरूप ऑनलाइन की जाती है।

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जल संरक्षण के क्षेत्र में भी बरेका ने महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इस वर्ष 41 नए गहरे रिचार्ज कुओं के निर्माण के साथ उनकी कुल संख्या 71 हो गई है। इन प्रयासों से भूजल स्तर में सुधार और जलभराव की समस्या के समाधान में मदद मिल रही है। इसी उत्कृष्ट कार्य के लिए बरेका को “जल प्रहरी अवार्ड” से सम्मानित किया गया है। कंचनपुर कॉलोनी में 311 लाख लीटर क्षमता वाले जल संचयन तालाब का निर्माण भी जल संरक्षण की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है।

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हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए बरेका परिसर में 3.87 मेगावाट क्षमता के सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किए गए हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 में इन संयंत्रों से 41.87 लाख यूनिट स्वच्छ ऊर्जा का उत्पादन हुआ, जिससे 3433.89 टन कार्बन उत्सर्जन में कमी दर्ज की गई। ऊर्जा खपत में सौर ऊर्जा की हिस्सेदारी लगभग 20 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है।

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एक लाख से अधिक वृक्षों से आच्छादित बरेका परिसर में वर्ष 2025-26 के दौरान करीब 4000 नए पौधे लगाए गए। “एक पेड़ मां के नाम” अभियान के तहत व्यापक वृक्षारोपण किया जा रहा है। लगभग 40 प्रतिशत हरित क्षेत्र के कारण बरेका परिसर का तापमान आसपास के क्षेत्रों की तुलना में 3 से 4 डिग्री सेल्सियस तक कम रहता है। स्वच्छ, हरित और सतत विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के साथ बरेका पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में देशभर के औद्योगिक संस्थानों के लिए प्रेरणास्रोत बना हुआ है।

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