लंका में अतिक्रमण बड़ी समस्या, सड़कों पर ठेले-टोटो वालों का कब्जा, राहगीरों को हो रही भारी दिक्कत

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वाराणसी। शहर के सबसे व्यस्त और महत्वपूर्ण क्षेत्रों में शामिल लंका एक बार फिर अतिक्रमण की समस्या से जूझ रहा है। लंका गेट से रविदास गेट तक का मुख्य मार्ग इन दिनों ठेले, टोटो और ऑटो चालकों के कब्जे में दिखाई दे रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि सड़क के बड़े हिस्से पर अतिक्रमण होने के कारण आम नागरिकों, छात्र-छात्राओं, मरीजों और वाहन चालकों को रोजाना परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

क्षेत्रवासियों के अनुसार सड़क का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा ठेलों और वाहनों के कब्जे में रहता है, जबकि आवागमन के लिए केवल सीमित जगह बचती है। इसके चलते दिनभर जाम जैसी स्थिति बनी रहती है। सुबह से लेकर देर रात तक इस मार्ग पर लोगों की भारी आवाजाही रहती है, लेकिन अतिक्रमण के कारण यातायात व्यवस्था लगातार प्रभावित हो रही है।

लंका क्षेत्र में स्थित शिक्षण संस्थानों, अस्पतालों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों तक पहुंचने वाले लोगों को संकरी सड़क से होकर गुजरना पड़ता है। कई बार मरीजों को लेकर आने वाली एंबुलेंस और अन्य आपातकालीन वाहनों को भी रास्ता बनाने में कठिनाई का सामना करना पड़ता है, जिससे स्थिति और गंभीर हो जाती है।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि अतिक्रमण की समस्या वर्षों पुरानी है। उनका आरोप है कि पुलिस और प्रशासन द्वारा समय-समय पर अभियान चलाया जाता है, लेकिन उसका प्रभाव स्थायी नहीं दिखता। जैसे ही पुलिस की टीम क्षेत्र में पहुंचती है, ठेला और टोटो चालक कुछ समय के लिए हट जाते हैं, लेकिन कार्रवाई समाप्त होते ही दोबारा सड़क पर कब्जा जमा लेते हैं। यही वजह है कि समस्या लगातार बनी हुई है।

छात्र-छात्राओं और अस्पताल आने वाले मरीजों को सबसे अधिक परेशानी झेलनी पड़ रही है। सड़क पर पैदल चलना तक मुश्किल हो गया है और वाहनों की भीड़ के बीच दुर्घटना की आशंका भी बनी रहती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्तमान स्थिति में सड़क पार करना भी चुनौतीपूर्ण हो गया है।

क्षेत्रवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि लंका गेट से रविदास गेट तक विशेष अतिक्रमण विरोधी अभियान चलाया जाए। साथ ही संवेदनशील स्थानों पर स्थायी रूप से पुलिस और यातायात कर्मियों की तैनाती की जाए, ताकि सड़क को अतिक्रमण मुक्त बनाया जा सके। लोगों का कहना है कि यदि जल्द प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले दिनों में यातायात व्यवस्था और अधिक प्रभावित होगी तथा दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ सकता है।

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