ओबीसी-एनसीएल प्रमाणपत्र की तिथि पर बीएचयू सिंहद्वार पर अभ्यर्थियों का प्रदर्शन
संयुक्त भर्ती में प्रमाणपत्र की तारीख के आधार पर साक्षात्कार से वंचित न करने की मांग, पुलिस और सुरक्षाकर्मियों से हुई नोकझोंक
केंद्रीय विद्यालय, नवोदय विद्यालय और एकलव्य विद्यालयों की संयुक्त भर्ती के अभ्यर्थियों ने वास्तविक पात्रता के सरकारी अभिलेखों से सत्यापन की उठाई मांग
वाराणसी। केंद्रीय विद्यालय संगठन (KVS), नवोदय विद्यालय समिति (NVS) और एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों की संयुक्त भर्ती अधिसूचना संख्या 01/2025 में ओबीसी-नॉन क्रीमी लेयर (ओबीसी-एनसीएल) प्रमाणपत्र की जारी तिथि को लेकर अभ्यर्थियों की परेशानी सामने आई है। मामले के समाधान और वास्तविक पात्रता के सत्यापन की मांग को लेकर रविवार को काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के सिंहद्वार पर अभ्यर्थियों ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और विश्वविद्यालय के सुरक्षाकर्मियों से अभ्यर्थियों की नोकझोंक भी हुई।
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि वे भर्ती प्रक्रिया के प्रथम और द्वितीय स्तर की परीक्षा उत्तीर्ण कर चुके हैं और अब साक्षात्कार तथा दस्तावेज सत्यापन के चरण में हैं। ऐसे में केवल ओबीसी-एनसीएल प्रमाणपत्र की जारी तिथि को लेकर उनकी उम्मीदवारी पर सवाल उठने से उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अभ्यर्थियों ने मांग की कि प्रमाणपत्र जारी होने की तारीख को ही अंतिम आधार मानने के बजाय संबंधित अवधि में उनकी वास्तविक पात्रता का सक्षम प्राधिकारी के सरकारी अभिलेखों से सत्यापन कराया जाए।

पुराने और वर्तमान प्रमाणपत्रों की जांच की मांग
अभ्यर्थियों ने कहा कि जिन उम्मीदवारों के पास संबंधित अवधि का पुराना ओबीसी-एनसीएल प्रमाणपत्र है और बाद में सक्षम प्राधिकारी ने नया प्रमाणपत्र जारी किया है, उनकी पात्रता का सत्यापन पुराने और नए दोनों प्रमाणपत्रों के आधार पर किया जा सकता है। इसके अलावा आवेदन की रसीद, सक्षम प्राधिकारी के अभिलेख और अन्य दस्तावेजों के माध्यम से भी स्थिति स्पष्ट की जा सकती है।
प्रदर्शनकारियों की मांग है कि ऐसे अभ्यर्थियों को अपनी वास्तविक पात्रता साबित करने का अवसर दिया जाए। जरूरत पड़ने पर उनकी उम्मीदवारी को सत्यापन के अधीन रखते हुए उन्हें साक्षात्कार और दस्तावेज सत्यापन में शामिल किया जाए।
साक्षात्कार से वंचित न करने की मांग
अभ्यर्थियों का कहना था कि उन्होंने भर्ती प्रक्रिया में अब तक की परीक्षाएं पास कर अपनी योग्यता साबित की है। इसलिए केवल प्रमाणपत्र की जारी तिथि से जुड़ी आपत्ति के कारण उन्हें अगले चरण से बाहर नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने केंद्र सरकार, संबंधित मंत्रालय और भर्ती संस्थाओं से नियमों की स्पष्टता करते हुए पारदर्शी सत्यापन प्रक्रिया अपनाने की मांग की। प्रदर्शन में रंजना, आदित्य, सरोणी, संदीप, धीरेंद्र, नामक, सूर्यमणि गौतम, परमदीप पटेल, शिवशक्ति, शांतनु सिंह, हिमांशु, पंकज और सुमन आनंद समेत बड़ी संख्या में अभ्यर्थी शामिल रहे।
एनएसयूआई ने भी उठाया आरक्षण का मुद्दा
इसी दौरान बीएचयू में एनएसयूआई कार्यकर्ताओं ने भी आरक्षण से जुड़े मुद्दों को लेकर सिंहद्वार पर प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने प्रमाणपत्रों की वैधता और निर्धारित समय सीमा को लेकर सवाल उठाए। इस दौरान पुलिस और सुरक्षाकर्मियों से नोकझोंक की स्थिति भी बनी। प्रदर्शन में शामिल बीएचयू छात्र सुमन आनंद ने कहा कि प्रमाणपत्रों की निर्धारित अवधि के कारण पिछड़े वर्ग के कई अभ्यर्थियों और विद्यार्थियों को परेशानी हो सकती है। उन्होंने कहा कि संबंधित अवधि में पात्रता रखने वाले उम्मीदवारों को अपनी स्थिति स्पष्ट करने का अवसर मिलना चाहिए। प्रदर्शनकारियों ने भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने और प्रमाणपत्र की तारीख के साथ-साथ सरकारी अभिलेखों के आधार पर वास्तविक पात्रता के सत्यापन की मांग की।

