पंचक्रोशी यात्रा में श्रद्धालु परेशान! लाइट, शौचालय और दवा की कमी, प्रशासनिक इंतजाम पर उठे सवाल
वाराणसी। काशी की आध्यात्मिक धड़कन मानी जाने वाली पवित्र पंचक्रोशी यात्रा इन दिनों अव्यवस्थाओं की मार झेल रही है। लगभग 88 किलोमीटर लंबी इस सनातन परंपरा में हर वर्ष हजारों श्रद्धालु बाबा विश्वनाथ की नगरी की परिक्रमा कर पुण्य अर्जित करते हैं, लेकिन यात्रा मार्ग पर मूलभूत सुविधाओं की कमी श्रद्धालुओं की आस्था पर भारी पड़ती दिखाई दे रही है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पंचक्रोशी यात्रा आत्मशुद्धि और सांसारिक विकारों से मुक्ति का मार्ग मानी जाती है। यात्रा की शुरुआत मणिकर्णिका या अस्सी घाट से होकर कंदवा स्थित कर्दमेश्वर महादेव मंदिर, भीमचंडी, रामेश्वर और कपिलधारा जैसे प्रमुख पड़ावों से गुजरते हुए पुनः काशी में समाप्त होती है। श्रद्धालु पांच दिनों तक कठिन पदयात्रा कर अलग-अलग पड़ावों पर रात्रि विश्राम और पूजा-अर्चना करते हैं।
सबसे अधिक शिकायतें कंदवा स्थित पहले प्रमुख पड़ाव से सामने आ रही हैं। श्रद्धालुओं का कहना है कि यहां पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था नहीं होने से रात के समय अंधेरे में भारी परेशानी उठानी पड़ती है। कई यात्रियों ने आरोप लगाया कि सार्वजनिक शौचालयों में भी शुल्क वसूला जा रहा है, जबकि सरकारी स्तर पर निशुल्क सुविधा का दावा किया जाता है।

भीषण गर्मी और उमस के बीच पैदल यात्रा कर रहे बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों के लिए दिक्कतें और बढ़ गई हैं। यात्रियों का कहना है कि कई स्थानों पर न तो पर्याप्त पेयजल उपलब्ध है और न ही प्राथमिक उपचार की समुचित व्यवस्था दिखाई देती है। मेडिकल कैंप और एम्बुलेंस जैसी सुविधाओं की कमी भी चिंता का विषय बनी हुई है।
स्थानीय नागरिकों और श्रद्धालुओं का कहना है कि करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़ी इस ऐतिहासिक यात्रा को केवल धार्मिक आयोजन मानकर नहीं छोड़ा जा सकता। उनका सुझाव है कि पंचक्रोशी मार्ग को स्थायी धार्मिक पर्यटन कॉरिडोर के रूप में विकसित किया जाए, जहां हाईमास्ट लाइट, साफ-सफाई, निशुल्क शौचालय, चिकित्सा शिविर, सुरक्षा और पेयजल जैसी सुविधाएं हर समय उपलब्ध रहें।

श्रद्धालुओं ने जिला प्रशासन और पर्यटन विभाग से मांग की है कि पंचक्रोशी यात्रा मार्ग की व्यवस्थाओं को तत्काल दुरुस्त किया जाए, ताकि काशी आने वाले देश-विदेश के श्रद्धालुओं को आस्था के इस पवित्र मार्ग पर कठिनाइयों का सामना न करना पड़े।

