चौकाघाट में सोनार समाज का महासमागम, राजनीतिक हिस्सेदारी और स्वर्ण कला बोर्ड की उठी मांग

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35 जिलों के प्रतिनिधियों समेत हजारों स्वर्णकार हुए शामिल, सर्राफा कारोबारियों की सुरक्षा और साहूकारी लाइसेंस व्यवस्था बहाल करने पर जोर

वाराणसी। काशी के चौकाघाट स्थित सांस्कृतिक संकुल में रविवार को आयोजित सोनार महा समागम में समाज की एकजुटता, राजनीतिक भागीदारी और व्यापारियों की सुरक्षा का मुद्दा प्रमुखता से उठा। स्वर्णकार भारती सेवा संस्थान की ओर से आयोजित कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के 35 जिलों के प्रतिनिधियों के साथ मध्य प्रदेश और बिहार से भी स्वर्णकार समाज के लोग शामिल हुए। हजारों की संख्या में जुटे महिला-पुरुषों, युवाओं और बुजुर्गों ने सामाजिक अधिकारों और राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर सामूहिक आवाज बुलंद की। सुबह 11 बजे शुरू हुआ महासमागम देर शाम तक चला। कार्यक्रम में समाज की एकता, सम्मान, सुरक्षा, आर्थिक मजबूती और राजनीतिक हिस्सेदारी पर चर्चा की गई।

चुनाव में जनसंख्या के अनुपात में टिकट की मांग
महासमागम में राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया गया। इसमें आगामी चुनावों में राजनीतिक दलों से समाज की जनसंख्या के अनुपात में टिकट देने की मांग करने का निर्णय लिया गया। इसके साथ ही प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में सोनार समाज की कोर कमेटी गठित करने और समाज के मुद्दों को राजनीतिक दलों के सामने मजबूती से रखने पर सहमति बनी। सरकार को समाज की मांगों से संबंधित बड़ा ज्ञापन भेजने का भी निर्णय लिया गया। आयोजक स्वर्णकार भारती सेवा संस्थान के राष्ट्रीय चेयरमैन रवि सर्राफ ने कहा कि उनकी टीम ने करीब 35 जिलों का दौरा कर समाज को एकजुट करने का प्रयास किया। जिलाध्यक्ष किशोर सेठ ने बताया कि काशी को 30 सेक्टरों में बांटकर पिछले चार महीने से घर-घर जनसंपर्क किया गया।


प्रदेश में स्वर्ण कला बोर्ड गठन की मांग
समागम में उत्तर प्रदेश में स्वर्ण कला बोर्ड के गठन की मांग प्रमुखता से उठाई गई। वक्ताओं ने कहा कि पारंपरिक स्वर्ण कला और कारीगरी से जुड़े लोगों के हितों के संरक्षण के लिए विशेष बोर्ड की आवश्यकता है। इसके माध्यम से कारीगरों को सब्सिडी, प्रशिक्षण, पेंशन और उनके बच्चों को शिक्षा में सहायता उपलब्ध कराने की मांग की गई।

कारोबारियों की सुरक्षा और कानूनी समस्याओं पर चर्चा
सर्राफा कारोबारियों की सुरक्षा भी प्रमुख मुद्दा रही। वक्ताओं ने लूट, चोरी, डकैती और हत्या जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाने की मांग की। बीएनएस की धारा 317 से जुड़े मामलों में कारोबारियों को होने वाली परेशानियों पर चर्चा करते हुए ठोस जांच के बाद ही कार्रवाई किए जाने की मांग रखी गई। इसके समाधान के लिए सामूहिक कानूनी पहल पर भी सहमति बनी। प्रतिनिधियों ने पारंपरिक सर्राफा और गिरवी कारोबार के लिए पुरानी साहूकारी लाइसेंस व्यवस्था बहाल करने की मांग भी उठाई।

एकता और सामाजिक उत्थान का संकल्प
पूर्वांचल अध्यक्ष ईश्वर दयाल सिंह सेठ और महिला प्रकोष्ठ की प्रदेश अध्यक्ष सरिता सर्राफ ने युवाओं, महिलाओं, कारीगरों और व्यापारियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने पर जोर दिया। शिक्षा, रोजगार और सामाजिक उत्थान के लिए सामूहिक प्रयासों का आह्वान किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कृष्ण नारायण सोनी ने की। रवि सर्राफ ने स्वागत भाषण और संचालन किया, जबकि किशोर सेठ ने प्रस्तावना रखी। अरुण सोनी ने धन्यवाद ज्ञापन दिया। अंत में उपस्थित लोगों ने समाज की एकता के लिए कार्य करने का संकल्प लिया।

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