पीएचडी प्रक्रिया में देरी से विधि शोधार्थियों में नाराजगी, काशी विद्यापीठ प्रशासन पर उठे सवाल

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वाराणसी। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के विधि विभाग में पीएचडी सत्र 2022-23 की शैक्षणिक प्रक्रिया में देरी को लेकर शोधार्थियों के बीच असंतोष बढ़ता जा रहा है। शोधार्थियों का आरोप है कि प्रवेश प्रक्रिया शुरू होने के लगभग चार वर्ष बाद भी रिसर्च डिग्री कमेटी (आरडीसी) अथवा विभागीय शोध समिति (डीआरसी) की बैठक आयोजित नहीं की गई है, जिससे उनके शोध कार्य की प्रगति प्रभावित हो रही है।

शोधार्थियों का कहना है कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के मानकों के अनुसार पीएचडी शोध कार्य को निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा करने की व्यवस्था है। ऐसे में आरडीसी की बैठक न होने के कारण शोध निर्देशक (सुपरवाइजर) निर्धारण और शोध प्रक्रिया के अन्य महत्वपूर्ण चरण लंबित पड़े हुए हैं। इससे शोधार्थियों के भविष्य को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है।

आरोप है कि सत्र 2022-23 की पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया भी समयबद्ध तरीके से पूरी नहीं हो सकी। प्रवेश परीक्षा, परिणाम घोषणा, वायवा, कोर्स वर्क संचालन, कोर्स वर्क परीक्षा और उसके परिणाम में भी विलंब हुआ। शोधार्थियों का कहना है कि प्रत्येक चरण के लिए उन्हें विभाग और विश्वविद्यालय प्रशासन के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं, लेकिन समस्याओं का समाधान समय पर नहीं हो रहा है।

कुछ शोधार्थियों ने यह भी आरोप लगाया कि विभागीय और प्रशासनिक स्तर पर समन्वय की कमी है। उनका दावा है कि कई मामलों में परीक्षा नियंत्रक और विभागीय अधिकारियों के बीच जिम्मेदारी को लेकर स्पष्टता नहीं दिखती, जिसका प्रतिकूल प्रभाव छात्रों पर पड़ रहा है। शोधार्थियों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से मांग की है कि लंबित प्रक्रियाओं को शीघ्र पूरा कराया जाए और आरडीसी की बैठक जल्द आयोजित कर शोध कार्य को गति दी जाए।

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