आईएमएस-बीएचयू की आउटसोर्सिंग भर्ती पर विवाद, चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल

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वाराणसी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के चिकित्सा विज्ञान संस्थान (आईएमएस) में आउटसोर्सिंग के माध्यम से की गई हालिया नियुक्तियां विवादों में घिर गई हैं। भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर कुलपति के समक्ष विस्तृत शिकायत दर्ज कराई गई है, जिसमें चयन प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं, पक्षपात और पात्रता संबंधी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। शिकायत सामने आने के बाद विश्वविद्यालय परिसर में इस भर्ती को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

आईएमएस-बीएचयू में आउटसोर्सिंग के तहत कंप्यूटर स्किल्ड वर्कर, कंप्यूटर प्रोफेशनल, एसी मैकेनिकल, बॉडी लिफ्टर, ऑडियोमेट्री एवं स्पीच थेरेपी तथा ओटी टेक्नीशियन समेत कुल 22 पदों पर नियुक्तियां की गई हैं। इन नियुक्तियों को लेकर गोरखपुर निवासी एक व्यक्ति ने ईमेल के माध्यम से कुलपति को छह पृष्ठों की शिकायत भेजी है।

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि भर्ती प्रक्रिया के दौरान एक ही परिवार के तीन सदस्यों को नियुक्ति दी गई। आरोप के अनुसार एक अभ्यर्थी का चयन कंप्यूटर स्किल्ड वर्कर पद पर किया गया, जबकि उसकी दो बहनों को कंप्यूटर प्रोफेशनल पदों पर नियुक्ति मिली। शिकायतकर्ता का कहना है कि इससे चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर सवाल खड़े होते हैं।

इसके अलावा कुछ पदों पर चयनित अभ्यर्थियों की शैक्षणिक योग्यता को लेकर भी आपत्ति जताई गई है। शिकायत में दावा किया गया है कि बॉडी लिफ्टर पद, जिसके लिए न्यूनतम योग्यता हाईस्कूल निर्धारित थी, उस पर ऐसे अभ्यर्थी का चयन किया गया जो कथित रूप से हाईस्कूल परीक्षा उत्तीर्ण नहीं कर सका था। वहीं कुछ तकनीकी पदों पर चयनित उम्मीदवारों की योग्यता और दस्तावेजों की वैधता को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।

शिकायतकर्ता ने पूरे भर्ती प्रकरण की स्वतंत्र एजेंसी या उच्चस्तरीय समिति से निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि जांच होने पर चयन प्रक्रिया से जुड़ी वास्तविक स्थिति सामने आ सकेगी।

हालांकि, आईएमएस-बीएचयू प्रशासन ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। संस्थान के निदेशक प्रो. एस.एन. संखवार ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह निर्धारित नियमों और समिति की निगरानी में संपन्न हुई है। उन्होंने बताया कि सभी अभ्यर्थियों के दस्तावेजों का विधिवत सत्यापन किया गया था और नियुक्तियां निर्धारित मानकों के अनुरूप की गई हैं।

प्रशासन का कहना है कि यदि शिकायत के आधार पर कोई जांच होती है तो संस्थान पूर्ण सहयोग करेगा। फिलहाल पूरे मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन की अगली कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं। जांच होने की स्थिति में ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह नियमों के अनुरूप हुई या नहीं।

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