शास्त्री घाट पर गूंजा “मनरेगा बचाओ” का स्वर, 11वें दिन जन अधिकार यात्रा का समापन, 125 किमी पैदल यात्रा के बाद काशी में जनचौपाल, युवाओं-मजदूरों ने उठाई आवाज
वाराणसी। मनरेगा बचाओ “जनचौपाल” जन अधिकार यात्रा के 11वें दिन वाराणसी के शास्त्री घाट पर बड़ी सभा आयोजित की गई। गांधीवादी युवाओं के नेतृत्व में निकली इस यात्रा में युवाओं, किसानों, मजदूरों और महिलाओं की उल्लेखनीय भागीदारी देखने को मिली।
आयोजकों के अनुसार 125 किलोमीटर लंबी यह पैदल यात्रा 225 ग्राम पंचायतों और 15 ब्लॉकों से होकर गुजरते हुए प्रयागराज से काशी पहुंची। हर 15 किलोमीटर पर एक बृहद जनचौपाल आयोजित की गई, जिसमें आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में श्रमिक और ग्रामीण शामिल हुए।

“मनरेगा को कमजोर करने का आरोप”
सभा में वक्ताओं ने कहा कि महात्मा गांधी की ग्राम स्वराज की संकल्पना शोषित, वंचित और मजदूर वर्ग के अधिकारों का प्रतीक रही है। उनके नाम पर बनी मनरेगा जैसी योजना को वर्तमान नीतियों के तहत कमजोर किया जा रहा है, जिसे मजदूर और युवा वर्ग स्वीकार नहीं करेगा।

वक्ताओं ने आरोप लगाया कि नई योजनाओं में कॉरपोरेट हितों की झलक दिखाई देती है, जिससे मजदूरों को पुनः असुरक्षा और बेरोजगारी की ओर धकेला जा सकता है। महिलाओं के अधिकारों के प्रभावित होने की भी आशंका जताई गई।

युवा नेताओं ने रखे विचार
यूपी युवा कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष जितेश कुमार मिश्रा ने कहा कि यह नीति मजदूर विरोधी है और इसका पुरजोर विरोध किया जाएगा। युवा कांग्रेस के जिलाध्यक्ष अभिनव तिवारी संगम ने कहा कि मनरेगा काम का अधिकार था, जिसे कमजोर किया जा रहा है।

राष्ट्रीय सचिव एनएसयूआई अक्षय यादव “क्रांतिवीर” ने इसे श्रमिकों के साथ छलावा बताया, जबकि प्रदेश महासचिव आदर्श प्रजापति ने कहा कि इसका सबसे अधिक असर महिला मजदूरों पर पड़ेगा। सूफी सलीम ने इसे रोजगार पर सीधा हमला करार दिया।

विभिन्न जिलों से पहुंचे प्रतिभागी
यात्रा में आनन्द मौर्य, मृत्युंजय टोनी, अर्शिया खान, गौरव यादव, जितेंद्र सहित अनेक सामाजिक एवं छात्र संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए।
शास्त्री घाट पर सभा के साथ इस 11 दिवसीय जन अधिकार यात्रा का समापन हुआ, जहां प्रतिभागियों ने मजदूरों और ग्रामीणों के अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया।

