विजन विकसित भारत नीति एवं अनुसंधान मंच के राज्य संयोजक बने दिवि फाउंडेशन के संस्थापक बीरभद्र सिंह, विकसित उत्तर प्रदेश के लिए नीति निर्माण में निभाएंगे भूमिका
वाराणसी। दिवि फाउंडेशन के संस्थापक एवं कार्यकारी निदेशक बीरभद्र सिंह को ‘विजन विकसित भारत नीति एवं अनुसंधान मंच’ का उत्तर प्रदेश राज्य संयोजक नियुक्त किया गया है। दिल्ली स्थित इस थिंक टैंक संगठन ने यह जिम्मेदारी उन्हें शिक्षा, सामाजिक विकास और नीति विमर्श के क्षेत्र में उनके योगदान को देखते हुए सौंपी है। नियुक्ति का निर्णय मंच के राष्ट्रीय संयोजक डॉ. शिवेश प्रताप सिंह और बोर्ड की बैठक में लिया गया।
यह नियुक्ति विकसित भारत के राष्ट्रीय संकल्प के अनुरूप उत्तर प्रदेश को विकास के नए आयामों तक पहुंचाने के उद्देश्य से की गई है। राज्य संयोजक के रूप में बीर भद्र सिंह प्रदेश में नीति अनुसंधान, सुशासन, शिक्षा, रोजगार, कौशल विकास, युवा नेतृत्व, सामाजिक समावेशन और आर्थिक विकास जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर संवाद एवं शोध को प्रोत्साहित करेंगे। साथ ही इन क्षेत्रों में नीतिगत सुझाव तैयार करने की दिशा में भी काम करेंगे।
युवाओं और विशेषज्ञों को साझा मंच से जोड़ने की पहल
नई जिम्मेदारी के तहत बीर भद्र सिंह प्रदेश के युवाओं, शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं, सामाजिक संगठनों और नीति विशेषज्ञों को एक मंच पर लाने का प्रयास करेंगे। उनका उद्देश्य उत्तर प्रदेश की जरूरतों और विकास प्राथमिकताओं के अनुरूप नीतिगत विमर्श को आगे बढ़ाना है। इसके माध्यम से राज्य के विकास से जुड़े मुद्दों पर शोध, संवाद और रचनात्मक सुझावों को बढ़ावा दिया जाएगा।
मंच की ओर से उन्हें यह दायित्व दिवि फाउंडेशन के शिक्षा एवं सामाजिक विकास से जुड़े कार्यों, नीति विमर्श की गतिविधियों, ‘भारत विमर्श’ की राष्ट्रीय पहल तथा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में उनकी सक्रिय भागीदारी के आधार पर दिया गया है।
राष्ट्रीय स्तर पर भी निभा चुके हैं जिम्मेदारी
उल्लेखनीय है कि बीर भद्र सिंह राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित ‘भारत विमर्श’ कार्यक्रम के राष्ट्रीय संयोजक भी रह चुके हैं। वर्तमान में वह अमेरिका स्थित आईएबी (IAB) के शोध अध्येता के रूप में कार्यरत हैं। इसके अलावा वाराणसी में भाजपा के सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत आयोजित दिव्यांग टी-20 क्रिकेट प्रतियोगिता ‘सेवा संकल्प ट्रॉफी-2026’ के संयोजन की जिम्मेदारी भी निभा चुके हैं। उनकी नियुक्ति को उत्तर प्रदेश में विकास से जुड़े विषयों पर शोध और नीतिगत संवाद को विस्तार देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। नई भूमिका में वह विभिन्न क्षेत्रों के अनुभवी लोगों और युवाओं की सहभागिता से विकसित उत्तर प्रदेश की परिकल्पना को आगे बढ़ाने का प्रयास करेंगे।

