भगवानपुर एसटीपी शुरू होने से 5 वार्डों के एक लाख से अधिक लोगों को राहत

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वाराणसी। शहर में गंगा नदी को प्रदूषणमुक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए भगवानपुर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) का संचालन शुरू कर दिया गया है। करीब 308.09 करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस परियोजना के चालू होने से शहर के 5 वार्डों के लगभग 1.05 लाख लोगों को सीधा लाभ मिलने लगा है।

इस एसटीपी के शुरू होने से अस्सी नाले का गंदा पानी अब बिना शोधन के गंगा में नहीं जाएगा, बल्कि उसे पहले ट्रीट किया जा रहा है। पहले यह गंदा पानी भदैनी, सुंदरपुर, ककरमत्ता, खोजवा और आसपास के इलाकों से होकर सीधे गंगा में गिरता था, जिससे नदी प्रदूषित हो रही थी। अब इस पानी को भगवानपुर एसटीपी तक लाकर शुद्ध किया जा रहा है, जिससे गंगा के जल की गुणवत्ता में सुधार की उम्मीद है।

परियोजना से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत वर्ष 2014 से इस तरह की परियोजनाओं पर काम शुरू किया गया था। वर्ष 2022 तक वाराणसी में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की प्राथमिकता सूची में अस्सी नाला चौथे स्थान पर था, जिसे बाद में बढ़ाकर पांचवें स्थान पर रखा गया।

जानकारी के मुताबिक, वर्ष 2017 में किए गए फीकल कोलीफॉर्म परीक्षण में गंगा नदी के जल में 1300 से लेकर 23000 एमपीएन प्रति 100 मिलीलीटर तक प्रदूषण दर्ज किया गया था। वहीं, वर्ष 2025 में यह स्तर घटकर 4900 एमपीएन प्रति 100 मिलीलीटर तक पहुंच गया है। यह आंकड़े प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के नेशनल मॉनिटरिंग प्रोग्राम के तहत 2017 से 2026 के बीच किए गए परीक्षणों पर आधारित हैं।

अधिकारियों का कहना है कि इस एसटीपी के संचालन से न केवल गंगा को प्रदूषण से राहत मिलेगी, बल्कि शहर की स्वच्छता व्यवस्था भी बेहतर होगी। काशी में गंगा और उसकी सहायक नदियों को स्वच्छ बनाने के लिए इस तरह की परियोजनाएं आगे भी जारी रहेंगी।

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