अस्सी घाट पर पुरुषों के अधिकार के लिए चला जागरूकता अभियान, पत्नियों को दी गई नसीहत - पतियों को प्यार दें, ताकि वो बाबा न बनें
वाराणसी। सेव इंडियन फैमिली फाउंडेशन (SIFF) की वाराणसी इकाई द्वारा स्वामी विवेकानंद जी की जयंती की पूर्व संध्या पर युवा दिवस के रूप में एक विशेष जनजागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह आयोजन 11 जनवरी 2026 को सायं 4 बजे, अस्सी घाट के समीप संत रविदास घाट पर संपन्न हुआ। कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं में राष्ट्रप्रेम, नैतिकता और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करना रहा।
राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका पर हुई चर्चा
कार्यक्रम के दौरान युवाओं के साथ राष्ट्र के विकास में उनकी भूमिका पर विस्तार से चर्चा की गई। वक्ताओं ने स्वामी विवेकानंद के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि युवा शक्ति ही किसी भी राष्ट्र की सबसे बड़ी पूंजी होती है। युवाओं से आत्मबल, आत्मसम्मान और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया गया।

आत्महत्या की बढ़ती प्रवृत्ति पर जताई गई चिंता
इस अवसर पर पारिवारिक समस्याओं, वैवाहिक विवादों और महिलाओं के हित में बने कानूनों के दुरुपयोग से उत्पन्न मानसिक तनाव के कारण बढ़ रही आत्महत्या की घटनाओं पर भी गंभीर चर्चा हुई। SIFF के उत्तर प्रदेश कोऑर्डिनेटर आशीष कुमार तिवारी ने बताया कि युवाओं में निराशा के कारण आत्महत्या की प्रवृत्ति चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में जरूरतमंद लोग SIFF से जुड़कर नि:शुल्क काउंसलिंग और कानूनी सहायता प्राप्त कर सकते हैं।
NCRB के आंकड़ों से सामने आई गंभीर तस्वीर
SIFF के काउंसलर वैष्णव पाण्डेय ने बताया कि राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के अनुसार 2017 से 2022 के बीच पुरुषों में आत्महत्या की दर में लगभग 38 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक सहयोग की कमी इस बढ़ोतरी का प्रमुख कारण है।
पुरुष अधिकारों के लिए काम कर रहा SIFF
SIFF के राष्ट्रीय प्रवक्ता जयदत्त शर्मा ने संगठन की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए बताया कि सेव इंडियन फैमिली फाउंडेशन एक समर्पित पुरुष अधिकार संगठन है, जिसकी स्थापना वर्ष 2005 में हुई थी। संगठन द्वारा न्यायिक सुधार, पुलिस सुधार और पुरुष अधिकारों को लेकर देशभर में लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं।
विवेकानंद के विचारों से जुड़ा संदेश
SIFF के कार्यकर्ता पंकज जायसवाल ने कहा कि स्वामी विवेकानंद जी लैंगिक समानता, आत्मसम्मान और न्याय के प्रबल समर्थक थे। उनका मानना था कि समाज में पुरुष और महिलाएं दोनों समान अधिकार और सम्मान के हकदार हैं। वहीं, कार्यकर्ता अखण्ड प्रताप ने युवाओं से आह्वान किया कि “जीवन अनमोल है, अन्याय के सामने झुकना नहीं है, बल्कि अखण्ड बने रहना है।”
स्लोगन और पम्पलेट के जरिए किया गया जागरूक
कार्यक्रम के दौरान SIFF कार्यकर्ताओं ने तख्तियों पर लिखे स्लोगन प्रदर्शित किए और पम्पलेट बांटकर आमजन को जागरूक किया। आयोजन में जयदत्त शर्मा, आशीष कुमार तिवारी, वैष्णव पाण्डेय, पंकज जायसवाल, डॉ. तुषार त्रिपाठी, मोहित शेट्टी, बबलू गुप्ता, अखिलेश, अखण्ड प्रताप, गौरव मिश्रा, विमल, रजत कुलकर्णी सहित सैकड़ों SIFF कार्यकर्ता मौजूद रहे।
सकारात्मक संदेश के साथ संपन्न हुआ आयोजन
कुल मिलाकर, यह कार्यक्रम स्वामी विवेकानंद के विचारों के माध्यम से युवाओं को मानसिक, सामाजिक और नैतिक रूप से सशक्त बनाने का प्रयास रहा। SIFF द्वारा दिया गया यह संदेश रहा कि समस्याओं से भागने के बजाय संवाद, सहयोग और कानूनी रास्तों से समाधान खोजा जाए।

