आशापति शास्त्री ने सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय प्रेस के व्यवस्थापक के रूप में संभाली जिम्मेदारी

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वाराणसी। विश्वविद्यालय प्रेस में आशापति शास्त्री ने विधिवत रूप से प्रेस व्यवस्थापक का कार्यभार ग्रहण किया। उनके दायित्व संभालने से प्रशासनिक और तकनीकी कार्यों में नई ऊर्जा का संचार हुआ है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने उम्मीद जताई है कि उनके नेतृत्व में प्रेस कार्यों को और अधिक सुदृढ़ता और पारदर्शिता मिलेगी।

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कंप्यूटर ऑपरेटर से प्रेस व्यवस्थापक तक का सफर
आशापति शास्त्री ने अपने करियर की शुरुआत कंप्यूटर ऑपरेटर के रूप में की थी। अपनी कर्मनिष्ठा, तकनीकी दक्षता और अनुशासित कार्यशैली के कारण उन्होंने संस्थान में विशिष्ट पहचान बनाई। उनके उत्कृष्ट कार्यों को देखते हुए मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा संचालित अखिल भारतीय सर्वेक्षण का प्रभारी दायित्व भी उन्हें सौंपा गया, जिसका वे सफलतापूर्वक निर्वहन कर रहे हैं।

छह वर्षों से संभाल रहे गोपनीय मुद्रण की जिम्मेदारी
पिछले छह वर्षों से वे गोपनीय मुद्रण प्रभारी के रूप में प्रश्नपत्रों के मुद्रण और सुरक्षा से जुड़े समस्त कार्यों का संचालन कर रहे हैं। परीक्षा व्यवस्था की गोपनीयता और समयबद्धता बनाए रखने में उनका योगदान उल्लेखनीय रहा है। बताया जाता है कि यह प्रेस प्रदेश के विश्वविद्यालयों में अपनी परीक्षाओं के प्रश्नपत्रों का मुद्रण स्वयं करने वाली एक प्रमुख संस्था है, जो स्वायत्तता और विश्वसनीयता का प्रतीक मानी जाती है।

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तकनीकी उन्नयन की तैयार कार्ययोजना
कार्यभार ग्रहण करने के बाद आशापति शास्त्री ने कहा कि आधुनिक युग में कंप्यूटरीकरण और तकनीकी उन्नयन अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने प्रेस को आधुनिक तकनीकों से सुसज्जित करने के लिए एक नई कार्ययोजना तैयार करने और कार्यों को गति देने का संकल्प व्यक्त किया।

प्रशासन के प्रति जताया आभार
इस अवसर पर उन्होंने कुलपति, कुलसचिव, प्रेस प्रभारी और परीक्षा नियंत्रक के प्रति आभार प्रकट किया। उन्होंने विश्वास दिलाया कि वे प्रशासन की अपेक्षाओं पर खरा उतरने का प्रयास करेंगे और संस्था को प्रगति एवं उत्कृष्टता के मार्ग पर आगे बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभाएंगे।

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