इस महीने आ सकते हैं अमित शाह, फॉरेंसिक यूनिवर्सिटी के स्थायी परिसर का होगा भूमि पूजन
प्रशासन तैयारियों में जुटा, केंद्रीय गृह मंत्री के आगमन की स्थिति में कार्यक्रम स्थल और व्यवस्थाओं को लेकर कवायद तेज, वर्चुअल लोकार्पण का विकल्प भी खुला
वाराणसी। काशी में अपराध की वैज्ञानिक जांच और फॉरेंसिक शिक्षा को नई दिशा देने की कवायद तेज हो गई है। जाल्हूपुर में गुजरात स्थित राष्ट्रीय फॉरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय (NFSU) के ट्रांजिट कैंपस का संचालन शुरू होने के बाद अब स्थायी परिसर के निर्माण की तैयारी चल रही है। करीब 50 एकड़ जमीन पर बनने वाले विश्वविद्यालय के स्थायी परिसर के लिए सितंबर के दूसरे सप्ताह में भूमि पूजन और जाल्हूपुर ट्रांजिट कैंपस के लोकार्पण प्रस्तावित है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के कार्यक्रम में शामिल होने की संभावना को देखते हुए जिला प्रशासन तैयारियों में जुट गया है। उनके काशी आगमन की स्थिति में कार्यक्रम स्थल, सुरक्षा और अन्य व्यवस्थाओं को लेकर तैयारियां की जा रही हैं। हालांकि, यदि उनका वाराणसी आना संभव नहीं होता है तो वर्चुअल माध्यम से लोकार्पण और भूमि पूजन कराने के विकल्प पर भी विचार किया जा रहा है।
स्थानीय मामलों की जांच में मिलेगी मदद
फॉरेंसिक विश्वविद्यालय के कैंपस से काशी और पूर्वांचल में अपराध की वैज्ञानिक जांच को गति मिलने की उम्मीद है। वर्तमान में कई मामलों में फॉरेंसिक जांच के लिए नमूने और साक्ष्य दूसरे स्थानों पर भेजने पड़ते हैं। स्थानीय स्तर पर विशेषज्ञ और आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होने से जांच प्रक्रिया में तेजी आएगी। वैज्ञानिक विश्लेषण और साक्ष्यों के आधार पर जांच को मजबूती मिलने के साथ स्थानीय मामलों को स्थानीय स्तर पर ही सुलझाने में भी मदद मिलेगी।
विद्यार्थियों को मिलेंगे बेहतर अवसर
स्थायी परिसर के अस्तित्व में आने के बाद काशी और पूर्वांचल के विद्यार्थियों को फॉरेंसिक विज्ञान के क्षेत्र में उच्चस्तरीय शिक्षा और प्रशिक्षण के बेहतर अवसर मिलेंगे। फॉरेंसिक विज्ञान में विशेषज्ञता हासिल करने वाले युवाओं के लिए अपराध अनुसंधान, प्रयोगशाला, न्यायिक प्रक्रिया समेत संबंधित क्षेत्रों में करियर के नए रास्ते खुलेंगे।
तैयार होंगे फॉरेंसिक विशेषज्ञ
विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों को फॉरेंसिक विज्ञान की आधुनिक शिक्षा और प्रशिक्षण दिया जाएगा। यहां से प्रशिक्षित विशेषज्ञ अपराध की वैज्ञानिक जांच, घटनास्थल से जुटाए गए साक्ष्यों के विश्लेषण और न्यायिक प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकेंगे। स्थायी परिसर बनने के बाद प्रयोगशालाओं, प्रशिक्षण सुविधाओं और पाठ्यक्रमों के विस्तार की भी योजना है।

