दो सर्जरी, 11 महीने के संघर्ष के बाद वुशू खिलाड़ी सूरज यादव ने भारतीय टीम ने किया कमबैक, एशियन गेम्स में दिखाएंगे दमखम 

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वाराणसी। खेल जगत में कुछ कहानियां केवल जीत और हार तक सीमित नहीं होतीं, बल्कि वे संघर्ष, साहस और अटूट संकल्प की मिसाल बन जाती हैं। ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी उत्तर प्रदेश पुलिस में सब-इंस्पेक्टर और अंतरराष्ट्रीय वुशू खिलाड़ी सूरज यादव की है, जिन्होंने गंभीर चोटों और कठिन परिस्थितियों को मात देकर भारतीय वुशू टीम में शानदार वापसी की है। आगामी 20वें एशियन गेम्स के लिए 70 किलोग्राम भार वर्ग (सांडा) में भारतीय टीम में उनका चयन न केवल उनकी मेहनत का परिणाम है, बल्कि यह उनकी असाधारण इच्छाशक्ति का भी प्रमाण है।

लक्ष्मण पुरस्कार से सम्मानित सूरज यादव के लिए यह उपलब्धि विशेष महत्व रखती है। वर्ष 2023 में आयोजित एशियन गेम्स में वह पदक जीतने के बेहद करीब पहुंच गए थे। प्रतियोगिता के दौरान उन्हें घुटने में गंभीर चोट लगी, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और मुकाबले में डटे रहे। हालांकि वह पदक जीतने से चूक गए और पांचवें स्थान पर रहे, लेकिन उस अधूरे सपने ने उनके भीतर और अधिक मजबूत होकर लौटने का संकल्प पैदा कर दिया।

घुटने की गंभीर चोट के बाद सूरज का सफर बेहद कठिन रहा। पिछले दो वर्षों में उन्हें लगातार दो बड़ी सर्जरी से गुजरना पड़ा। उनकी आखिरी बड़ी सर्जरी जुलाई 2025 में हुई थी। किसी भी खिलाड़ी के लिए ऐसी स्थिति करियर पर बड़ा प्रभाव डाल सकती है, लेकिन सूरज ने हार मानने के बजाय पुनर्वास और प्रशिक्षण पर पूरा ध्यान केंद्रित किया। दर्द, कठिन फिजियोथेरेपी और लंबी रिकवरी प्रक्रिया के बीच उन्होंने अपने लक्ष्य को कभी नहीं छोड़ा।

सर्जरी के बाद मात्र 11 महीनों के भीतर सूरज ने जिस तरह से वापसी की, वह किसी चमत्कार से कम नहीं माना जा रहा है। उन्होंने न केवल फिटनेस हासिल की, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित कठिन चयन ट्रायल्स में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर दोबारा भारतीय टीम में स्थान सुनिश्चित किया। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि पिछली बार पदक से चूकने की कसक और हालिया संघर्ष ने उन्हें पहले से कहीं अधिक मजबूत खिलाड़ी बना दिया है।

अब सूरज यादव की निगाहें जापान में 19 सितंबर से 4 अक्टूबर 2026 तक आयोजित होने वाले 20वें एशियन गेम्स पर टिकी हैं। प्रतियोगिता की तैयारी को अंतिम रूप देने के लिए वह 23 जून को चीन रवाना होंगे, जहां उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर की विशेष प्रशिक्षण सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इस प्रशिक्षण शिविर में वह अपनी तकनीक, फिटनेस और रणनीति को और मजबूत करेंगे।

सूरज यादव की यह प्रेरणादायक यात्रा बताती है कि कठिन परिस्थितियां किसी व्यक्ति को रोक नहीं सकतीं, यदि उसके भीतर लक्ष्य के प्रति समर्पण और संघर्ष करने का साहस हो। उनकी वापसी आज देशभर के युवाओं और खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है। खेल प्रेमियों को उम्मीद है कि इस बार सूरज एशियन गेम्स में शानदार प्रदर्शन करते हुए भारत के लिए पदक जीतकर देश का गौरव बढ़ाएंगे।

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