गेहूं कटाई के बाद मूंग की खेती से बढ़ेगी किसानों की आमदनी, विशेषज्ञों ने दी समय पर बुवाई की सलाह

WhatsApp Channel Join Now

वाराणसी। गेहूं की कटाई के तुरंत बाद ग्रीष्मकालीन मूंग की बुवाई किसानों के लिए अतिरिक्त आय का बेहतर अवसर बन सकती है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, यदि किसान शून्य जुताई (जीरो-टिल) तकनीक का उपयोग करें, तो कम समय में अधिक उत्पादन हासिल किया जा सकता है। खासकर उन क्षेत्रों में, जहां मिट्टी में पर्याप्त नमी मौजूद है, वहां 60–65 दिनों में तैयार होने वाली मूंग की फसल आसानी से उगाई जा सकती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि गेहूं कटाई के तुरंत बाद बुवाई करने से मिट्टी में बची नमी का पूरा लाभ मिलता है, जिससे फसल की अच्छी स्थापना होती है और उत्पादकता बढ़ती है। हाल ही में हुई बारिश के कारण खेतों में नमी बनी हुई है, इसलिए शुरुआती सिंचाई की आवश्यकता कम हो सकती है। हालांकि, जरूरत के अनुसार सिंचाई करना आवश्यक है।

कृषि वैज्ञानिकों और अंतरराष्ट्रीय धान अनुसंधान संस्थान के विशेषज्ञों ने किसानों को इस तकनीक को अपनाने की सलाह दी है। उनका मानना है कि इससे फसल चक्र सघन होगा, मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार होगा और किसानों की आय में स्थायी वृद्धि संभव है। 

गर्मी में मूंग की खेती से मिट्टी की उर्वरता भी बनी रहती है। मूंग की जड़ों में बनने वाली गांठें (नोड्यूल) वायुमंडलीय नाइट्रोजन को भूमि में स्थिर करती हैं, जिससे अगली फसल के लिए भी पोषण उपलब्ध होता है। इससे लगभग 12 से 30 किलोग्राम नाइट्रोजन प्रति हेक्टेयर मिट्टी में जुड़ती है।

किसानों को सलाह दी गई है कि वे 10 अप्रैल तक मूंग की बुवाई अवश्य कर लें। इसके लिए प्रति एकड़ 10–12 किलोग्राम बीज का उपयोग करें और बुवाई से पहले बीज को राइजोबियम कल्चर से उपचारित करें। बुवाई के समय एक बैग डीएपी का प्रयोग लाभकारी रहेगा।

खरपतवार की समस्या सामान्यतः कम होती है, फिर भी आवश्यकता पड़ने पर 20–25 दिन बाद निराई-गुड़ाई करनी चाहिए। मूंग की फसल को दो सिंचाई की जरूरत होती है—पहली 20–25 दिन बाद और दूसरी 15–20 दिन के अंतराल पर। 50–55 दिन बाद सिंचाई रोक देनी चाहिए, ताकि फसल की फलियां एक समान पक सकें।

Share this story