राम जन्मभूमि चंदा प्रकरण पर बोले आचार्य अशोक द्विवेदी, कहा- निष्पक्ष जांच से ही कायम रहेगा श्रद्धालुओं का विश्वास
वाराणसी। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के पूर्व अध्यक्ष एवं प्रख्यात धर्माचार्य आचार्य अशोक द्विवेदी ने श्रीराम जन्मभूमि से जुड़े कथित चंदा अनियमितता प्रकरण पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग की है। शुक्रवार को रवींद्रपुरी स्थित अपने आवास पर आयोजित पत्रकार वार्ता में उन्होंने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है, इसलिए उससे जुड़े प्रत्येक आर्थिक और प्रशासनिक विषय में पूर्ण पारदर्शिता, जवाबदेही और सत्यनिष्ठा सुनिश्चित की जानी चाहिए।
आचार्य अशोक द्विवेदी ने कहा कि यदि चंदे के दुरुपयोग, गबन अथवा किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता से जुड़े आरोप सार्वजनिक रूप से सामने आए हैं, तो उनकी स्वतंत्र, निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कराई जानी चाहिए। उनका कहना था कि ऐसे मामलों में तथ्यों को सामने लाना केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि देश-विदेश में बसे करोड़ों रामभक्तों की भावनाओं और विश्वास की रक्षा का भी प्रश्न है।

उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार की वित्तीय अनियमितता की आशंका को अनदेखा करने या तथ्यों को छिपाने के बजाय पूरे मामले की पारदर्शी जांच होनी चाहिए। जांच के निष्कर्ष सार्वजनिक किए जाने चाहिए, ताकि समाज में किसी प्रकार का भ्रम या अविश्वास न रहे और श्रद्धालुओं का भरोसा कायम रहे।
धर्माचार्य ने कहा कि धार्मिक संस्थाओं की प्रतिष्ठा उनकी पारदर्शी कार्यप्रणाली, वित्तीय अनुशासन और जवाबदेही पर आधारित होती है। यदि किसी भी स्तर पर अनियमितता हुई है तो दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। वहीं यदि जांच में आरोप निराधार साबित होते हैं तो इसकी भी स्पष्ट जानकारी जनता के सामने रखी जानी चाहिए, ताकि अनावश्यक विवादों और अफवाहों पर विराम लग सके।
आचार्य द्विवेदी ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति, संस्था या संगठन पर आरोप लगाना नहीं है। उन्होंने कहा कि उनकी मांग केवल इतनी है कि श्रीराम जन्मभूमि जैसे राष्ट्रीय आस्था केंद्र से जुड़े मामले में पूरी निष्पक्षता और पारदर्शिता बरती जाए, जिससे सत्य सामने आ सके और समाज का विश्वास मजबूत बना रहे।
उन्होंने कहा कि आस्था से जुड़े संस्थानों का संचालन ईमानदारी, पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ होना चाहिए। यही मूल्य धार्मिक संस्थाओं की गरिमा बनाए रखते हैं और श्रद्धालुओं के विश्वास को सुदृढ़ करते हैं। उनके अनुसार किसी भी संवेदनशील मामले में निष्पक्ष जांच और तथ्यों का सार्वजनिक होना ही लोकतांत्रिक व्यवस्था तथा सामाजिक विश्वास की सबसे मजबूत आधारशिला है।

