कला, मानव गरिमा और शांति के लिए समर्पित जीवन को मिला सम्मान, प्रो. चॉकी फ्रेन को जन मित्र अवार्ड

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वाराणसी। कला, मानवाधिकार, शांति और मानवीय गरिमा के क्षेत्र में आजीवन एवं असाधारण योगदान के लिए अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त कलाकार, लेखक और शिक्षाविद् चॉकी फ्रेन को जन मित्र सम्मान (Jan Mitra Award) से सम्मानित किया गया। यह सम्मान पूर्व जन मित्र सम्मान प्राप्तकर्ताओं चंद्र मिश्रा और प्रो. सुरेश नायर के कर-कमलों से प्रदान किया गया। यह क्षण न्याय, लोकतंत्र और मानवीय मूल्यों के लिए निरंतर संघर्ष की परंपरा और एकजुटता का सशक्त प्रतीक बना।

पीवीसीएचआर कार्यालय में हुआ गरिमामय आयोजन
जन मित्र सम्मान समारोह का आयोजन शुक्रवार को दोपहर 1 बजे पांडेयपुर स्थित पीपुल्स विजिलेंस कमेटी ऑन ह्यूमन राइट्स (PVCHR) कार्यालय में किया गया। इस कार्यक्रम का संयुक्त आयोजन जन मित्र न्यास और मिर्ज़ा ग़ालिब लिटरेचर एंड आर्ट ग्लोबल क्लब द्वारा किया गया। समारोह में सामाजिक कार्यकर्ताओं, लेखकों, कलाकारों और मानवाधिकार से जुड़े लोगों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को और भी अर्थपूर्ण बना दिया।

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कला को बनाया मानव गरिमा और सामाजिक न्याय की आवाज़
आयोजकों ने बताया कि जन मित्र सम्मान उन व्यक्तित्वों को प्रदान किया जाता है, जिन्होंने कला, संस्कृति और शिक्षा को मानव गरिमा और सामाजिक न्याय की रक्षा का सशक्त माध्यम बनाया है। प्रो. चॉकी फ्रेन की कला युद्ध, सत्ता, पूंजी और बहिष्करण जैसी अमानवीय संरचनाओं को चुनौती देती रही है। उनकी रचनाओं ने हाशिये पर खड़े समुदायों की पीड़ा और संघर्ष को वैश्विक मंच पर मजबूती से प्रस्तुत किया है।

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सम्मान स्वीकार करते हुए बोले प्रो. फ्रेन
सम्मान स्वीकार करते हुए प्रो. चॉकी फ्रेन ने कहा कि शिक्षण, नेतृत्व और शोध के माध्यम से कला की जिम्मेदारी और उसकी शक्ति को सामने लाने के उनके आजीवन प्रयासों को यह मान्यता मिलना उनके लिए बड़े सम्मान की बात है। उन्होंने कहा कि कला अपने समय की साक्षी होती है और प्रभुत्वशाली आख्यानों को चुनौती देने का साहस रखती है। इस सम्मान के लिए उन्होंने डॉ. लेनिन रघुवंशी के प्रति विशेष आभार व्यक्त किया।

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वैश्विक स्तर पर पहचान बना चुके हैं प्रो. चॉकी फ्रेन
फुलब्राइट-नेहरू स्कॉलर रह चुके प्रो. फ्रेन वर्तमान में George Mason University में अध्यापन कर रहे हैं। उनकी कलाकृतियाँ अमेरिका, यूरोप, मध्य-पूर्व और भारत में प्रदर्शित हो चुकी हैं। लोकतंत्र, अन्याय और मानवीय पीड़ा पर उनके सशक्त हस्तक्षेप के लिए उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक सराहना मिली है।

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नैतिक साहस और एकजुटता का सम्मान
आयोजकों ने कहा कि जन मित्र सम्मान केवल कला का सम्मान नहीं है, बल्कि यह नैतिक साहस, मानवीय प्रतिबद्धता और उत्पीड़ित समुदायों के साथ अटूट एकजुटता का सम्मान है। यह उन मूल्यों को सम्मानित करता है, जो समाज में न्याय और समानता की स्थापना के लिए जरूरी हैं।

शांति और सामाजिक परिवर्तन का संकल्प
समारोह का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि जब कला विवेक और करुणा से जुड़ती है, तब वह शांति, न्याय और सामाजिक परिवर्तन की सबसे सशक्त आवाज़ बन जाती है। यह आयोजन वाराणसी में कला और मानवाधिकार के बीच मजबूत संवाद का एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हुआ।

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