कुपोषित बच्चों से भरा पोषण पुनर्वास केंद्र, NRC प्रभारी ने कहा- 100 प्रतिशत बच्चे स्वस्थ होकर ही निकलते हैं 

कुपोषित बच्चों से भरा पोषण पुनर्वास केंद्र, NRC प्रभारी ने कहा- 100 प्रतिशित बच्चे स्वस्थ होकर निकलते हैं 

वाराणसी। पंडित दीन दयाल उपाध्याय  चिकित्सालय स्थित पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) में कुल दस बेड हैं। यहाँ पर  कुपोषित बच्चों को भर्ती कर स्वस्थ एवं सुपोषित किया जाता है। बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी (डीपीओ) डीके सिंह ने बताया कि वर्तमान में एनआरसी में कुल 12 बच्चे भर्ती हैं, जिसमें दो बच्चों के लिए दो अतिरिक्त बेड बढ़ाकर उन्हें भर्ती किया गया है। 

डीपीओ ने बताया कि बाल विकास परियोजना अधिकारियों (सीडीपीओ) द्वारा किए गए प्रयास से बच्चों को एनआरसी तक लाया गया । इसके साथ ही अति कुपोषित बच्चों के अभिभावकों को एनआरसी में भर्ती करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इन बच्चों को 14 दिन तक चिकित्सक एवं समस्त स्टाफ की देखरेख में पूरी देखभाल की जाएगी।  पूरी तरह से स्वस्थ होने के बाद उन्हें एनआरसी से डिस्चार्ज किया जाएगा। 

उन्होंने बताया कि इन सभी बच्चों के डिस्चार्ज होने बाद कुपोषित बच्चों की दूसरी सूची भर्ती कराने के लिए तैयार है । पिछले माह 20 बच्चों के सापेक्ष केवल 14 बच्चे भर्ती हुए थे, जिस पर जिलाधिकारी की ओर से नाराजगी व्यक्त की गई थी । लक्ष्य की प्राप्ति के लिए विभाग द्वारा निरंतर प्रयास किए जा रहें हैं।

एनआरसी प्रभारी डॉ सौरभ सिंह ने बताया कि पोषण पुनर्वास केंद्र एक ऐसी सुविधा है जहां छह माह से पाँच वर्ष तक के गंभीर रूप से कुपोषित बच्चे जिनमें चिकित्सकीय जटिलताएं होती हैं, को चिकित्सकीय सुविधाएं मुफ्त में प्रदान की जाती हैं। इसके अलावा बच्चों की माताओं को बच्चों के समग्र विकास के लिए आवश्यक देखभाल तथा खान-पान संबंधित कौशल का प्रशिक्षण दिया जाता है। 

इस केंद्र में छह माह से पांच साल तक के कुपोषित बच्चों का इलाज किया जाता है । यहां शुरुआती दौर में 14 दिन रखकर बच्चों का इलाज व पोषक तत्वों से युक्त आहार दिया जाता है। यह भोजन शुरुआती दौर में बच्चे को दो-दो घंटे बाद दिया जाता है। यह प्रक्रिया रात में भी चलती है। इसके अलावा बच्चे के साथ आने वाली बच्चे की मां या अन्य परिजन को भोजन के अलावा पचास रुपये रोजाना भत्ता भी दिया जाता है। इस दौरान 100 फीसदी बच्चे इस वार्ड से स्वस्थ होकर निकले हैं।

डॉ सौरभ ने बताया कि इसके अलावा इलाज कराकर गए बच्चों का पुन: जांच के लिए लेकर आने पर भी उनको भत्ता दिया जाता है।  यदि वह 15 दिन में इलाज का फॉलो अप कराने आते है तो उन्हें 140 रुपये मिलते है। यह भत्ता उन्हें दो महीने तक मिलता है।

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