काशी में 50 दिवसीय वैदिक अनुष्ठान, माध्यन्दिन शाखा के दंडक्रम पारायण का चौथा दिन संपन्न, विश्व कल्याण की कामना से हो रहा आयोजन
वाराणसी। काशी के हनुमान घाट स्थित श्री कांची कामकोटिश्वर मंदिर परिसर में श्रीशुक्ल यजुर्वेद की माध्यन्दिन शाखा का कंठस्थ दंडक्रम पारायण जारी है। सोमवार, 27 अक्टूबर से शुरू हुए इस 50 दिवसीय वैदिक अनुष्ठान का शुक्रवार को चौथा दिन संपन्न हुआ। मूलाम्नाय श्री कांची कामकोटि पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी शंकर विजयेन्द्र सरस्वती जी महाराज की प्रेरणा और स्वामी गोविंददेव गिरी जी महाराज के आशीर्वाद से आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य संपूर्ण जगत के मंगल और कल्याण की कामना करना है।

महर्षि वेदव्यास प्रतिष्ठान, पुणे और समर्थाद्वैत वेद पाठशाला, त्र्यंबकेश्वर के तत्वावधान में आयोजित इस अनुष्ठान में वैदिक परंपरा के अनुरूप मंत्रों का सस्वर और शुद्ध उच्चारण किया जा रहा है। शैलेंद्र समर्थ काकडे गुरुजी ने बताया कि चारों वेदों की लगभग एक हजार वर्षों की पाठ परंपरा में सबसे कम आयु के वैदिक वेदोपासक अद्वैत एवं वेदोपासक शैलेंद्र समर्थ काकडे द्वारा लगातार 50 दिनों तक यह कठिन पारायण किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि काशी में इस प्रकार का आयोजन होना अपने आप में गौरव का विषय है। इसका उद्देश्य केवल वैदिक ज्ञान का संरक्षण नहीं, बल्कि विश्व कल्याण की भावना को भी साकार करना है।
काशी के प्रख्यात वैदिक विद्वान के. वेंकटरमण घनपाठी ने कहा कि वेद केवल प्राचीन ज्ञान के ग्रंथ नहीं, बल्कि भारत की सनातन ज्ञान परंपरा की आधारशिला हैं। वैदिक मंत्रों के शुद्ध उच्चारण, स्वर और पारंपरिक पाठ पद्धति को नई पीढ़ी तक पहुंचाना आज की महत्वपूर्ण आवश्यकता है। कार्यक्रम में श्री कांची कामकोटि पीठ के प्रबंधक वी.एस. सुब्रमण्यम मणि, संयोजक गजानन ज्योतकर, शैलेंद्र काकडे गुरुजी और वी.एस. चन्द्रशेखर चंद्रू ने दंडक्रम पारायण के महत्व और उसकी विशेषताओं पर प्रकाश डाला।

पारायण की शुद्धता और वैदिक विधि के पालन की जांच के लिए महाराष्ट्र से वेद भास्कर प्रशांत जोशी गुरुजी और वेदमूर्ति घनपाठी किरण शास्त्री पाठक परीक्षक के रूप में उपस्थित हैं। विश्व हिंदू महासंघ के कन्हैया सिंह ने कहा कि काशी में आयोजित यह अनुष्ठान वेद, गुरु-शिष्य परंपरा और सनातन ज्ञान के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास है। इससे देशभर के वैदिक विद्यार्थियों और वेदोपासकों को प्रेरणा मिलेगी।

