वाराणसी की गलियों से ग्लोबल बाजार तक पहुंची 400 साल पुरानी गुलाबी मीनाकारी, रक्षाबंधन से पहले अमेरिका-कनाडा समेत कई देशों से राखियों के ऑर्डर

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लोगों को लुभा रही चांदी पर रंगों की खूबसूरत नक्काशी

500 से 2000 रुपये तक है गुलाबी मीनाकारी वाली राखियों की कीमत

एक महीने से 10 से अधिक कारीगर दिन-रात जुटे हैं ऑर्डर पूरा करने में


वाराणसी। काशी की गलियों में सदियों से संजोई गई गुलाबी मीनाकारी की कला अब वैश्विक बाजार में अपनी चमक बिखेर रही है। मुगलकाल से जुड़ी करीब 400 साल पुरानी इस पारंपरिक कलाकारी की रक्षाबंधन से पहले मांग तेजी से बढ़ गई है। अमेरिका, कनाडा समेत कई देशों से गुलाबी मीनाकारी से तैयार राखियों के ऑर्डर कारीगरों को मिल रहे हैं। विदेशी मांग को पूरा करने के लिए कारीगर दिन-रात काम में जुटे हैं।


गुलाबी मीनाकारी से जुड़े आर्टिजन रोहन विश्वकर्मा के मुताबिक इस बार रक्षाबंधन के लिए राखियों के कई आकर्षक डिजाइन तैयार किए गए हैं। चांदी से बनी इन राखियों पर बेहद बारीकी से गुलाबी मीनाकारी का रंग भरा गया है। पारंपरिक कला और आधुनिक डिजाइन के मेल से तैयार ये राखियां सामान्य राखियों से अलग हैं। इनकी चमक लंबे समय तक बरकरार रहने का दावा किया जा रहा है।

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राखी नहीं, सालों तक पहन सकेंगे ब्रिसलेट
कारीगरों ने राखियों को इस तरह डिजाइन किया है कि रक्षाबंधन के बाद भी इन्हें ब्रिसलेट की तरह हाथ में पहना जा सके। यही खूबी इन्हें खास बना रही है। अलग-अलग डिजाइन और आकार में तैयार गुलाबी मीनाकारी वाली राखियों की कीमत 500 रुपये से लेकर 2000 रुपये तक है।

रोहन विश्वकर्मा ने बताया कि करीब एक महीने से राखियों के ऑर्डर पूरे करने के लिए 10 से अधिक कारीगर लगातार काम कर रहे हैं। विदेशों से आ रहे ऑर्डर ने कारीगरों के उत्साह को और बढ़ाया है।

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ओडीओपी और जीआई टैग से मिली नई पहचान
कारीगरों का कहना है कि एक समय गुलाबी मीनाकारी से जुड़े कई कलाकार काम छोड़ने लगे थे। सरकार की ओर से इसे वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ओडीओपी) में शामिल किए जाने और जीआई टैग मिलने के बाद इस कला को नई पहचान मिली है। देश के साथ विदेशों में भी इसकी मांग बढ़ी है।

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प्रधानमंत्री के प्रचार से बढ़ी पहचान
गुलाबी मीनाकारी को वैश्विक पहचान दिलाने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा इसके उत्पादों को बढ़ावा दिए जाने का भी कारीगरों ने उल्लेख किया। प्रधानमंत्री विभिन्न देशों के राष्ट्राध्यक्षों को गुलाबी मीनाकारी से तैयार उत्पाद उपहार में दे चुके हैं। इससे काशी की इस पारंपरिक कला की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान और मजबूत हुई है।

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