BHU गेट पर पानी में बैठकर युवा कांग्रेस का प्रदर्शन, कसा तंज- यही है ‘क्योटो शहर’

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वाराणसी। मंगलवार को हुई तेज बारिश ने शहर की जलनिकासी व्यवस्था और विकास के दावों पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए। करीब आधे घंटे की बारिश के बाद ही वाराणसी के कई इलाकों, गलियों और प्रमुख मार्गों पर जलभराव की स्थिति बन गई। काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के मुख्य द्वार के आसपास भी सड़क पर पानी भर गया। जलजमाव से छात्र-छात्राओं, मरीजों, तीमारदारों और आम राहगीरों को परेशानी उठानी पड़ी। इसी को लेकर महानगर युवा कांग्रेस अध्यक्ष चंचल शर्मा ने कार्यकर्ताओं के साथ पानी में बैठकर विरोध जताया।

प्रदर्शन के दौरान चंचल शर्मा ने व्यंग्य करते हुए कहा कि “यही है प्रधानमंत्री का क्योटो शहर।” उन्होंने कहा कि वाराणसी को विश्वस्तरीय शहर बनाने और विकास के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन सामान्य बारिश में ही शहर की सड़कों पर पानी भर जाता है। प्रदर्शन के माध्यम से उन्होंने नगर निगम और प्रदेश सरकार की जलनिकासी व्यवस्था पर सवाल उठाए।

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आधे घंटे की बारिश में खुली व्यवस्था की पोल
बारिश के बाद BHU मुख्य द्वार के आसपास सड़क पर काफी पानी जमा हो गया। पैदल राहगीरों और दोपहिया वाहन चालकों को जलभराव के बीच से होकर गुजरना पड़ा। BHU का मुख्य द्वार शहर के प्रमुख प्रवेश मार्गों में शामिल है। यहां विश्वविद्यालय, अस्पताल और अन्य संस्थानों से जुड़े होने के कारण रोजाना बड़ी संख्या में लोगों की आवाजाही होती है। ऐसे में थोड़ी देर की बारिश के बाद ही जलभराव होने से व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं।

महानगर युवा कांग्रेस अध्यक्ष चंचल शर्मा ने आरोप लगाया कि वाराणसी में भाजपा की सरकार होने के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यहां से लगातार सांसद हैं। इसके बावजूद शहर में जलनिकासी की समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है। उन्होंने कहा कि बारिश होते ही विकास के दावों की जमीनी हकीकत सामने आ जाती है।

उन्होंने कहा कि शहर की गलियों, चौराहों और प्रमुख मार्गों पर जलजमाव लोगों के लिए परेशानी का कारण बन रहा है। यदि सामान्य बारिश में ही सड़कें पानी में डूबने लगें तो जलनिकासी व्यवस्था की व्यापक समीक्षा की जरूरत है।


BHU आने-जाने वालों की बढ़ी परेशानी
युवा कांग्रेस नेताओं ने BHU मुख्य द्वार के आसपास जलभराव को लेकर विशेष चिंता जताई। उनका कहना है कि BHU वाराणसी का प्रमुख शैक्षणिक और चिकित्सा केंद्र है। विश्वविद्यालय के अलावा यहां अस्पताल भी है, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में मरीज और उनके परिजन पहुंचते हैं।

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बारिश के बाद मुख्य मार्ग पर पानी जमा होने से मरीजों और तीमारदारों के साथ छात्र-छात्राओं और कर्मचारियों को भी परेशानी हुई। नेताओं ने कहा कि ऐसे महत्वपूर्ण स्थान पर जलनिकासी की पर्याप्त व्यवस्था होना जरूरी है।

स्थायी समाधान की मांग
चंचल शर्मा ने कहा कि जनता को कागजों और विज्ञापनों में विकास नहीं, बल्कि जमीन पर बेहतर व्यवस्था चाहिए। बारिश के दौरान सड़कें जलमग्न न हों और लोगों का आवागमन बाधित न हो, इसके लिए जलनिकासी व्यवस्था को मजबूत किया जाना चाहिए।

उन्होंने मांग की कि हर वर्ष जलभराव वाले स्थानों को चिह्नित कर वहां स्थायी समाधान कराया जाए। नालों की नियमित सफाई, जलनिकासी मार्गों की क्षमता बढ़ाने और आवश्यकता वाले स्थानों पर नए ड्रेनेज सिस्टम विकसित करने की दिशा में प्रभावी कार्रवाई की जाए।

उन्होंने कहा कि वाराणसी को विश्वस्तरीय शहर बनाने के दावे तभी सार्थक होंगे, जब नागरिकों को बुनियादी सुविधाएं भी बेहतर मिलें। हर बारिश के बाद जलजमाव की समस्या को मौसमी समस्या मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। प्रदर्शन में कैंट विधानसभा अध्यक्ष युवा कांग्रेस धीरज सोनकर, महानगर महासचिव युवा कांग्रेस आयुष पटेल, महानगर उपाध्यक्ष युवा कांग्रेस आस्तोष श्रीवास्तव समेत अन्य कार्यकर्ता मौजूद रहे।

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