तुम लोग सिर्फ जूते चप्पल पॉलिश करने लायक हो... पीएचडी में प्रवेश नहीं मिलने से फूट-फूट कर रोया छात्र, विभाग के प्रोफेसर पर लगाया अपशब्द बोलने का आरोप

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वाराणसी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में शुक्रवार को उस समय हड़कंप मच गया जब एक छात्र कुलपति आवास के सामने धरने पर बैठ गया। छात्र शिवम सोनकर ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर भेदभाव का आरोप लगाते हुए पीएचडी में प्रवेश देने की मांग की। उनका कहना है कि उन्होंने प्रवेश परीक्षा में सामान्य श्रेणी में दूसरा स्थान प्राप्त किया, फिर भी उन्हें प्रवेश नहीं दिया जा रहा है।

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छात्र का दर्द: फूट-फूट कर रोया शिवम

शिवम सोनकर बीएचयू में शोधार्थी बनने का सपना लेकर आए थे, लेकिन बार-बार प्रयास करने के बावजूद उन्हं  प्रवेश से वंचित रखा जा रहा है। उनका कहना है कि वे अनुसूचित जाति (एससी) श्रेणी से आते हैं, लेकिन प्रवेश परीक्षा में उन्होंने सामान्य श्रेणी में दूसरी रैंक हासिल की। इसके बावजूद विश्वविद्यालय प्रशासन उन्हें प्रवेश नहीं दे रहा है।

छात्र का आरोप है कि विभाग के एक प्रोफेसर ने उनके साथ जातिगत भेदभाव किया और अपमानजनक बातें कहीं। उन्होंने कहा, "मुझे दलित कहकर अपमानित किया गया और कहा गया कि तुम लोग सिर्फ जूते-चप्पल पॉलिश करने के लायक हो, तुम्हें पीएचडी में प्रवेश नहीं दिया जाएगा।"

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पीएचडी सीटें खाली, फिर भी प्रवेश नहीं

शिवम सोनकर के अनुसार, उन्होंने 2024-25 सत्र के लिए पीस रिसर्च विषय में पीएचडी के लिए आवेदन किया था। उनके विभाग में RET Exempted श्रेणी में तीन सीटें खाली हैं। उन्होंने RET मोड में परीक्षा दी और दूसरी रैंक हासिल की, लेकिन विश्वविद्यालय इन खाली सीटों को RET मोड में तब्दील नहीं कर रहा है।

छात्र का कहना है कि ऐसा करना उन्हें प्रवेश प्रक्रिया से वंचित कर देगा, जिससे उनकी मेहनत और करियर दोनों प्रभावित होंगे। उन्होंने इसे "दलित छात्र की अकादमिक हत्या" करार दिया।

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अनिश्चितकालीन धरने पर बैठा छात्र

शिवम सोनकर ने विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए कहा कि जब तक उन्हें न्याय नहीं मिलेगा, वे कुलपति आवास के समक्ष अनिश्चितकालीन प्रदर्शन करते रहेंगे। उन्होंने कहा, "मैं अपने आखिरी दम तक अपने अधिकार की लड़ाई लड़ूंगा।"

शिवम ने विश्वविद्यालय के अधिकारियों और प्रोफेसरों पर दलित विरोधी मानसिकता रखने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, "मैंने सामान्य श्रेणी में रैंक 2 पाया है, लेकिन कुछ लोग इसे बर्दाश्त नहीं कर पा रहे हैं। मेरा दलित होना मेरे खिलाफ इस्तेमाल किया जा रहा है। अगर सीटें खाली हैं, तो मुझे प्रवेश से वंचित क्यों किया जा रहा है?"

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छात्र ने लगाई न्याय की गुहार

कुलपति आवास के बाहर बैठे छात्र ने लोगों से न्याय की गुहार लगाते हुए कहा कि उसे दलित होने की सजा न दी जाए। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से अपील की कि उन्हें पीएचडी में प्रवेश दिया जाए ताकि वे अपने शैक्षणिक सपने को पूरा कर सकें।
 

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