ओडीओसी की ब्रांडिंग और प्रोत्साहन के लिए देगी आर्थिक मदद देगी योगी सरकार
- 'एक जनपद एक व्यंजन’ योजना से बनारस के स्वाद को मिलेगी नए रूप से मिलेगी अंतरराष्ट्रीय पहचान
- राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय आयोजन में जाने के लिए 75% का मिलेगा अनुदान
- "एक जनपद-एक व्यंजन" के लिए योगी सरकार देगी 25 प्रतिशत की सब्सिडी
वाराणसी। बनारसी पान की खुशबू, लस्सी-ठंडाई, लौंगलता और मलइयो की मिठास, कचौड़ी का बेजोड़ स्वाद ,यही नहीं स्वतंत्रता आंदोलन में हिस्सा लेनी वाली तिरंगा बर्फी की पहचान अब केवल काशी तक सीमित नहीं रहेगी। "एक जनपद एक व्यंजन" योजना के माध्यम से वाराणसी के ये पारंपरिक व्यंजन वैश्विक बाजार में अलग पहचान बनाने की दिशा में आगे बढ़ेंगे। योगी सरकार "एक जनपद एक व्यंजन" के लिए सब्सिडी से लेकर ब्रांडिंग प्रोत्साहन और अंतरराष्ट्रीय मंच तक ले जाने के लिए आर्थिक सहायता की योजना लेकर आई है। यह पहल स्थानीय उद्यमियों के लिए आर्थिक सशक्तिकरण का माध्यम बनने के साथ ही काशी की समृद्ध खाद्य संस्कृति को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगी।
स्वाद भी, इतिहास भी
जब बनारस की गलियों से उठती ख़ुशबू विदेशों तक पहुंचेगी, तो यह केवल व्यापार नहीं होगा बल्कि भारत की समृद्ध पाक विरासत का वैश्विक उत्सव भी होगा। इस योजना के तहत वाराणसी के छह सबसे प्रसिद्ध और पारंपरिक व्यंजनों को चुना गया है,जो काशी की पहचान हैं।
-मलइयो (सर्दियों का अनूठा, हल्का मीठा स्वाद)
-बनारसी पान (जिसके बिना काशी की यात्रा अधूरी है)
-कचौड़ी (बनारसी सुबह का नास्ता)
-तिरंगा बर्फी (आजादी के आंदोलन के इतिहास से जुड़ी मिठाई)
-लौंग लता (पारंपरिक मिष्ठान)
-ठंडाई - लस्सी (काशी की मस्ती का प्रतीक)
ओडीओसी के लिए योगी सरकार देगी 25 प्रतिशत की सब्सिडी
उपायुक्त उद्योग अभिषेक प्रियदर्शी ने बताया कि 'एक जनपद एक क्यूज़ीन' की विभिन्न विधाओं में कार्यरत या कार्य करने के इच्छुक व्यक्तियों के लिये व्यंजन की उत्पादकता बढ़ाने के लिए मशीनों की स्थापना, पैकेजिंग एवं लेबलिंग, कोल्ड चेन/ कोल्ड स्टोरेज हेतु डीप फ्रीजर, फूड टेस्टिंग, क्लाउड किचन इत्यादि की स्थापना हेतु उद्यमियों को ऋण के सापेक्ष 25 प्रतिशत तक की मार्जिन मनी सहायता/ सब्सिडी अनुदान के रूप में प्रदान की जायेगी ।
राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय आयोजन में जाने के लिए 75% का मिलेगा अनुदान
उपायुक्त उद्योग ने बताया कि योजना का दूसरा और सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा "विपणन प्रोत्साहन योजना है। अक्सर स्थानीय हलवाई या कारीगर पैसों की कमी के कारण बड़े शहरों या विदेशों के फूड फेस्टिवल्स में नहीं जा पाते हैं। अब यही पारंपरिक स्वाद लोकल से ग्लोबल होने की ओर कदम बढ़ा रहा है।
अब योगी सरकार चयनित व्यंजनों से जुड़े उत्पादकों, कारीगरों और निर्यातकों को स्थानीय, राज्य, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के बड़े आयोजनों में भेजने का जिम्मा उठा रही है। वहां लगने वाले स्टॉल का शुल्क, माल की ढुलाई और खुद कारीगर के आने-जाने के किराए पर होने वाले खर्च के अलावा, व्यंजनों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाने और फूड क्वालिटी सर्टिफिकेट लेने पर भी यह 75 प्रतिशत की छूट मिलेगी।
कौन ले सकता है इस योजना का लाभ
-आवेदन के लिए किसी भी तरह की शैक्षणिक योग्यता की अनिवार्यता नहीं है
-आवेदनकर्ता की उम्र कम से कम 18 वर्ष होनी चाहिए और वह जनपद का स्थायी निवासी होना चाहिए
-आवेदक या उसकी इकाई किसी भी बैंक की डिफॉल्टर नहीं होनी चाहिए
-परिवार के किसी सदस्य ने पहले किसी अन्य स्वरोजगार योजना का लाभ न लिया हो
-आवेदन के साथ मात्र 10 रुपये के स्टाम्प पेपर पर नोटरी शपथ पत्र देना होगा

