संत रविदास की जन्मस्थली पर अत्याधुनिक संग्रहालय का निर्माण करा रही योगी सरकार
भावी पीढ़ी को संत रविदास के जीवन, दर्शन और शिक्षा से परिचित कराएगा संग्रहालय
₹2,320.73 लाख से 1,645 वर्ग मीटर क्षेत्रफल में हो रहा निर्माण
संत रविदास के जीवन, साहित्य, भक्ति आंदोलन में योगदान, तत्कालीन सामाजिक/आध्यात्मिक परिवेश को डिजिटल एवं ऑडियो-विजुअल तकनीक के माध्यम से जीवंत रूप में किया जाएगा प्रस्तुत
वाराणसी। संत रविदास के समरसता, समानता और मानवता के प्रेरणादायी संदेश को आधुनिक तकनीक के माध्यम से जन-जन तक पहुंचाने की दिशा में योगी सरकार महत्वपूर्ण पहल कर रही है। उनकी जन्मस्थली सीर गोवर्धनपुर में भव्य एवं अत्याधुनिक संग्रहालय का निर्माण कराया जा रहा है। यह संग्रहालय आने वाली पीढ़ियों को संत रविदास के जीवन, दर्शन और शिक्षा से परिचित कराएगा।
लगभग 1,645 वर्ग मीटर क्षेत्रफल में जी+1 (भूतल एवं प्रथम तल) पर बनने वाले इस संग्रहालय का निर्माण लगभग ₹2,320.73 लाख से कराया जा रहा है। संग्रहालय में संत रविदास के जीवन, साहित्य, भक्ति आंदोलन में उनके योगदान तथा 15वीं–16वीं शताब्दी के सामाजिक एवं आध्यात्मिक परिवेश को डिजिटल प्रोजेक्शन, ग्राफिक्स और ऑडियो-विजुअल तकनीक के माध्यम से जीवंत रूप में प्रस्तुत किया जाएगा।

संतों एवं महात्माओं की आध्यात्मिक नगरी काशी में संत शिरोमणि गुरु रविदास के जीवन एवं दर्शन पर आधारित यह आधुनिक संग्रहालय तेजी से आकार ले रहा है। उत्तर प्रदेश सरकार उनकी आध्यात्मिक विरासत के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य कर रही है। यूपी प्रोजेक्ट्स कॉर्पोरेशन लिमिटेड, वाराणसी के परियोजना प्रबंधक मानवेन्द्र सिंह ने बताया कि सीर गोवर्धनपुर स्थित संत रविदास की जन्मस्थली पर 1,645 वर्ग मीटर क्षेत्रफल में संग्रहालय का निर्माण कार्य प्रगति पर है। परियोजना को फरवरी 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
उन्होंने बताया कि संग्रहालय में डिजिटल चित्रों, चलचित्रों एवं आधुनिक प्रदर्शन तकनीकों के माध्यम से संत रविदास के जन्म, जीवन, गृहस्थ जीवन, आध्यात्मिक यात्रा तथा उनके सामाजिक योगदान को आकर्षक ढंग से प्रस्तुत किया जाएगा। संग्रहालय के जरिए पर्यटक संत रविदास के जीवन के अनेक पहलुओं से परिचित हो सकेंगे।

संग्रहालय में भक्ति आंदोलन में संत रविदास के योगदान, उनकी शिक्षाओं, उपदेशों एवं रचनाओं को विशेष गैलरियों में प्रदर्शित किया जाएगा। ग्राफिक्स एवं ऑडियो-विजुअल माध्यमों के जरिए उनके साहित्यिक योगदान को भी प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया जाएगा, ताकि नई पीढ़ी उनके विचारों और संदेशों से प्रेरणा प्राप्त कर सके।
पांच आधुनिक गैलरियां होंगी आकर्षण का केंद्र
परियोजना प्रबंधक के अनुसार संग्रहालय में पांच आधुनिक गैलरियां विकसित की जा रही हैं। भूतल एवं प्रथम तल पर प्रशासनिक कार्यालय, सोवेनियर शॉप, श्रद्धालुओं के बैठने की व्यवस्था तथा अन्य जनसुविधाओं का भी प्रावधान किया गया है। इसके अतिरिक्त कैफेटेरिया तथा आकर्षक लैंडस्केपिंग भी की जाएगी, जिससे परिसर को और सुंदर एवं व्यवस्थित स्वरूप मिलेगा।

काशी की आध्यात्मिक धरती पर विकसित हो रहा यह संग्रहालय न केवल संत शिरोमणि गुरु रविदास की अमूल्य विरासत का संरक्षण करेगा, बल्कि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं/पर्यटकों को भक्ति, समता, सामाजिक समानता और मानवता के अमर संदेश से भी रूबरू कराएगा।

