IMS-BHU में कैंसर उपचार की अत्याधुनिक तकनीकों पर कार्यशाला, PIPAC और HIPEC सर्जरी का सफल प्रदर्शन

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वाराणसी। आईएमएस बीएचयू में सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग द्वारा अत्याधुनिक कैंसर उपचार तकनीकों पर केंद्रित एक उन्नत कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। विभागाध्यक्ष डॉ. मल्लिका तिवारी के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में प्रेशराइज्ड इंट्रापेरिटोनियल एरोसोल कीमोथेरेपी (PIPAC), साइटोरिडक्टिव सर्जरी (CRS) और हाइपरथर्मिक इंट्रापेरिटोनियल कीमोथेरेपी (HIPEC) जैसी आधुनिक तकनीकों पर विशेषज्ञों ने विस्तार से चर्चा की।

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कार्यशाला में देश के विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों से आए विशेषज्ञ चिकित्सकों ने भाग लिया और प्रतिभागियों को नवीनतम कैंसर उपचार पद्धतियों का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया। PIPAC तकनीक की ड्राई डेमोंस्ट्रेशन के माध्यम से बताया गया कि किस प्रकार लैप्रोस्कोपिक विधि से कीमोथेरेपी दवाओं को प्रेशराइज्ड एरोसोल के रूप में पेट की गुहा में पहुंचाया जाता है। इससे दवाओं का समान वितरण और ऊतकों में गहराई तक प्रभाव संभव होता है, जिससे उपचार अधिक प्रभावी और अपेक्षाकृत सुरक्षित बनता है।

कार्यशाला के दौरान लाइव सर्जरी सत्र भी आयोजित किए गए, जिसमें दो मरीजों पर CRS और HIPEC सर्जरी का सफल प्रदर्शन किया गया। इस जटिल प्रक्रिया में All India Institute of Medical Sciences New Delhi से आए विशेषज्ञ प्रो. एम. डी. रे और प्रो. राकेश गर्ग ने सक्रिय भूमिका निभाई। सर्जरी के दौरान रोगी चयन, शल्य तकनीक, पेरिऑपरेटिव प्रबंधन और एनेस्थीसिया से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी गई।

दोपहर में आयोजित अकादमिक सत्र में विशेषज्ञों ने पेरिटोनियल सतह कैंसर के प्रबंधन की आधुनिक रणनीतियों पर अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने उपचार के बेहतर परिणामों के लिए बहु-विषयक (मल्टीडिसिप्लिनरी) दृष्टिकोण को आवश्यक बताया। इस अवसर पर डॉ. मल्लिका तिवारी ने कहा कि PIPAC और HIPEC जैसी तकनीकें कैंसर उपचार में नई दिशा दे रही हैं और इनका व्यापक उपयोग भविष्य में रोगियों के लिए लाभकारी साबित होगा। वहीं, विशेषज्ञों ने इस प्रकार के हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण कार्यक्रमों को जटिल सर्जिकल प्रक्रियाओं के सुरक्षित और मानकीकृत क्रियान्वयन के लिए बेहद जरूरी बताया।

यह कार्यशाला न केवल आधुनिक चिकित्सा तकनीकों के प्रसार का माध्यम बनी, बल्कि क्षेत्रीय स्तर पर कैंसर उपचार सेवाओं को और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल भी साबित हुई।

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