वाराणसी में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्द के बयान पर महिलाओं का प्रदर्शन, लमही में आक्रोश मार्च
वाराणसी। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्द के कथित विवादित बयान को लेकर महिलाओं में भारी आक्रोश देखने को मिला। चैत्र नवरात्रि के बीच दिए गए ‘10 लाख हिन्दू लड़कियों के विवाह’ संबंधी बयान से नाराज दलित महिला परिषद ने लमही स्थित मुंशी प्रेमचन्द स्मृति द्वार पर जोरदार प्रदर्शन किया। महिलाओं ने इसे हिन्दू महिलाओं का अपमान बताते हुए स्वामी के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
आक्रोश मार्च निकालकर किया विरोध प्रदर्शन
प्रदर्शन से पहले दलित महिला परिषद की नेता खुशी रमन के नेतृत्व में मुंशी प्रेमचंद स्मारक से प्रेमचंद स्मृति द्वार तक आक्रोश मार्च निकाला गया। हाथों में तख्तियां और ड्रम के साथ महिलाओं ने ‘स्वामी ने झूठ बोला’ और ‘स्वामी मुर्दाबाद’ जैसे नारे लगाए। प्रदर्शन के दौरान स्वामी की तस्वीर पर क्रॉस कर विरोध जताया गया।
इन्द्रेश कुमार के समर्थन में उतरीं महिलाएं
महिलाओं ने इन्द्रेश कुमार के समर्थन में भी आवाज उठाई। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि स्वामी द्वारा लगाए गए आरोप पूरी तरह निराधार हैं। उनका आरोप है कि समाज सुधारक की छवि को खराब करने और दलित बेटियों को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है, जिससे महिलाओं में गहरी नाराजगी है।
‘10 हजार नाम बताओ’- महिलाओं की खुली चुनौती
प्रदर्शन के दौरान महिलाओं ने स्वामी से मांग की कि वे अपने बयान को साबित करें और कम से कम 10 हजार लड़कियों के नाम सार्वजनिक करें। महिलाओं ने सवाल उठाया कि यदि इतना बड़ा मामला था, तो स्वामी ने पहले विरोध क्यों नहीं किया।
जांच की मांग और आंदोलन तेज करने की चेतावनी
प्रदर्शनकारी महिलाओं ने स्वामी के खातों और संबंधों की जांच की मांग भी उठाई। सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. नजमा परवीन ने कहा कि इस तरह के बयान समाज में भ्रम और तनाव पैदा करते हैं और इसका कड़ा विरोध होना चाहिए। वहीं डॉ. अर्चना सिंह ने चेतावनी दी कि यदि किसी महिला कार्यकर्ता को नुकसान पहुंचा तो इसकी जिम्मेदारी स्वामी की होगी।
‘नारी सम्मान के लिए आंदोलन जारी रहेगा’
महिला नेता सरोज देवी समेत अन्य वक्ताओं ने साफ कहा कि नारी सम्मान के खिलाफ किसी भी बयान को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यह आंदोलन आगे और तेज किया जाएगा और सच सामने लाकर ही दम लिया जाएगा।
बड़ी संख्या में महिलाएं रहीं मौजूद
इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल रहीं, जिनमें लक्ष्मीना, धनेसरा, मीरा, पूनम, सुनीता, रीता, विद्या, अंजू, माला देवी, सविता, रेखा, मनीषा, तारा, मुन्नी, चमेली, उर्मिला, सरिता, संजु, राजकुमारी, सीमा, शिवकुमारी, अनीता, राधा, शिखा समेत अन्य महिलाएं मौजूद थीं।
इस पूरे घटनाक्रम ने वाराणसी में एक नया सामाजिक और राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है, जिस पर आने वाले दिनों में और प्रतिक्रियाएं देखने को मिल सकती हैं।







