काशी में गांधी के कदम पड़े तो इतिहास बोल उठा, बीएचयू के मंच से राजाओं को सुनाई खरी-खरी
विदेशी भाषा में संबोधन पर जताई थी आपत्ति, आभूषणों को गरीबों की धरोहर मानने का दिया संदेश
1916 में बीएचयू के स्थापना समारोह में गांधी का ऐतिहासिक संबोधन, भाषा, गरीबी और सामाजिक जिम्मेदारी पर बेबाकी से रखी बात
वाराणसी। काशी की धरती महात्मा गांधी के जीवन और विचारों से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रसंगों की साक्षी रही है। गांधी 6 फरवरी 1916 को काशी हिंदू विश्वविद्यालय के स्थापना समारोह में पहुंचे थे। गांधी हेरिटेज पोर्टल भी इस तारीख को बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में गांधी के व्याख्यान के रूप में दर्ज करता है। बीएचयू के उस ऐतिहासिक समारोह में देश के कई प्रमुख राजा-महाराजा और तत्कालीन ब्रिटिश शासन के प्रतिनिधि मौजूद थे। गांधी ने मंच से शिक्षा और भाषा के सवाल के साथ सामाजिक असमानता का मुद्दा उठाया। उन्होंने इस बात पर आपत्ति जताई कि भारतीयों के अपने शिक्षण संस्थान के समारोह में भारतीयों को संबोधित करने के लिए विदेशी भाषा का सहारा लेना पड़ रहा है।

गांधी ने समारोह में मौजूद धनाढ्य वर्ग के पहनावे और आभूषणों पर भी सवाल उठाया। उनका संदेश था कि देश में व्यापक गरीबी के बीच संपन्न वर्ग को अपनी संपत्ति और वैभव को समाज के जरूरतमंद लोगों के हित से जोड़कर देखना चाहिए। उनके तीखे संबोधन से समारोह का माहौल बदल गया और उनके वक्तव्य पर वहां मौजूद कुछ राजाओं-महाराजाओं की नाराजगी का उल्लेख ऐतिहासिक विवरणों में मिलता है।

गांधी-मालवीय संबंध भी रहे खास
बीएचयू की स्थापना 1916 में महामना पंडित मदन मोहन मालवीय के नेतृत्व में हुई थी। विश्वविद्यालय के आधिकारिक विवरण के अनुसार इसके निर्माण में एनी बेसेंट समेत कई प्रमुख व्यक्तियों का सहयोग रहा। गांधी और मालवीय के संबंधों ने भी गांधी के बीएचयू से जुड़ाव को विशेष बनाया।
गांधी चबूतरा आज भी स्मृति का केंद्र
बीएचयू परिसर में गांधी से जुड़ी स्मृतियों में गांधी चबूतरे का भी उल्लेख किया जाता है। 1942 की उनकी काशी यात्रा से जुड़े इस स्थल को आज भी गांधी की स्मृति से जोड़ा जाता है। मालवीय भवन और भारत कला भवन में भी विश्वविद्यालय और राष्ट्रीय आंदोलन से जुड़े ऐतिहासिक दस्तावेज, चित्र और सामग्री संरक्षित हैं।

2 अक्टूबर नहीं, गांधी जयंती का दिन
गांधी को याद करने के संदर्भ में एक तथ्यात्मक सुधार जरूरी है-2 अक्टूबर महात्मा गांधी की जयंती है, पुण्यतिथि नहीं। गांधी की पुण्यतिथि 30 जनवरी को मनाई जाती है। इसलिए इस सामग्री को 2 अक्टूबर के अवसर पर प्रकाशित किया जाए तो इसे गांधी जयंती के संदर्भ में रखना अधिक सही होगा। काशी हिंदू विश्वविद्यालय आज भी गांधी और मालवीय की विरासत से जुड़े स्थलों और सामग्री के माध्यम से उस दौर की स्मृतियों को संजोए हुए है। विश्वविद्यालय की स्थापना 1916 में हुई थी और इसकी ऐतिहासिक पहचान शिक्षा के साथ राष्ट्रीय जागरण से भी जुड़ी रही है।

