आईएमएस-बीएचयू में 21.89 करोड़ की मशीन खरीद पर विजिलेंस का शिकंजा, दिल्ली से आई टीम ने निदेशक समेत 8 अधिकारियों से 12 घंटे की मैराथन पूछताछ
वाराणसी। बीएचयू के चिकित्सा विज्ञान संस्थान (आईएमएस) में 21.89 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक चिकित्सा उपकरणों की खरीद को लेकर उठे सवालों के बीच जांच प्रक्रिया ने रफ्तार पकड़ ली है। मामले की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली से केंद्रीय विजिलेंस (सतर्कता) टीम वाराणसी पहुंची और पूरे प्रकरण की विस्तृत पड़ताल शुरू कर दी। टीम ने एलडी गेस्ट हाउस में करीब 12 घंटे तक तीन चरणों में आईएमएस के निदेशक सहित कुल आठ अधिकारियों से गहन पूछताछ की। इस दौरान खरीद प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेजों, तकनीकी अनुमोदनों, वित्तीय स्वीकृतियों और शिकायतकर्ता द्वारा उपलब्ध कराए गए अभिलेखों का भी बारीकी से मिलान किया गया।
यह मामला आईएमएस के सर्जरी विभाग में आधुनिक एयरबोर्न बायोलोड कंट्रोल डिवाइस की खरीद से जुड़ा है। आरोप है कि सरकारी खरीद पोर्टल जेम (GeM) के माध्यम से छह मशीनों की खरीद के लिए 21.89 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई थी। इस आधार पर प्रत्येक मशीन की कीमत लगभग 3.64 करोड़ रुपये बैठती है। मशीनों की इस कीमत को लेकर शिकायतकर्ता ने गंभीर सवाल उठाए हैं और खरीद प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
शिकायतकर्ता ने 17 जून को ईमेल के माध्यम से बीएचयू के कुलपति, कुलसचिव, कार्यपरिषद (ईसी) के सदस्यों तथा मुख्य सतर्कता अधिकारी (चीफ विजिलेंस ऑफिसर) को विस्तृत शिकायत भेजी थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि समान श्रेणी की मशीनों की खरीद अन्य प्रमुख सरकारी चिकित्सा संस्थानों में काफी कम कीमत पर की गई है, जबकि आईएमएस-बीएचयू में इन्हीं मशीनों के लिए कई गुना अधिक राशि खर्च की गई। शिकायत मिलने के बाद मामले को गंभीरता से लेते हुए विजिलेंस स्तर पर जांच शुरू की गई।
शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि नई दिल्ली स्थित एम्स में इसी श्रेणी की मशीन लगभग 66 लाख रुपये में खरीदी गई थी, जबकि श्रीनगर मेडिकल कॉलेज में इसकी कीमत करीब 60 लाख रुपये रही। इसके अलावा प्रारंभिक जांच के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि बीएचयू के ही ट्रॉमा सेंटर में इसी प्रकार की मशीन लगभग 53 लाख रुपये में खरीदी गई थी। ऐसे में आईएमएस में प्रति मशीन लगभग 3.64 करोड़ रुपये की लागत को लेकर स्वाभाविक रूप से कई प्रश्न खड़े हो रहे हैं।
इन्हीं तथ्यों की पुष्टि करने के लिए विजिलेंस टीम ने ट्रॉमा सेंटर से भी संबंधित खरीद प्रक्रिया के दस्तावेज तलब किए। अधिकारियों ने तकनीकी विशिष्टताओं, निविदा की शर्तों, अनुमोदन प्रक्रिया तथा मूल्य निर्धारण से जुड़े सभी अभिलेखों का परीक्षण शुरू कर दिया है। जांच एजेंसी यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि अलग-अलग संस्थानों में समान श्रेणी की मशीनों की कीमत में इतना बड़ा अंतर किन कारणों से उत्पन्न हुआ।
सूत्रों के अनुसार, पूछताछ के दौरान विजिलेंस अधिकारियों ने आईएमएस के जिम्मेदार अधिकारियों से कई महत्वपूर्ण सवाल किए। उनसे पूछा गया कि खरीद के समय किन तकनीकी मानकों और आवश्यकताओं को आधार बनाया गया था, निविदा प्रक्रिया किस प्रकार पूरी की गई, वित्तीय स्वीकृति किन स्तरों पर प्रदान की गई तथा मशीनों के मूल्यांकन के लिए कौन-कौन से मानक अपनाए गए। अधिकारियों से यह भी स्पष्टीकरण मांगा गया कि यदि मशीनों की तकनीकी क्षमता में कोई विशेष अंतर था, तो उसका दस्तावेजी प्रमाण क्या है और उसकी लागत इतनी अधिक क्यों निर्धारित की गई।
बताया जा रहा है कि जांच टीम ने शिकायतकर्ता द्वारा उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों की भी प्रामाणिकता का सत्यापन किया। साथ ही खरीद से संबंधित फाइलों, भुगतान रिकॉर्ड, तकनीकी समिति की संस्तुतियों तथा अनुमोदन प्रक्रिया से जुड़े अभिलेखों का मिलान किया गया। जांच का उद्देश्य यह स्पष्ट करना है कि पूरी खरीद प्रक्रिया स्थापित नियमों और सरकारी वित्तीय मानकों के अनुरूप संपन्न हुई या नहीं।
विजिलेंस अधिकारियों का फोकस केवल कीमतों के अंतर तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी खरीद प्रक्रिया की पारदर्शिता, प्रतिस्पर्धी निविदा प्रणाली, तकनीकी मूल्यांकन और प्रशासनिक निर्णयों की भी विस्तृत समीक्षा की जा रही है। यदि जांच में किसी स्तर पर वित्तीय अनियमितता, प्रक्रियागत चूक अथवा नियमों के उल्लंघन के प्रमाण मिलते हैं, तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की संस्तुति की जा सकती है।
फिलहाल विजिलेंस टीम सभी दस्तावेजों और बयानों का परीक्षण कर रही है। जांच पूरी होने के बाद विस्तृत रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को सौंपी जाएगी, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी। इस पूरे घटनाक्रम के बाद बीएचयू और आईएमएस के प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। चिकित्सा और शैक्षणिक जगत की भी इस मामले पर पैनी नजर बनी हुई है, क्योंकि जांच के निष्कर्ष यह तय करेंगे कि करोड़ों रुपये की इस खरीद प्रक्रिया में सब कुछ नियमानुसार हुआ या फिर किसी प्रकार की वित्तीय अथवा प्रशासनिक अनियमितता हुई। फिलहाल सभी की निगाहें विजिलेंस की अंतिम जांच रिपोर्ट और उसके बाद होने वाली संभावित कार्रवाई पर टिकी हैं।

