अवैध निर्माण पर VDA का एक्शन, 62 बीघा में हो रही अवैध प्लाटिंग ध्वस्त कराई, मचा हड़कंप  

WhatsApp Channel Join Now

वाराणसी। विकास प्राधिकरण ने अवैध प्लाटिंग के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए जोन-2 के सारनाथ क्षेत्र में नौ स्थानों पर बुलडोजर चलाया। अभियान के दौरान करीब 62 बीघा क्षेत्रफल में विकसित की जा रही अवैध प्लाटिंग को ध्वस्त कर दिया गया। प्राधिकरण ने लोगों से बिना स्वीकृत ले-आउट वाले प्लॉट न खरीदने की अपील भी की है।

वाराणसी विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष पूर्ण बोरा के निर्देश पर मंगलवार को जोन-2 की प्रवर्तन टीम ने सारनाथ क्षेत्र में अवैध प्लाटिंग के खिलाफ व्यापक अभियान चलाया। इस दौरान नौ अलग-अलग स्थानों पर विकसित की जा रही अवैध कॉलोनियों पर कार्रवाई करते हुए सड़कें, प्लॉटों का सीमांकन और अन्य निर्माण कार्य ध्वस्त कर दिए गए। अभियान के तहत कुल 62 बीघा भूमि पर विकसित की जा रही अवैध प्लाटिंग को हटाया गया।

123

प्राधिकरण के अनुसार मौजा जयरामपुर में रिंकू सिंह द्वारा लगभग सात बीघा, आलोक सिंह द्वारा पांच बीघा, गोलू मिश्रा द्वारा तीन बीघा तथा ऋषभ सिंह द्वारा चार बीघा क्षेत्रफल में अवैध प्लाटिंग विकसित की जा रही थी। वहीं मौजा मगरहुआ (जयरामपुर) में अनिल मिश्रा द्वारा तीन बीघा क्षेत्र में की जा रही प्लाटिंग को भी ध्वस्त किया गया।

इसी क्रम में मौजा जयरापुर में राजेश पटेल द्वारा 12 बीघा क्षेत्र में विकसित की जा रही अवैध प्लाटिंग पर भी बुलडोजर चलाया गया। इसके अलावा मौजा मुनारी में संजय सिंह द्वारा 15 बीघा, मुकेश सिंह द्वारा छह बीघा तथा पम्पी पटेल द्वारा सात बीघा क्षेत्र में विकसित की जा रही अवैध प्लाटिंग को भी ध्वस्त कर दिया गया।

वाराणसी विकास प्राधिकरण ने बताया कि सभी मामलों में उत्तर प्रदेश नगर नियोजन एवं विकास अधिनियम की धारा-27 के तहत 30 जून 2026 को ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई। अभियान के दौरान जोनल अधिकारी रविन्द्र प्रकाश, अवर अभियंता राजू कुमार तथा प्रवर्तन टीम के अन्य अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।

कार्रवाई के बाद प्राधिकरण ने आम नागरिकों के लिए महत्वपूर्ण सलाह भी जारी की है। वीडीए ने कहा है कि किसी भी भूमि या प्लॉट को खरीदने से पहले संबंधित भूखंड का लैंडयूज अवश्य जांच लें और यह सुनिश्चित करें कि वह आवासीय श्रेणी में दर्ज हो। इसके अलावा प्लाटिंग के लिए न्यूनतम नौ मीटर चौड़ा पहुंच मार्ग होना अनिवार्य है।

प्राधिकरण ने स्पष्ट किया कि किसी भी प्रकार की प्लाटिंग अथवा प्लॉटों की बिक्री ले-आउट स्वीकृत होने के बाद ही की जानी चाहिए। ले-आउट स्वीकृति के लिए आवेदन जमा होने के बाद नियमानुसार सात दिनों के भीतर स्वीकृति प्रदान करने का प्रावधान है।

Share this story