काशी में आस्था और श्रद्धा के साथ मनाया गया वट सावित्री व्रत, सुहागिनों ने मांगा अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद
वाराणसी। वट सावित्री व्रत शुक्रवार को श्रद्धा, आस्था और पारंपरिक उल्लास के साथ मनाया गया। धर्मनगरी काशी में सुबह से ही मंदिरों और वट वृक्षों के आसपास सुहागिन महिलाओं की भारी भीड़ देखने को मिली। महिलाएं पारंपरिक परिधानों और श्रृंगार में सज-धजकर पूजा-अर्चना के लिए पहुंचीं और अपने पति की लंबी आयु, परिवार की सुख-समृद्धि तथा अखंड सौभाग्य की कामना की।
पूजा स्थलों पर भक्ति गीतों, मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठानों से वातावरण पूरी तरह भक्तिमय बना रहा। महिलाओं ने विधि-विधान से बरगद के वृक्ष की पूजा की, जल अर्पित किया और सूत का धागा बांधते हुए परिक्रमा की। इस दौरान मंदिर परिसरों और वट वृक्षों के आसपास विशेष धार्मिक उत्साह देखने को मिला।
व्रत करने आई श्रद्धालु ऋतु शर्मा ने बताया कि वट सावित्री व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है। उन्होंने कहा कि महिलाएं यह व्रत अपने पति की लंबी आयु, उत्तम स्वास्थ्य और परिवार की खुशहाली के लिए रखती हैं। बरगद के वृक्ष की पूजा कर महिलाएं अपने परिवार को हर संकट और कठिनाई से सुरक्षित रखने की प्रार्थना करती हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार वट सावित्री व्रत माता सावित्री और सत्यवान की पौराणिक कथा से जुड़ा हुआ है। मान्यता है कि माता सावित्री ने अपने दृढ़ संकल्प, तप और पतिव्रता धर्म के बल पर यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस प्राप्त कर लिए थे। तभी से यह व्रत सुहागिन महिलाओं के बीच विशेष आस्था और विश्वास का प्रतीक बना हुआ है।
धर्माचार्यों के अनुसार वट वृक्ष को हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र माना गया है। मान्यता है कि इस वृक्ष में ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों देवताओं का वास होता है। इसी कारण इसकी पूजा करने से परिवार में सुख, शांति, समृद्धि और वैवाहिक जीवन में स्थिरता बनी रहती है।
काशी के विभिन्न मंदिरों और पूजा स्थलों पर महिलाओं ने सामूहिक रूप से व्रत कथा सुनी और पूजा-अर्चना के बाद परिवार की खुशहाली की कामना की। इस अवसर पर श्रद्धालु महिलाओं ने देशभर की बेटियों, बहनों और माताओं के सुखद वैवाहिक जीवन की मंगलकामना करते हुए सभी को वट सावित्री व्रत की शुभकामनाएं दीं।

