पीएम स्वनिधि से मिला सहारा, अब दुकान बचाने की कवायद, वाराणसी की स्ट्रीट वेंडर ने लगाई न्याय की गुहार
वाराणसी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में एक ओर केंद्र सरकार की पीएम स्वनिधि योजना के माध्यम से रेहड़ी-पटरी व्यवसायियों को आत्मनिर्भर बनाने का अभियान चलाया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर एक स्ट्रीट वेंडर ने स्थानीय प्रशासन की कार्रवाई से अपनी आजीविका संकट में पड़ने का आरोप लगाया है। चितरंजन पार्क गेट के समीप पिछले करीब 40 वर्षों से दुकान लगाने वाली मुन्नी यादव ने अपनी पीड़ा साझा करते हुए प्रशासन से पुनर्वास और प्रधानमंत्री से न्याय की गुहार लगाई है।
मुन्नी यादव के अनुसार, उन्होंने वर्षों की मेहनत से अपनी छोटी-सी दुकान के माध्यम से परिवार का पालन-पोषण किया है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना के तहत उन्हें पहले ₹10,000, फिर ₹20,000 और बाद में ₹50,000 का ऋण मिला। उनका कहना है कि इस आर्थिक सहायता से उन्होंने अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाया और परिवार की जरूरतों को पूरा करने में मदद मिली। उन्होंने यह भी बताया कि अंतिम ऋण राशि उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों प्राप्त हुई थी, जिसे वह अपने जीवन का सम्मानजनक क्षण मानती हैं।
उनका आरोप है कि स्थानीय प्रशासन उन्हें पूर्ववत स्थान पर दुकान लगाने की अनुमति नहीं दे रहा है। उनका कहना है कि अधिकारियों द्वारा उन्हें "ऊपर से आदेश" लाने की बात कही जाती है, जिसके कारण वे असमंजस की स्थिति में हैं। मुन्नी यादव का कहना है कि आज उन्हें कभी इधर तो कभी उधर हटने के लिए कहा जाता है, जिससे उनका व्यवसाय लगभग ठप हो गया है और परिवार की रोजी-रोटी पर संकट गहरा गया है।
उन्होंने भावुक होकर कहा कि यदि सरकार की योजना के तहत ऋण लेकर व्यवसाय बढ़ाने के बाद भी उन्हें काम करने की अनुमति नहीं मिलेगी, तो ऐसे में योजना का उद्देश्य अधूरा रह जाएगा। उनका कहना है कि ऋण की किस्तें चुकाने की जिम्मेदारी भी उन्हीं पर है, लेकिन आय के साधन सीमित होने से यह और कठिन होता जा रहा है।
मुन्नी यादव ने स्ट्रीट वेंडिंग (जीविका संरक्षण एवं सड़क विक्रय विनियमन) अधिनियम, 2014 का उल्लेख करते हुए कहा कि किसी भी रेहड़ी-पटरी व्यवसायी को हटाने से पहले उसके पुनर्वास की व्यवस्था की जानी चाहिए। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि उन्हें किसी सुरक्षित और निर्धारित वेंडिंग जोन या स्थायी स्थान पर दुकान लगाने की अनुमति दी जाए, ताकि वे सम्मानपूर्वक अपनी आजीविका चला सकें।

