वाराणसी के 25 तालाब, 30 कुंड और 100 कुओं का होगा कायाकल्प, ₹58 करोड़ की सीएसआर परियोजना पर हुआ समझौता

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वाराणसी। धार्मिक और सांस्कृतिक नगरी काशी की प्राचीन जल धरोहरों के संरक्षण की दिशा में शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया। पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन लिमिटेड (पीएफसी) ने अपनी कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) योजना के तहत 58 करोड़ रुपये की लागत से वाराणसी के ऐतिहासिक तालाबों, कुंडों और सामुदायिक कुओं के जीर्णोद्धार एवं विकास के लिए एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। रुद्राक्ष अंतरराष्ट्रीय सहयोग एवं सम्मेलन केंद्र में आयोजित कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने इस परियोजना को काशी की सांस्कृतिक विरासत और पर्यावरण संरक्षण के लिए ऐतिहासिक पहल बताया।

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कार्यक्रम में महापौर अशोक तिवारी ने कहा कि काशी की पहचान उसके प्राचीन जल स्रोतों से जुड़ी है। इन तालाबों, कुंडों और कुओं का संरक्षण न केवल पर्यावरणीय दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह शहर की सांस्कृतिक विरासत को भी संरक्षित करेगा। उन्होंने इस पहल के लिए पीएफसी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह परियोजना काशीवासियों और यहां आने वाले देश-विदेश के पर्यटकों के लिए एक महत्वपूर्ण सौगात साबित होगी।

पीएफसी की अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक परमिंदर चोपड़ा ने कहा कि संस्था बुनियादी ढांचे के विकास के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और सामुदायिक कल्याण के लिए भी प्रतिबद्ध है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह परियोजना तय समय सीमा में आधुनिक मानकों के अनुरूप पूरी की जाएगी, जिससे भूजल स्तर में सुधार होगा और स्थानीय पर्यावरण को भी लाभ मिलेगा।

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नगर आयुक्त एवं वाराणसी स्मार्ट सिटी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी हिमांशु नागपाल ने बताया कि परियोजना के तहत जल निकायों के सौंदर्यीकरण के साथ उनके संरक्षण के लिए पर्यावरण अनुकूल तकनीकों का उपयोग किया जाएगा। सामुदायिक कुओं के जीर्णोद्धार से स्थानीय लोगों को स्वच्छ जल उपलब्ध कराने की दिशा में भी कार्य किया जाएगा।

परियोजना के अंतर्गत सारनाथ सहित 25 तालाबों की डिसिल्टिंग एवं पर्यावरणीय पुनर्विकास, 30 ऐतिहासिक कुंडों के जीर्णोद्धार तथा 100 सामुदायिक कुओं की सफाई, मरम्मत और जल शोधन का कार्य किया जाएगा। कार्यक्रम के अंत में एमओयू की प्रतियों का आदान-प्रदान किया गया। इस परियोजना को काशी की प्राचीन विरासत के संरक्षण और सतत विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

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