वाराणसी : अरणी मंथन से प्रकट हुई यज्ञाग्नि, सहस्र चंडी महायज्ञ में लोककल्याण की कामना से दी गईं आहुतियां, वैदिक मंत्रोच्चार से गूंजा यज्ञ परिसर
वाराणसी। पंचकोशी मार्ग स्थित आदि शंकराचार्य महासंस्थानम में चल रहे सहस्र चंडी महायज्ञ के दूसरे दिन मंगलवार को वैदिक परंपरा के अनुसार यज्ञीय अनुष्ठान का शुभारंभ हुआ। प्रातःकाल वैदिक आचार्यों के मंत्रोच्चार के बीच अरणी मंथन से यज्ञाग्नि प्रकट की गई। इसके बाद विधिवत यज्ञाग्नि की स्थापना कर विभिन्न वेदियों का पूजन, हवन और पाठ शुरू हुआ। जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती महाराज के मार्गदर्शन में आयोजित इस महायज्ञ में नेपाल समेत भारतवासियों की सुरक्षा, सुख-शांति और समृद्धि की कामना से विशेष आहुतियां दी गईं।

अरणी मंथन की प्राचीन वैदिक परंपरा के तहत अग्नि प्रकट करने की प्रक्रिया संपन्न हुई। इसके बाद अग्नि को यज्ञाग्नि के रूप में स्थापित कर वेदियों का पूजन किया गया। हवन के दौरान वैदिक मंत्रों और ‘स्वाहा’ के उच्चारण से पूरा परिसर भक्तिमय हो उठा। बड़ी संख्या में श्रद्धालु, संत-महात्मा और वैदिक विद्वान अनुष्ठान में शामिल हुए।

लोकमंगल का माध्यम है यज्ञ
जगद्गुरु शंकराचार्य नरेंद्रानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि सनातन परंपरा में यज्ञ केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लोककल्याण और विश्व मंगल की कामना का माध्यम है। यज्ञ में मंत्रोच्चार के साथ दी जाने वाली आहुतियां जनकल्याण, राष्ट्र की सुरक्षा और समस्त प्राणियों के मंगल की भावना को समर्पित होती हैं।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में प्राकृतिक और दैवीय आपदाओं के कारण कई क्षेत्रों में जनजीवन प्रभावित है। ऐसे समय में सनातन परंपरा के अनुसार ईश्वर से सभी के कल्याण और सुरक्षा की प्रार्थना करना आवश्यक है। इसी उद्देश्य से महायज्ञ में नेपाल सहित समस्त भारतीयों की सुरक्षा, सुख-शांति और समृद्धि के लिए विशेष आहुतियां दी गईं। शंकराचार्य ने श्रद्धालुओं से वैदिक परंपराओं को आगे बढ़ाने और समाज एवं राष्ट्र के कल्याण की भावना से धार्मिक अनुष्ठानों में सहभागी बनने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि लोकमंगल की भावना से किए जाने वाले धार्मिक अनुष्ठानों की सार्थकता और बढ़ जाती है।

महायज्ञ में राष्ट्र की उन्नति, सामाजिक समरसता, प्राकृतिक आपदाओं से रक्षा और विश्व कल्याण की कामना से भी आहुतियां दी गईं। अरणी मंथन का कार्य डॉ. विनय मिश्रा ने सपत्नीक किया। यज्ञाचार्य सच्चिदानंद तिवारी और तेजमणि तिवारी की देखरेख में अनुष्ठान संपन्न कराया जा रहा है। आगामी दिनों में भी विभिन्न वैदिक पूजन, हवन और पाठ का क्रम जारी रहेगा।

