वाराणसी टूरिज्म एसोसिएशन ने बढ़ाया टैक्सी का किराया, वन टाइम टैक्स के नियम पर जताया विरोध 

WhatsApp Channel Join Now

वाराणसी। लगातार बढ़ती महंगाई और ईंधन की कीमतों ने टैक्सी उद्योग की कमर तोड़ दी है। डीजल, पेट्रोल और सीएनजी के लगातार महंगे होने से टैक्सी संचालकों के सामने आर्थिक संकट गहराता जा रहा है। वर्षों से पुराने किराये पर गाड़ियां चलाने को मजबूर संचालकों ने आखिरकार किराया बढ़ाने का निर्णय लिया है। इसी मुद्दे को लेकर वाराणसी टूरिज्म एसोसिएशन की ओर से शुक्रवार को एक होटल में प्रेस वार्ता और बैठक आयोजित की गई, जिसमें बड़ी संख्या में टैक्सी संचालकों और संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

बैठक को संबोधित करते हुए एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रणय रंजन सिंह ने कहा कि वर्ष 2018 के बाद पहली बार टैक्सी किरायों में वृद्धि की जा रही है। उन्होंने बताया कि पिछले आठ वर्षों में वाहन संचालन की लागत कई गुना बढ़ चुकी है। ईंधन, वाहन मेंटेनेंस, बीमा और अन्य खर्चों में लगातार इजाफा हुआ है, लेकिन टैक्सी संचालक पुराने रेट पर ही सेवाएं देने को मजबूर थे। इससे पूरे उद्योग की आर्थिक स्थिति बेहद खराब हो गई है और कई संचालक कर्ज के बोझ तले दब गए हैं।

एसोसिएशन द्वारा लिए गए फैसले के अनुसार अब तत्काल प्रभाव से सभी टैक्सी किरायों में प्रति किलोमीटर दो रुपये की वृद्धि लागू कर दी गई है। नई दरों के तहत डिज़ायर टैक्सी का किराया 13 रुपये प्रति किलोमीटर, एर्टिगा 16 रुपये, क्रिस्टा 20 रुपये, टेम्पो ट्रैवलर 30 रुपये तथा अर्बनिया 35 रुपये प्रति किलोमीटर तय किया गया है। हालांकि न्यूनतम रनिंग किलोमीटर में कोई बदलाव नहीं किया गया है। लोकल यात्रा के लिए पहले की तरह 200 किलोमीटर और आउटस्टेशन यात्रा के लिए 250 किलोमीटर प्रतिदिन की बिलिंग व्यवस्था लागू रहेगी।

प्रणय रंजन सिंह ने कहा कि टैक्सी संचालकों ने लंबे समय तक बढ़ती लागत का बोझ खुद उठाया, लेकिन अब हालात ऐसे हो चुके हैं कि किराया वृद्धि के बिना उद्योग को बचाना संभव नहीं है। उन्होंने सरकार से टैक्सी उद्योग की समस्याओं को गंभीरता से लेने की मांग की और कहा कि यदि समय रहते समाधान नहीं निकाला गया तो हजारों परिवारों की आजीविका पर संकट गहरा सकता है।

बैठक में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा टैक्सी वाहनों पर लागू किए गए वन टाइम टैक्स का भी जोरदार विरोध किया गया। संचालकों का कहना था कि नई और पुरानी सभी टैक्सी गाड़ियों पर एक साथ 15 वर्षों का रोड टैक्स जमा करने का आदेश पूरी तरह अव्यवहारिक है। तीन से चार साल पुरानी गाड़ियों पर भी एक से दो लाख रुपये तक का टैक्स तत्काल जमा करने की बाध्यता बना दी गई है, जिससे वाहन मालिकों की आर्थिक स्थिति चरमरा गई है।

टैक्सी संचालकों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने इस नीति को वापस नहीं लिया और उद्योग की समस्याओं का समाधान नहीं किया, तो प्रदेशव्यापी आंदोलन शुरू किया जाएगा। बैठक में राम पांडेय, रौनक शर्मा, गौरव रुपानी, अरुण सिंह, सतीश सिंह, शानू राय, प्रकाश सिंह, बच्चा सिंह और राका यादव समेत बड़ी संख्या में टैक्सी संचालक मौजूद रहे।

Share this story