वाराणसी : नमक सत्याग्रह की थीम पर होगा सोनिया पोखरा का कायाकल्प, जीर्णोद्धार कार्य शुरू

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वाराणसी। शहर की ऐतिहासिक धरोहरों को संरक्षित करने की दिशा में नगर निगम ने एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए सोनिया पोखरा के जीर्णोद्धार एवं सौंदर्यीकरण कार्य की औपचारिक शुरुआत कर दी है। महापौर अशोक कुमार तिवारी ने भूमि पूजन एवं नारियल फोड़कर परियोजना का शुभारंभ किया। लंबे समय से लंबित इस कार्य के शुरू होने से क्षेत्रवासियों में खुशी का माहौल है।

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महापौर ने कहा कि सोनिया पोखरा केवल एक प्राचीन जलाशय नहीं, बल्कि काशी की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान यह क्षेत्र कई ऐतिहासिक घटनाओं का साक्षी रहा है। इसी विरासत को सहेजने के उद्देश्य से पोखरे का विकास नमक सत्याग्रह आंदोलन की थीम पर किया जाएगा। उन्होंने विश्वास जताया कि पुनर्विकास के बाद यह स्थल शहर के प्रमुख पर्यटन और सांस्कृतिक आकर्षणों में शामिल होगा।

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उन्होंने बताया कि परियोजना के तहत पोखरे का सौंदर्यीकरण आधुनिक सुविधाओं के साथ किया जाएगा, ताकि इसकी ऐतिहासिक पहचान भी बनी रहे और लोगों को बेहतर सार्वजनिक स्थल भी उपलब्ध हो सके। इसके साथ ही घोषणा की गई कि सोनिया पोखरा का नामकरण काशी के प्रथम सांसद एवं स्वतंत्रता सेनानी बाबू रघुनाथ सिंह के नाम पर किया जाएगा। परिसर में उनकी भव्य प्रतिमा भी स्थापित की जाएगी, जिससे नई पीढ़ी उनके योगदान और स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास से परिचित हो सके।

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महापौर ने बताया कि लगभग दो वर्ष पहले नगर निगम ने इस परियोजना की योजना बनाई थी, लेकिन कुछ गलतफहमियों के कारण पूर्व सांसद के परिवार और नगर निगम के बीच विवाद उत्पन्न हो गया था। मामला न्यायालय तक पहुंचने से कार्य शुरू नहीं हो सका। अब आपसी सहमति से सभी विवाद समाप्त हो चुके हैं और परियोजना का मार्ग पूरी तरह प्रशस्त हो गया है। उन्होंने बाबू रघुनाथ सिंह के परिवार के सदस्य संतोष सिंह का सहयोग के लिए आभार भी व्यक्त किया।

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इस दौरान महापौर ने वरुणा कॉरिडोर को लेकर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पूर्ववर्ती सरकार के समय शुरू की गई परियोजना अपेक्षित परिणाम नहीं दे सकी। वर्तमान सरकार वरुणा नदी के संरक्षण और पुनर्जीवन के लिए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) सहित कई विकास योजनाओं पर तेजी से काम कर रही है।

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महापौर ने कहा कि काशी की पहचान उसके प्राचीन तालाबों, पोखरों और कुओं से रही है। नगर निगम शहर के सभी ऐतिहासिक जलस्रोतों को चिन्हित कर उनके संरक्षण और पुनर्जीवन के लिए अभियान चला रहा है। उनका कहना था कि इन प्रयासों से न केवल शहर की सांस्कृतिक और पर्यावरणीय विरासत सुरक्षित होगी, बल्कि पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा और आने वाली पीढ़ियां अपनी ऐतिहासिक धरोहरों से जुड़ सकेंगी।

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