वाराणसी : चिंतामणि गणेश दरबार में सजी सुरों की महफिल, छह विभूतियां सम्मानित

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शहनाई, ध्रुपद, कथक और शास्त्रीय गायन से गूंजा केदारघाट, गणेश नवरात्र पर हुआ वार्षिक श्रृंगार एवं संगीत समारोह

वाराणसी। केदारघाट रोड स्थित श्री चिंतामणि गणेश मंदिर में गणेश नवरात्र के अवसर पर शुक्रवार को वार्षिक श्रृंगार एवं संगीत समारोह श्रद्धा और भक्ति के बीच संपन्न हुआ। भगवान श्री चिंतामणि गणेश के विशेष पूजन-अर्चन और आकर्षक श्रृंगार के बाद आयोजित सारस्वत समारोह में शास्त्रीय संगीत और नृत्य की विविध प्रस्तुतियों ने काशी की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा को जीवंत कर दिया। शहनाई, ध्रुपद, भजन, कथक, सितार और कर्नाटक शास्त्रीय गायन की प्रस्तुतियों ने देर शाम तक श्रोताओं को बांधे रखा।

आयोजन अनंत श्री विभूषित जगद्गुरु शंकराचार्य शृंगेरी शारदापीठाधीश्वर 1008 श्री भारती तीर्थ जी महाराज और उनके उत्तराधिकारी शिष्य अनंत श्री विभूषित जगद्गुरु शंकराचार्य श्री विधुशेखर भारती जी के शुभाशीर्वाद से हुआ। समारोह में बड़ी संख्या में श्रद्धालु, गणेश भक्त और संगीत प्रेमी मौजूद रहे।

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छह विभूतियों को किया गया सम्मानित
समारोह में विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाली छह विभूतियों को सम्मानित किया गया। इनमें संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बिहारीलाल शर्मा, पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल, प्रसिद्ध तबला वादक पं. भोलानाथ मिश्रा, होम्योपैथ चिकित्सक डॉ. अमिताभ वट व्याल, समाजसेवी एवं पुस्तक लेखक रामानंद तिवारी तथा प्रसिद्ध मुक्केबाजी चैंपियन एवं राष्ट्रीय प्रशिक्षक शशि कुमार सिंह शामिल रहे।

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शहनाई से शुरू हुआ सांस्कृतिक कार्यक्रम
सांस्कृतिक संध्या का शुभारंभ मोहन लाल एवं दल के शहनाई वादन से हुआ। इसके बाद पूनम वर्मा ने शास्त्रीय गायन की प्रस्तुति दी। निनाद झा और आदित्य दीप ने पखावज वादन एवं ध्रुपद गायन से वातावरण को सुरमय बनाया। डॉ. अर्चना महाष्कर के भजन गायन ने भक्तिमय माहौल को और गहरा कर दिया। 

अर्पिता अग्रहरि और विशाल सिंह ने कथक युगलबंदी प्रस्तुत की। भागीरथ जालान ने शास्त्रीय गायन किया। श्रेयषी मिश्रा, माण्डवी मिश्रा एवं दल ने कथक नृत्य की प्रस्तुति दी। अदिति चटर्जी और शिल्पा राय ने भी कथक नृत्य से दर्शकों की तालियां बटोरीं। अमित मिश्रा ने सितार वादन और वेमुरी वेंकट विश्वनाथ ने कर्नाटक शास्त्रीय गायन प्रस्तुत किया।

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संगीत प्रस्तुतियों में तबले पर कुबेरनाथ मिश्र, श्रीकान्त मिश्र, सिद्धार्थ मिश्र, शिवम मिश्र और ललित, हारमोनियम पर हर्षित, अश्विनी मिश्रा, मोहित सहानी और शक्ति मिश्रा, सारंगी पर ओम सहाय तथा मृदंग पर बी. सत्यवर प्रसाद ने संगत की। 

आयोजकों ने कहा कि श्री चिंतामणि गणेश प्रथम पूज्य देवता हैं। उनकी आराधना और आशीर्वाद के साथ कला-साधना को जोड़ना इस आयोजन की विशिष्ट परंपरा है। समारोह के निवेदक प्रसिद्ध हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. गौतम चक्रवर्ती और मंदिर के महंत चल्ला सुब्बाराव शास्त्री रहे।

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