वाराणसी : खाद संकट पर सपा का अनोखा विरोध, अर्धनग्न होकर थाने पहुंचे नेता, कालाबाजारी के खिलाफ कार्रवाई की मांग

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वाराणसी। धान की बुआई के अहम दौर में खाद की कमी को लेकर किसानों की बढ़ती परेशानी अब विरोध प्रदर्शन में बदलने लगी है। शनिवार को समाजवादी पार्टी के नेता हरीश मिश्रा ने किसानों की समस्याओं को लेकर अनोखे अंदाज में प्रदर्शन किया। वह धोती, जनेऊ और अर्धनग्न अवस्था में सिगरा थाने पहुंचे तथा सहकारी समितियों और खाद वितरण व्यवस्था के खिलाफ तहरीर देकर कार्रवाई की मांग की।

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प्रदर्शन के दौरान हरीश मिश्रा ने आरोप लगाया कि जिले के कई क्षेत्रों में किसानों को समय पर डीएपी, यूरिया और पोटाश उपलब्ध नहीं हो रही है। उन्होंने कहा कि धान की बुआई के समय खाद की सबसे अधिक आवश्यकता होती है, लेकिन सहकारी समितियों पर या तो ताले लटके हैं या फिर किसानों को खाद नहीं मिल रही है। उनका आरोप था कि खाद की कृत्रिम कमी पैदा कर कालाबाजारी और अवैध तस्करी को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे किसान भारी परेशानियों का सामना कर रहे हैं।

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सपा नेता ने कहा कि उनका अर्धनग्न होकर थाने पहुंचना किसानों की बदहाल स्थिति का प्रतीक है। उन्होंने कहा, "जब किसान भूखा और नंगा होने की स्थिति में पहुंच गया है तो उसके दर्द को दिखाने के लिए हमने भी इसी रूप में विरोध दर्ज कराया है।" इसी मुद्दे को लेकर चोलापुर क्षेत्र के चोचकपुर समेत आसपास के किसानों, किसान नेताओं और महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ छात्रसंघ के पूर्व पदाधिकारियों ने जिलाधिकारी, पुलिस कमिश्नर और चोलापुर थाना प्रभारी को भी ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में खाद वितरण व्यवस्था की निष्पक्ष जांच कराने, कालाबाजारी और तस्करी में शामिल लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज करने तथा किसानों को पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध कराने की मांग की गई।

किसानों का कहना है कि सरकारी केंद्रों पर खाद उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्हें निजी दुकानों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं, जहां अधिक कीमत वसूले जाने की शिकायतें मिल रही हैं। यदि समय रहते खाद की उपलब्धता सुनिश्चित नहीं की गई तो धान की खेती प्रभावित हो सकती है। इस दौरान सपा नेता हरीश मिश्रा, पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष संदीप यादव, पूर्व महामंत्री अनिल यादव सहित बड़ी संख्या में किसान और स्थानीय लोग मौजूद रहे। किसानों ने चेतावनी दी कि यदि खाद संकट और कालाबाजारी पर शीघ्र प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो व्यापक जन आंदोलन शुरू किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

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