वाराणसी : साइबर ठगी पर पुलिस का बड़ा प्रहार, 6 म्यूल अकाउंटधारकों पर मुकदमा, 5 खातों पर कार्रवाई, 2.42 करोड़ होल्ड कराए

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वाराणसी। साइबर अपराध पर प्रभावी अंकुश लगाने के उद्देश्य से पुलिस कमिश्नरेट द्वारा चलाए जा रहे विशेष अभियान "ऑपरेशन म्यूल स्ट्राइक" के तहत बड़ी कार्रवाई की गई है। साइबर क्राइम सेल और विभिन्न थाना साइबर सेल की संयुक्त टीम ने साइबर ठगी में इस्तेमाल किए जा रहे म्यूल बैंक खातों के खिलाफ अभियान चलाते हुए 6 म्यूल अकाउंट धारकों पर 4 मुकदमे दर्ज किए हैं। 5 खातों पर कार्रवाई की गई। वहीं 2.42 करोड़ होल्ड कराए। 

 

इस संबंध में डीसीपी गोमती जोन/क्राइम नीतू कादयान तथा एसीपी सारनाथ/साइबर ने पुलिस लाइन स्थित नवीन सभागार में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल के निर्देशन में चल रहे इस अभियान का उद्देश्य साइबर अपराधों में प्रयुक्त बैंक खातों की पहचान कर उनके संचालकों के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई करना है।

 

अधिकारियों के अनुसार, साइबर क्राइम सेल तथा थाना साइबर सेल सिगरा, भेलूपुर, चेतगंज और चौलापुर की संयुक्त जांच के दौरान ऐसे कई बैंक खातों का पता चला, जिनका उपयोग साइबर ठगी से प्राप्त धनराशि के लेन-देन में किया जा रहा था। जांच के आधार पर 6 आरोपियों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए गए और 5 संदिग्ध म्यूल खातों पर कार्रवाई की गई।

पुलिस ने बताया कि इन खातों के संबंध में राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCCRP) पर कुल 51 शिकायतें दर्ज हैं। जांच के दौरान इन खातों से जुड़े लगभग 2.42 करोड़ रुपये की संदिग्ध धनराशि को होल्ड कराया गया है। पुलिस का कहना है कि साइबर अपराधियों के नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए अभियान आगे भी जारी रहेगा।


इनके खिलाफ मुकदमे
भेलूपुर थाना के बजरडीहा निवासी मोहम्मद उनैश, रोहनिया थाना के घमहापुर हरदत्तपुर निवासी अजीत कुमार पटेल, नक्खीघाट जैतपुरा निवासी आरिफ जमाल, चोलापुर थाना के दशवतपुर निवासी आशीष कुमार गौड़, सत्यम यादव और शुभम सिंह शामिल रहे। 

क्या होता है म्यूल अकाउंट
म्यूल अकाउंट का उपयोग साइबर अपराधी अवैध रूप से धनराशि को एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थानांतरित करने, छिपाने अथवा निकालने के लिए करते हं। ऐसे खाते स्वयं खाताधारक द्वारा जानबूझकर उपलब्ध कराए जा सकते हैं अथवा फिर लालच, कमीशन, नौकरी के झांसे या धोखे से साइबर अपराधियों के नियंत्रण में आ जाते हैं। 

साइबर अपराधी कैसे करते हैं इस्तेमाल
साइबर अपराधी म्यूल अकाउंट का प्रयोग ऑनलाइन ठगी, निवेश धोखाधड़ी, डिजिटल अरेस्ट, फर्जी कस्टमर केयर, लॉटरी, पार्ट टाइम जॉब आदि के माध्यम से पीड़ितों से धनराशि प्राप्त करते हैं। प्राप्त धनराशि को अपने खाते में न मंगाकर विभिन्न व्यक्तियों के बैंक खातों में ट्रांसफर करवाते हैं। धनराशि एक म्यूल अकाउंट से दूसरे म्यूल अकाउंट में स्थानांतरित होती है। इससे जांच एजेंसियों को धन के वास्तविक लेन-देन तक पहुंचना कठिन हो जाता है। अंत में पैसे को नकद निकासी, एटीएम, यूपीआई, क्रिप्टोकरेंसी, गिफ्ट कार्ड आदि के माध्यम से निकाल लिया जाता है।

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