साइबर अपराध पर वाराणसी पुलिस का बड़ा प्रहार, 58 गैंग का पर्दाफाश, 277 आरोपी गिरफ्तार
एक वर्ष में 16,982 NCRP शिकायतों का निस्तारण, 25 करोड़ रुपये की रकम होल्ड और 4.5 करोड़ रुपये पीड़ितों को वापस, पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल ने साइबर थाना व सेल का किया निरीक्षण
15 अवैध कॉल सेंटरों पर कार्रवाई, 175 आरोपी गिरफ्तार, डिजिटल अरेस्ट के पांच मामलों में 36 साइबर अपराधी जेल भेजे गए, 10,176 मोबाइल नंबर और 8,262 डिवाइस के IMEI कराए गए ब्लॉक
21 आरोपियों पर गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई, साइबर अपराधियों के चंगुल से 550 लोगों का रेस्क्यू
17 चार पहिया वाहन बरामद, 25 हजार से अधिक लोगों को साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक किया
पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल ने साइबर थाना और साइबर सेल की कार्यप्रणाली की समीक्षा की, शिकायतकर्ताओं की मदद के लिए डेडिकेटेड हेल्प डेस्क स्थापित करने के निर्देश
वाराणसी। साइबर अपराध और संगठित ऑनलाइन ठगी के खिलाफ कमिश्नरेट वाराणसी पुलिस ने बीते एक वर्ष के दौरान व्यापक अभियान चलाते हुए बड़ी कार्रवाई की है। साइबर क्राइम पुलिस ने इस अवधि में 58 साइबर गैंग का पर्दाफाश कर उनके सरगनाओं समेत 277 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया है। वहीं राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) पर दर्ज 16,982 शिकायतों का निस्तारण करते हुए करीब 25 करोड़ रुपये की संदिग्ध ठगी की धनराशि को होल्ड कराया गया। आवश्यक विधिक प्रक्रिया पूरी कर 4.5 करोड़ रुपये की रकम साइबर ठगी के पीड़ितों के बैंक खातों में वापस कराई गई।
रविवार को पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल ने साइबर थाना और साइबर सेल का निरीक्षण कर साइबर अपराध संबंधी शिकायतों, जांच और निस्तारण की कार्यप्रणाली की समीक्षा की। उन्होंने विभिन्न साइबर पोर्टलों का स्वयं अवलोकन किया और कंप्लेंट रजिस्टर में दर्ज शिकायतों, लंबित मामलों तथा उनके निस्तारण की प्रगति की जानकारी ली। पुलिस आयुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि साइबर अपराध की शिकायतों पर त्वरित, पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने पीड़ितों और शिकायतकर्ताओं की सुविधा के लिए साइबर थाना एवं साइबर सेल में समर्पित शिकायत सहायता कक्ष (डेडिकेटेड हेल्प डेस्क) स्थापित करने के निर्देश भी दिए।

पीड़ितों को शिकायत दर्ज कराने में मिलेगी मदद
पुलिस आयुक्त ने कहा कि साइबर ठगी का शिकार होने वाले लोगों को शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया में किसी प्रकार की परेशानी नहीं होनी चाहिए। डेडिकेटेड हेल्प डेस्क पर पुलिसकर्मियों की तैनाती की जाएगी, जो शिकायतकर्ताओं को शिकायत दर्ज कराने, जरूरी दस्तावेजों और उपलब्ध विधिक एवं तकनीकी सहायता के संबंध में मार्गदर्शन देंगे।
इस व्यवस्था का उद्देश्य साइबर अपराध के पीड़ितों को तत्काल सहायता उपलब्ध कराना और शिकायत दर्ज होने के बाद उस पर तेजी से कार्रवाई सुनिश्चित करना है। साइबर अपराध में शुरुआती समय को महत्वपूर्ण मानते हुए पुलिस ने शिकायतों के त्वरित निस्तारण पर विशेष जोर दिया है।
58 साइबर गैंग का पर्दाफाश, 277 आरोपी गिरफ्तार
पुलिस उपायुक्त अपराध नीतू कादयान के नेतृत्व में साइबर क्राइम पुलिस ने बीते एक वर्ष में साइबर अपराध से जुड़े 58 गैंग का पर्दाफाश किया। इन गैंगों के सरगनाओं समेत कुल 277 आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ संबंधित धाराओं में कार्रवाई की गई और उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में भेजा गया। इस अभियान की निगरानी अपर पुलिस उपायुक्त अपराध नृपेंद्र ने की।

साइबर अपराध के मामलों में तकनीकी विश्लेषण, डिजिटल साक्ष्यों और सूचना संकलन के आधार पर कार्रवाई की गई। सहायक पुलिस आयुक्त साइबर क्राइम विदुष सक्सेना, विनय द्विवेदी और अपूर्व पांडेय के मार्गदर्शन में साइबर थाना प्रभारी उदयवीर सिंह और साइबर सेल प्रभारी मनोज तिवारी के नेतृत्व में टीमों ने विभिन्न मामलों में कार्रवाई की। पुलिस के अनुसार, संगठित साइबर अपराध नेटवर्क को चिह्नित कर उनके खिलाफ कार्रवाई के साथ ठगी में प्रयुक्त संसाधनों पर भी प्रभावी प्रहार किया गया।
डिजिटल अरेस्ट के मामलों में 36 अपराधी पहुंचे जेल
साइबर ठगी के बढ़ते मामलों में डिजिटल अरेस्ट के नाम पर लोगों को डराकर धनराशि ऐंठने वाले गिरोहों के खिलाफ भी पुलिस ने कार्रवाई की। पिछले एक वर्ष में डिजिटल अरेस्ट से जुड़े पांच अभियोगों में कुल 36 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया।
पुलिस के अनुसार, इन मामलों में आरोपियों के कब्जे से करीब 1.20 करोड़ रुपये की धनराशि, मोबाइल फोन, चार पहिया वाहन तथा अन्य महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल उपकरण बरामद किए गए। पुलिस ने ऐसे मामलों में तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर नेटवर्क तक पहुंचकर आरोपियों की गिरफ्तारी की।

15 अवैध कॉल सेंटरों का भंडाफोड़
वाराणसी साइबर क्राइम पुलिस ने बीते एक वर्ष में 15 अवैध रूप से संचालित कॉल सेंटरों का पर्दाफाश किया। इन संगठित नेटवर्कों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए 175 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। जांच में सामने आया कि कुछ आरोपी निवेश के नाम पर अवैध कॉल सेंटर संचालित कर लोगों को अत्यधिक लाभ का प्रलोभन देते थे। इसके अलावा विदेशी नागरिकों को कथित तौर पर ई-कॉमर्स सेवाएं उपलब्ध कराने के नाम पर स्वयं को विदेशी अधिकारी बताकर डराने और भ्रमित करने के मामले भी सामने आए।
पुलिस ने नौकरी दिलाने के नाम पर रजिस्ट्रेशन फीस, जीएसटी फीस और अन्य शुल्क के नाम पर अग्रिम धनराशि वसूलकर ठगी करने वाले नेटवर्क के विरुद्ध भी कार्रवाई की है। ऐसे मामलों में आमजन को आकर्षक नौकरी और कम समय में अधिक कमाई जैसे प्रलोभनों से सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
16,982 शिकायतों का निस्तारण, 25 करोड़ रुपये होल्ड
साइबर अपराध के पीड़ितों को राहत देने के लिए एनसीआरपी पर दर्ज शिकायतों के निस्तारण को भी प्राथमिकता दी गई। पुलिस के अनुसार, पिछले एक वर्ष में 16,982 एनसीआरपी शिकायतों का सफलतापूर्वक निस्तारण किया गया।
त्वरित कार्रवाई के जरिए करीब 25 करोड़ रुपये की धनराशि होल्ड कराई गई, ताकि ठगी की रकम साइबर अपराधियों तक पहुंचने से रोकी जा सके। इसके बाद नियमानुसार आवश्यक विधिक कार्रवाई पूरी करते हुए करीब 4.5 करोड़ रुपये पीड़ितों के बैंक खातों में वापस कराए गए।
पुलिस का कहना है कि ऑनलाइन वित्तीय ठगी की स्थिति में समय सबसे महत्वपूर्ण होता है। जितनी जल्दी पीड़ित शिकायत दर्ज कराता है, उतनी ही अधिक संभावना धनराशि को होल्ड कराने और उसकी रिकवरी की होती है।
10 हजार से अधिक मोबाइल नंबर और 8 हजार से ज्यादा डिवाइस ब्लॉक
साइबर अपराधियों के तकनीकी संसाधनों पर भी कार्रवाई की गई। पुलिस ने अपराध में प्रयुक्त 10,176 मोबाइल नंबरों को ब्लॉक कराया। इनके साथ जुड़े 8,262 मोबाइल डिवाइसों के IMEI नंबर भी ब्लॉक कराए गए।
इस कार्रवाई का उद्देश्य इन मोबाइल नंबरों और उपकरणों के दोबारा साइबर अपराध में इस्तेमाल की संभावना को रोकना है। पुलिस के अनुसार, तकनीकी संसाधनों को निष्क्रिय करना साइबर अपराध नेटवर्क की गतिविधियों को सीमित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
21 आरोपियों पर गैंगस्टर एक्ट
संगठित साइबर अपराध से जुड़े आरोपियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई करते हुए 21 अभियुक्तों पर गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की गई। पुलिस का कहना है कि इस कार्रवाई का उद्देश्य संगठित साइबर अपराध में शामिल लोगों के नेटवर्क पर प्रभावी अंकुश लगाना और उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करना है।
साइबर अपराध को केवल व्यक्तिगत ठगी तक सीमित न मानते हुए पुलिस संगठित गिरोहों, उनके सरगनाओं और उनके तकनीकी एवं आर्थिक नेटवर्क तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।
550 लोगों को साइबर अपराधियों के चंगुल से कराया मुक्त
पुलिस ने विभिन्न प्रलोभनों और झांसे के माध्यम से लोगों को कथित रूप से मल्टीलेवल मार्केटिंग और अन्य साइबर अपराध गतिविधियों से जोड़ने वाले मामलों में भी कार्रवाई की। बीते एक वर्ष में कुल 550 व्यक्तियों को ऐसे नेटवर्कों के चंगुल से मुक्त कराकर रेस्क्यू किया गया।
आवश्यकतानुसार संबंधित व्यक्तियों के परिजनों और अन्य अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित कर सुरक्षित सुपुर्दगी और पुनर्वास की कार्रवाई की गई। इसके अलावा साइबर अपराध की गतिविधियों में इस्तेमाल किए गए 17 चार पहिया वाहन भी बरामद किए गए।
25 हजार से अधिक लोगों को किया गया जागरूक
कार्रवाई के साथ साइबर अपराध की रोकथाम के लिए जन-जागरूकता अभियान भी चलाया गया। साइबर क्राइम पुलिस ने विद्यालयों, शिक्षण संस्थानों, कैंपों, सार्वजनिक स्थलों और प्रमुख चौराहों पर जाकर 25 हजार से अधिक लोगों को साइबर अपराध के विभिन्न तरीकों और बचाव के उपायों की जानकारी दी।
लोगों को संदिग्ध लिंक, फर्जी कॉल, नौकरी और निवेश के नाम पर होने वाली ठगी, अविश्वसनीय ऐप और अन्य ऑनलाइन धोखाधड़ी से सतर्क रहने के लिए जागरूक किया गया। इस दौरान साइबर सुरक्षा संबंधी पंपलेट और पुस्तिकाएं भी वितरित की गईं।
पुलिस आयुक्त ने दी सतर्क रहने की सलाह
पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल ने आमजन से बैंक खाते से संबंधित गोपनीय जानकारी, जैसे एटीएम या डेबिट कार्ड का विवरण, पिन, सीवीवी, ओटीपी, इंटरनेट बैंकिंग यूजर आईडी और पासवर्ड किसी के साथ साझा न करने की अपील की। उन्होंने बैंक खाता, पासबुक, चेकबुक, एटीएम कार्ड अथवा सिम कार्ड किसी अन्य व्यक्ति को उपयोग के लिए न देने की सलाह भी दी।
उन्होंने बिना परीक्षा नौकरी, घर बैठे मोटी कमाई, आसान रोजगार और कम समय में अधिक आय जैसे भ्रामक विज्ञापनों से सावधान रहने को कहा। नौकरी के नाम पर जॉइनिंग, रजिस्ट्रेशन, सिक्योरिटी या अन्य किसी शुल्क के रूप में अग्रिम धनराशि मांगे जाने पर सतर्कता बरतने की अपील की गई।
पुलिस आयुक्त ने मल्टीलेवल मार्केटिंग और पिरामिड आधारित योजनाओं में निवेश से पहले संबंधित कंपनी या संस्था की वैधता और पंजीकरण की जांच करने की सलाह दी। अज्ञात या संदिग्ध लिंक पर क्लिक नहीं करने तथा अनजान स्रोत से भेजी गई संदिग्ध फाइल या एप डाउनलोड करने से बचने को कहा गया। ऑनलाइन सट्टेबाजी, जुआ और त्वरित लाभ का लालच देने वाले संदिग्ध प्लेटफॉर्म से दूर रहने की अपील भी की गई।
ठगी होते ही तुरंत 1930 पर करें कॉल
पुलिस ने आमजन से अपील की है कि किसी भी प्रकार की ऑनलाइन वित्तीय ठगी होने पर बिना देरी के राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करें और राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं। समय पर शिकायत दर्ज होने से संदिग्ध लेनदेन को रोकने और धनराशि की रिकवरी की संभावना बढ़ जाती है।
पुलिस आयुक्त ने लोगों से सतर्क और जागरूक रहने के साथ दूसरों को भी साइबर अपराध से बचाव के प्रति जागरूक करने की अपील की है। पुलिस का कहना है कि साइबर अपराध के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई के साथ आमजन की सतर्कता भी ठगी रोकने का सबसे महत्वपूर्ण माध्यम है।

