मकर संक्रांति की तैयारियों से गुलजार हुए वाराणसी के बाजार, लाई-चूड़ा व तिलकुट की बढ़ी मांग

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वाराणसी। मकर संक्रांति पर्व को लेकर शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक उत्साह का माहौल बन गया है। जैसे-जैसे पर्व नजदीक आ रहा है, बाजारों में रौनक बढ़ती जा रही है। लाई-चूड़ा, तिलकुट, गुड़ और खिचड़ी सामग्री की दुकानों से प्रमुख बाजार सज चुके हैं। दुर्गाकुंड स्थित रविदास गेट, लंका, लहुराबीर, चौक समेत अन्य इलाकों में अस्थायी दुकानें लग गई हैं, जहां दिनभर लोगों की भीड़ उमड़ रही है।

मकर संक्रांति पर लाई-चूड़े का विशेष धार्मिक और पारंपरिक महत्व माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन घरों में बच्चे, बुजुर्ग और युवा सभी चूड़ा-दही के साथ तिलकुट व तिल से बनी मिठाइयों का सेवन करते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में लोग मिलों में चूड़ा कुटवाकर उसे बहन-बेटियों के घर भेजते हैं। इसी परंपरा के चलते इन दिनों बाजारों में खिचड़ी सामग्री की जमकर खरीदारी हो रही है।

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बहन-बेटियों को भेजी जा रही खिचड़ी
पर्व से पहले ही बहन-बेटियों को खिचड़ी भेजने की परंपरा निभाने के लिए परिवारों ने खरीदारी शुरू कर दी है। दुकानदारों के अनुसार, देर रात तक दुकानें खुली रह रही हैं और खिचड़ी के सामान तैयार किए जा रहे हैं। दुकानदार सोनू सोनकर ने बताया कि, “पिछले दो-तीन दिनों से ग्राहकों की संख्या तेजी से बढ़ी है। लोग एक साथ कई-कई पैकेट खरीद रहे हैं ताकि समय पर बहन-बेटियों को भेज सकें।”

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तिल और गुड़ से बनी मिठाइयों की सबसे ज्यादा मांग
इस बार बाजार में तिल और गुड़ से बनी वस्तुओं की विशेष मांग देखी जा रही है। तिलकुट, तिलवा, मूंगफली पट्टी और गुड़ की मिठाइयों को लोग खूब पसंद कर रहे हैं। दुकानदार सोनू सोनकर के अनुसार, “संक्रांति नजदीक आते ही मांग और बढ़ जाती है। अभी भीड़ लगातार बढ़ रही है।”

बाजार में खिचड़ी सामग्री के दाम (प्रति किलो)

  • लाई – ₹60
  • चूड़ा – ₹60
  • गट्टा – ₹80
  • मूंगफली की पट्टी – ₹300
  • गुड़ का तिलवा – ₹100
  • लाई का ढूंढा – ₹140
  • बेसन के लड्डू – ₹270
  • रामदाना – ₹280
  • गुड़ की काजू कतली – ₹960

व्यापारियों का कहना है कि पर्व के एक-दो दिन पहले और भी ज्यादा भीड़ उमड़ने की संभावना है। इससे बाजारों में और रौनक बढ़ेगी तथा व्यापारियों को अच्छे कारोबार की उम्मीद है।

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ग्रामीण इलाकों में भी दिख रहा उत्साह
ग्रामीण क्षेत्रों में भी मकर संक्रांति को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। लोग चूड़ा पिसवाने के लिए मिलों का रुख कर रहे हैं और तिल-गुड़ की खरीदारी कर रहे हैं। गांवों से शहर तक पर्व को लेकर उत्साह का माहौल बना हुआ है। कुल मिलाकर, मकर संक्रांति ने वाराणसी के बाजारों में फिर से पारंपरिक रंग भर दिया है। लाई-चूड़ा, तिलकुट और खिचड़ी सामग्री की खुशबू के साथ पर्व का उल्लास हर गली-मोहल्ले में नजर आने लगा है।

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