वाराणसी: दुर्गा मंदिर में तीन दिवसीय संगीत समारोह, मनोज तिवारी भी देंगे प्रस्तुति
तीन दिवसीय संगीतमय श्रृंगार महोत्सव में देशभर के कलाकार देंगे प्रस्तुति, शहनाई, सितार, बांसुरी और कथक रहेगा आकर्षण
वाराणसी। काशी के प्रसिद्ध दुर्गाकुंड मंदिर में मां दुर्गा के वार्षिक संगीतमय श्रृंगार महोत्सव का शुभारंभ मंगलवार से होने जा रहा है। तीन दिवसीय इस भव्य संगीत समारोह में देश के विभिन्न हिस्सों से आए ख्यातिलब्ध शास्त्रीय संगीतज्ञ, लोकगायक और नृत्य कलाकार मां दुर्गा के चरणों में अपनी कला अर्पित करेंगे। धार्मिक आस्था और भारतीय संगीत परंपरा के संगम से सजे इस आयोजन को लेकर मंदिर परिसर में तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
महोत्सव के दौरान तीनों दिन अलग-अलग रंग और शैली के संगीत एवं नृत्य की प्रस्तुतियां होंगी। मंदिर परिसर में होने वाले कार्यक्रम में शास्त्रीय वादन से लेकर भक्ति संगीत और लोकगायन तक की प्रस्तुतियां श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभूति कराएंगी।

शहनाई वादन से होगा आगाज
महोत्सव के पहले दिन मंगलवार को कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक वादन और शास्त्रीय संगीत से होगी। प्रसिद्ध शहनाई वादक पं. जवाहर लाल अपनी शहनाई की मधुर धुनों से कार्यक्रम का शुभारंभ करेंगे। इसके बाद पद्मश्री पं. शिवनाथ और पं. देवव्रत सितार की जुगलबंदी प्रस्तुत करेंगे। सितार की जुगलबंदी समारोह के प्रमुख आकर्षणों में शामिल रहेगी।
वहीं, प्रसिद्ध बांसुरी वादक पं. राजेंद्र प्रसन्ना का बांसुरी वादन भी श्रोताओं के लिए विशेष आकर्षण रहेगा। बांसुरी की मधुर तान और शास्त्रीय संगीत की प्रस्तुतियों से मंदिर परिसर का वातावरण भक्तिमय होने की उम्मीद है। इसके अलावा कथक नृत्य और शास्त्रीय गायन की प्रस्तुतियां भी पहले दिन कार्यक्रम को विविधता प्रदान करेंगी।

दूसरे दिन बहेगी भक्ति संगीत की धारा
महोत्सव के दूसरे दिन बुधवार को शाम चार बजे से देर रात तक भक्ति संगीत का कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। दिनभर चलने वाली प्रस्तुतियों के दौरान श्रद्धालु भजन और लोक संगीत का आनंद ले सकेंगे। महाआरती के बाद प्रसिद्ध लोकगायक अरविंद अकेला 'कल्लू' भजनों की प्रस्तुति देंगे।
कल्लू की प्रस्तुति को लेकर श्रद्धालुओं में खास उत्साह है। महाआरती के बाद भक्ति संगीत के बीच लोकगायन का यह कार्यक्रम धार्मिक वातावरण को और अधिक जीवंत बनाएगा।

भरतनाट्यम और भजन संध्या से होगा समापन
महोत्सव के अंतिम दिन बृहस्पतिवार को भी संगीत और नृत्य की विविध प्रस्तुतियां होंगी। समापन दिवस पर भरतनाट्यम, शास्त्रीय संगीत और भजन संध्या का आयोजन किया जाएगा। भारतीय शास्त्रीय नृत्य की प्रस्तुति के साथ संगीत कार्यक्रम को आगे बढ़ाया जाएगा।
समापन समारोह का प्रमुख आकर्षण गायक एवं सांसद मनोज तिवारी मृदुल की गायकी होगी। वह अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से श्रद्धालुओं और संगीत प्रेमियों को भक्ति रस में सराबोर करेंगे। उनके कार्यक्रम को लेकर भी आयोजन से जुड़े लोगों में उत्साह है।

मां के श्रृंगार के साथ संगीत की आराधना
दुर्गाकुंड मंदिर में आयोजित होने वाला यह वार्षिक संगीतमय श्रृंगार महोत्सव केवल मनोरंजन का कार्यक्रम नहीं, बल्कि संगीत को मां दुर्गा के चरणों में समर्पित करने की परंपरा से जुड़ा आयोजन है। तीन दिनों तक मंदिर परिसर में शास्त्रीय संगीत, लोकगायन और नृत्य की प्रस्तुतियों के माध्यम से कलाकार अपनी साधना मां को अर्पित करेंगे।
काशी की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा में संगीत का विशेष स्थान रहा है। ऐसे में दुर्गाकुंड मंदिर का यह आयोजन श्रद्धालुओं के साथ-साथ संगीत प्रेमियों के लिए भी विशेष महत्व रखता है। अलग-अलग विधाओं के कलाकारों की मौजूदगी से समारोह में भारतीय संस्कृति की विविध छटा देखने को मिलेगी।
आयोजन की जिम्मेदारी
तीन दिवसीय संगीतमय श्रृंगार महोत्सव का संयोजन विश्वेश्वर झा (सोनू महाराज) कर रहे हैं। आयोजन के मुख्य आयोजक बिंदु दूबे और मानसी दूबे हैं, जबकि कार्यक्रम का संचालन प्रभुनाथ राय करेंगे। आयोजकों के अनुसार, महोत्सव को धार्मिक गरिमा और सांस्कृतिक परंपरा के अनुरूप भव्य रूप देने की तैयारी की गई है।
तीन दिनों तक चलने वाले इस आयोजन में मां दुर्गा के दरबार में सुर, ताल, नृत्य और भक्ति का संगम देखने को मिलेगा। काशी के श्रद्धालुओं और संगीत प्रेमियों के लिए यह महोत्सव आध्यात्मिक आनंद के साथ भारतीय संगीत परंपरा से जुड़ने का विशेष अवसर साबित होगा।

