वाराणसी : इंश्योरेंस पॉलिसी अपडेट के नाम पर 12.5 लाख की ठगी,  अंतरराज्यीय साइबर गिरोह भंडाफोड़, सरगना समेत पांच गिरफ्तार

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वाराणसी। साइबर क्राइम टीम ने इंश्योरेंस पॉलिसी अपडेट कराने और अतिरिक्त लाभ दिलाने का झांसा देकर लाखों रुपये की ठगी करने वाले एक अंतरराज्यीय साइबर गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने गिरोह के सरगना समेत पांच आरोपियों को गिरफ्तार करते हुए उनके कब्जे से छह मोबाइल फोन, 65 हजार रुपये नकद और एक चार पहिया वाहन बरामद किया है। पुलिस इस गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों और विभिन्न राज्यों में इनके आपराधिक नेटवर्क की भी जांच कर रही है। आरोपियों ने 12.5 लाख की ठगी की घटना को अंजाम दिया था। 

पुलिस के अनुसार, 11 मई को वाराणसी निवासी एक व्यक्ति (काल्पनिक नाम जीशान) ने थाना साइबर क्राइम में शिकायत दर्ज कराई थी। पीड़ित ने बताया कि कुछ लोगों ने स्वयं को रिलायंस निप्पॉन लाइफ इंश्योरेंस का कर्मचारी और अधिकारी बताकर उससे संपर्क किया। आरोपियों ने इंश्योरेंस पॉलिसी अपडेट कराने, बकाया प्रीमियम जमा कराने और पॉलिसी पर अतिरिक्त लाभ एवं बोनस दिलाने का भरोसा दिलाया। विश्वास में लेने के बाद उन्होंने विभिन्न बहानों से करीब 12.5 लाख रुपये अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करा लिए। बाद में ठगी का एहसास होने पर पीड़ित ने साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज कराई।

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मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल के निर्देश पर विशेष जांच टीम गठित की गई। पुलिस उपायुक्त अपराध नीतू कादयान, अपर पुलिस उपायुक्त अपराध नृपेन्द्र तथा सहायक पुलिस आयुक्त साइबर अपराध विदुष सक्सेना की निगरानी में साइबर क्राइम टीम ने तकनीकी साक्ष्यों, बैंकिंग लेनदेन, मोबाइल लोकेशन और डिजिटल ट्रेल का गहन विश्लेषण किया। जांच के दौरान टीम ने हरियाणा, दिल्ली-एनसीआर और उत्तर प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में लगातार पतारसी और सुरागरसी की।

जांच और तकनीकी विश्लेषण के बाद पुलिस ने दिल्ली से गिरोह के पांच सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान शिव कुमार गौतम, अमन कुमार, विष्णु कुमार, राहुल कुमार और आलोक सिंह के रूप में हुई है। पूछताछ में सामने आया कि आरोपी पहले इंश्योरेंस पॉलिसी धारकों का डाटा अवैध तरीके से हासिल करते थे। इसके बाद वे खुद को इंश्योरेंस कंपनी का अधिकारी या कर्मचारी बताकर लोगों से संपर्क करते और पॉलिसी अपडेट, बोनस, मैच्योरिटी लाभ अथवा अन्य वित्तीय सुविधाओं का लालच देकर उन्हें अपने जाल में फंसाते थे। जब पीड़ित उनके झांसे में आ जाता, तो उससे अलग-अलग बैंक खातों में धनराशि ट्रांसफर करवा ली जाती थी।


पुलिस जांच में यह भी पता चला कि ठगी की रकम को पहले फर्जी "म्यूल" बैंक खातों में भेजा जाता था। इसके बाद कई खातों के माध्यम से रकम को इधर-उधर ट्रांसफर कर नकद निकाल लिया जाता था, ताकि जांच एजेंसियों के लिए धन के वास्तविक स्रोत और गंतव्य तक पहुंचना कठिन हो जाए। गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से एक आईफोन, पांच एंड्रॉयड मोबाइल फोन, 65 हजार रुपये नकद तथा एक चार पहिया वाहन बरामद किया गया है। पुलिस अब इस गिरोह के अन्य सहयोगियों, वित्तीय नेटवर्क और देश के अन्य राज्यों में दर्ज मामलों से इनके संबंधों की भी जांच कर रही है।

साइबर क्राइम पुलिस ने लोगों से अपील की है कि इंश्योरेंस पॉलिसी या बैंकिंग सेवाओं से संबंधित किसी भी कॉल, संदेश या ई-मेल पर बिना सत्यापन भरोसा न करें। किसी भी प्रकार की वित्तीय जानकारी, ओटीपी, बैंक खाते का विवरण या अन्य गोपनीय जानकारी किसी अज्ञात व्यक्ति के साथ साझा न करें। यदि किसी प्रकार की साइबर ठगी का संदेह हो तो तत्काल साइबर हेल्पलाइन 1930 या निकटतम साइबर क्राइम थाने से संपर्क करें। इस पूरे अभियान में प्रभारी निरीक्षक उदयवीर सिंह, निरीक्षक योगेंद्र प्रसाद, निरीक्षक शिवाकांत शुक्ला, उपनिरीक्षक संजीव कनौजिया सहित साइबर क्राइम टीम के अन्य पुलिसकर्मियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

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