वाराणसी : बारिश में धंसी अस्सी घाट मार्ग की सड़क, हादसे की आशंका, तत्काल मरम्मत की मांग
वाराणसी। भेलूपुर थाना क्षेत्र के अस्सी चौराहे से अस्सी घाट जाने वाले मुख्य मार्ग पर सड़क धंस जाने से स्थानीय लोगों, श्रद्धालुओं और पर्यटकों में चिंता का माहौल है। पहली ही बारिश के बाद सड़क का एक हिस्सा गहराई तक धंस गया, जिससे इस अत्यंत व्यस्त मार्ग पर दुर्घटना की आशंका बढ़ गई है। फिलहाल स्थानीय नागरिकों ने किसी संभावित हादसे को रोकने के लिए धंसे हुए हिस्से के चारों ओर अस्थायी रूप से पटरी, लकड़ी और अवरोधक लगाकर राहगीरों व वाहन चालकों को सतर्क करने का प्रयास किया है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, अस्सी घाट जाने वाला यह मार्ग काशी के सबसे व्यस्त रास्तों में शामिल है। प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु, पर्यटक और स्थानीय नागरिक इसी मार्ग से अस्सी घाट पहुंचते हैं। विश्व प्रसिद्ध गंगा आरती, धार्मिक आयोजनों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में शामिल होने वाले अधिकांश लोगों की आवाजाही भी इसी सड़क से होती है। ऐसे में सड़क धंसने की घटना सुरक्षा की दृष्टि से गंभीर चिंता का विषय बन गई है।

क्षेत्रीय नागरिकों ने बताया कि भगवान जगन्नाथ की डोली यात्रा के गुजरने के कुछ घंटों बाद ही सड़क अचानक धंस गई। संयोगवश उस समय मार्ग पर भीड़ कम थी, जिससे कोई अप्रिय घटना नहीं हुई। लोगों का कहना है कि यदि यह हादसा यात्रा के दौरान या अधिक भीड़ के समय होता, तो बड़ा हादसा हो सकता था।
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि इस क्षेत्र में सड़क धंसने की समस्या नई नहीं है। समय-समय पर सड़क बैठने और गड्ढे बनने की घटनाएं सामने आती रही हैं, लेकिन हर बार केवल अस्थायी मरम्मत कर समस्या को टाल दिया जाता है। स्थायी समाधान नहीं होने के कारण बरसात के मौसम में यही समस्या दोबारा उभर आती है।

क्षेत्रवासियों ने नगर निगम और संबंधित विभाग से मांग की है कि धंसे हुए हिस्से की तत्काल तकनीकी जांच कराई जाए। साथ ही भूमिगत सीवर लाइन, जलनिकासी व्यवस्था और अन्य उपयोगिता सेवाओं की भी जांच कराकर सड़क धंसने के वास्तविक कारणों का पता लगाया जाए, ताकि स्थायी मरम्मत सुनिश्चित की जा सके।
लोगों का कहना है कि यदि जल्द प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई तो यह धंसी हुई सड़क किसी भी समय बड़े हादसे का कारण बन सकती है। उन्होंने प्रशासन से इस महत्वपूर्ण मार्ग की प्राथमिकता के आधार पर मरम्मत कर सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करने की मांग की है, जिससे श्रद्धालुओं, पर्यटकों और स्थानीय नागरिकों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।

