वाराणसी : लापरवाही से मौत के आरोप में डॉक्टर और अस्पताल के मैनेजर पर केस दर्ज करने के निर्देश

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वाराणसी। गाल ब्लैडर में पथरी के ऑपरेशन के बाद युवक की मौत के मामले में अदालत ने एपेक्स अस्पताल के प्रबंधक और संबंधित चिकित्सक के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया है। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (प्रथम) की अदालत ने प्रार्थना पत्र पर सुनवाई के बाद चितईपुर पुलिस को एफआईआर दर्ज कर विधिक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

ऑपरेशन के बाद बिगड़ी हालत, कुछ ही दिनों में मौत
मामला भारतीय तिब्बत सीमा बल (आईटीबीपी) के जवान सुजीत कुमार सिंह से जुड़ा है। परिजनों के अनुसार, अप्रैल 2025 में उन्हें पेट में दर्द की शिकायत पर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जांच के बाद गाल ब्लैडर में पथरी बताकर 23 अप्रैल को ऑपरेशन किया गया। आरोप है कि ऑपरेशन के बाद उनकी हालत बिगड़ती चली गई और कुछ दिनों के भीतर उनकी मौत हो गई।

परिजनों का कहना है कि ऑपरेशन के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव हुआ और संक्रमण फैल गया, जिससे स्थिति गंभीर हो गई। उनका आरोप है कि समय रहते सही जांच और उपचार नहीं किया गया।

जांच रिपोर्ट में संक्रमण से मौत की बात
मुख्य चिकित्साधिकारी के निर्देश पर गठित जांच टीम ने अपनी रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत की। रिपोर्ट में बताया गया कि ऑपरेशन के बाद संक्रमण बढ़ने और अत्यधिक खून बहने के कारण मरीज की मौत हुई। हालांकि, रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि यदि समय रहते उचित जांच और उपचार किया जाता तो स्थिति संभाली जा सकती थी।

परिजनों ने लगाया लापरवाही का आरोप
मृतक के परिजनों का आरोप है कि चिकित्सक ने आवश्यक सावधानी नहीं बरती और मरीज की हालत बिगड़ने के बाद भी उचित इलाज में देरी की गई। उन्होंने यह भी कहा कि ऑपरेशन के दौरान एक महत्वपूर्ण नस कट जाने की संभावना है, जिससे अत्यधिक रक्तस्राव हुआ।

इस मामले में पहले पुलिस ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की थी, जिसके बाद परिजनों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया।

अदालत का आदेश, दर्ज होगी एफआईआर
अदालत ने प्रार्थना पत्र पर सुनवाई करते हुए चितईपुर थाना प्रभारी को 13 अक्टूबर तक मामले में रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था। अब अदालत ने स्पष्ट आदेश दिया है कि एपेक्स अस्पताल के प्रबंधक डॉ. संतोष कुमार सिंह और चिकित्सक डॉ. अनुराग दीक्षित के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर विधिक कार्रवाई की जाए।

चिकित्सा लापरवाही पर सख्त रुख
अदालत के इस आदेश को चिकित्सा लापरवाही के मामलों में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे यह संदेश गया है कि मरीजों की सुरक्षा से जुड़ी किसी भी प्रकार की लापरवाही को गंभीरता से लिया जाएगा।

अब पुलिस की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि ऑपरेशन के दौरान वास्तव में क्या हुआ और किस स्तर पर चूक हुई। फिलहाल अदालत के आदेश के बाद अस्पताल प्रबंधन और संबंधित चिकित्सक के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया शुरू होने का रास्ता साफ हो गया है।

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