आठ महीने में ₹358 करोड़ की कमाई, वाराणसी विकास प्राधिकरण ने बनाया नया रिकॉर्ड

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वाराणसी। विकास प्राधिकरण (वीडीए) ने महज आठ महीनों में आय का नया रिकॉर्ड बनाते हुए नवम्बर 2025 से जून 2026 के बीच कुल 358 करोड़ रुपये की आय अर्जित की है। 29 जून 2026 को आयोजित वीडीए की 134वीं बोर्ड बैठक में इस उपलब्धि की विशेष रूप से सराहना की गई। बोर्ड ने उपाध्यक्ष पूर्ण बोरा के नेतृत्व में कार्य कर रही पूरी टीम की मेहनत, पारदर्शिता और कार्यकुशलता की प्रशंसा करते हुए इसे बदलती कार्यसंस्कृति का परिणाम बताया।

 

वीडीए की आय में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिली। नवम्बर 2025 में 14.39 करोड़ रुपये से शुरुआत हुई, जबकि मार्च 2026 में सर्वाधिक 83.68 करोड़ रुपये की आय दर्ज की गई। इसके अलावा दिसम्बर में 22.07 करोड़, जनवरी में 37.65 करोड़, फरवरी में 43.16 करोड़, अप्रैल में 64.04 करोड़, मई में 45.38 करोड़ और जून में 48 करोड़ रुपये की आय हुई। इस प्रकार आठ महीनों में कुल आय 358 करोड़ रुपये तक पहुंच गई।

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इस उल्लेखनीय सफलता के पीछे दो प्रमुख कारण रहे। पहला, भवन निर्माण के नक्शे स्वीकृत करने की प्रक्रिया में बड़ा सुधार किया गया। पहले जहां लोगों को लंबा इंतजार करना पड़ता था, वहीं अब अधिकांश नक्शे मात्र 7 से 15 दिनों के भीतर स्वीकृत हो रहे हैं। तेज और पारदर्शी प्रक्रिया से लोगों का भरोसा बढ़ा और अधिक संख्या में लोग स्वयं आगे आकर अपने भवनों के नक्शे स्वीकृत कराने लगे। इससे भवन अनुभाग को 104.61 करोड़ रुपये की आय प्राप्त हुई।

 

दूसरा बड़ा कारण वीडीए की संपत्तियों का प्रभावी प्रबंधन रहा। प्राधिकरण ने अवैध कब्जे वाली अथवा लंबे समय से खाली पड़ी जमीनों को कानूनी प्रक्रिया के तहत कब्जामुक्त कराया और उनकी खुली एवं पारदर्शी नीलामी कराई। इससे सम्पत्ति अनुभाग के माध्यम से 108.64 करोड़ रुपये की आय हुई। इसके अतिरिक्त अन्य विभिन्न मदों से 87.15 करोड़ रुपये की आय अर्जित की गई।

 

134वीं बोर्ड बैठक में सदस्यों ने माना कि यह उपलब्धि केवल राजस्व बढ़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रशासनिक सुधार, पारदर्शिता, जवाबदेही और बेहतर कार्यसंस्कृति का भी उदाहरण है। बोर्ड ने उम्मीद जताई कि इसी तरह की कार्यशैली भविष्य में भी वाराणसी के सुनियोजित विकास को गति देगी और शहर के बुनियादी ढांचे को और अधिक मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

 

वीडीए की यह उपलब्धि इस बात का भी संकेत है कि यदि सरकारी संस्थानों में पारदर्शिता, जवाबदेही और समयबद्ध कार्यप्रणाली को प्राथमिकता दी जाए, तो बेहतर परिणाम हासिल किए जा सकते हैं। इससे न केवल संस्थान की आय बढ़ती है, बल्कि नागरिकों का विश्वास भी मजबूत होता है और विकास परियोजनाओं को नई गति मिलती है।

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