वाराणसी : रोजाना नए-नए हथकंडे अपना रहे साइबर जालसाज, सेना का अधिकारी और बैंककर्मी बनकर 9.31 लाख की ठगी, जांच में जुटी पुलिस 

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वाराणसी। दो अलग-अलग मामलों में साइबर ठगों ने सेना के अधिकारी और बैंक अधिकारी बनकर वाराणसी के दो लोगों से कुल 9.31 लाख रुपये की ठगी कर ली। चितईपुर और भेलूपुर थाना क्षेत्रों में दर्ज इन मामलों ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि साइबर अपराधी लोगों को झांसा देने के लिए नए-नए तरीके अपना रहे हैं। दोनों मामलों में पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

चितईपुर थाना क्षेत्र के सुंदरपुर स्थित नेवादा निवासी एवं गणेश पेपर मार्ट्स के संचालक पवन कुमार को एक व्यक्ति ने फोन कर खुद को भारतीय सेना का अधिकारी बताया। उसने अपना पता गोरखा ट्रेनिंग सेंटर, कैंटोनमेंट वाराणसी बताते हुए 25 हजार पेपर प्लेट का बड़ा ऑर्डर देने की बात कही। विश्वास जीतने के लिए उसने जीएसटी नंबर भी साझा किया। बाद में रक्षा मंत्रालय से भुगतान भेजने के नाम पर बैंक खाते का सत्यापन कराने का झांसा दिया और एक खाते को लिंक कराने की प्रक्रिया समझाई। व्यापारी द्वारा निर्देशों का पालन करते ही साइबर ठग ने पांच अलग-अलग ट्रांजेक्शन के माध्यम से उनके खाते से 7.67 लाख रुपये निकाल लिए। ठगी का एहसास होने पर पवन कुमार ने साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई और चितईपुर थाने में तहरीर दी।

वहीं भेलूपुर थाना क्षेत्र के लखराव निवासी सुरेंद्र को 7 जून को व्हाट्सएप कॉल कर एक व्यक्ति ने खुद को बैंक ऑफ बड़ौदा का उप प्रबंधक बताया। उसने डेबिट कार्ड सक्रिय कराने का झांसा देकर बैंकिंग प्रक्रिया पूरी कराने के नाम पर सुरेंद्र को अपने जाल में फंसा लिया। 7 से 10 जून के बीच यूपीआई के जरिए कई ट्रांजेक्शन कर उनके खाते से कुल 1.64 लाख रुपये निकाल लिए गए। 11 जून को बैंक पहुंचने पर खाते से रकम गायब होने की जानकारी मिली। इसके बाद उन्होंने बैंक प्रबंधन और साइबर हेल्पलाइन से संपर्क कर शिकायत दर्ज कराई।

चितईपुर थाना प्रभारी राकेश गौतम और भेलूपुर थाना प्रभारी दुर्गा सिंह ने बताया कि दोनों मामलों में एफआईआर दर्ज कर साइबर सेल की मदद से बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और डिजिटल ट्रांजेक्शन की जांच की जा रही है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर बैंकिंग जानकारी, ओटीपी, यूपीआई पिन या खाता संबंधी विवरण साझा न करें और संदिग्ध कॉल मिलने पर तत्काल 1930 हेल्पलाइन या पुलिस से संपर्क करें।

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